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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया: लोकतंत्र, छात्रों और जवाबदेही की जीत….

आज का दिन देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में याद किया जाएगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस बात का प्रमाण है कि जब छात्र, युवा, अभिभावक और आम नागरिक लोकतांत्रिक तरीके से एकजुट होकर अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाते हैं, तो सत्ता को भी जनता की भावनाओं का सम्मान करना पड़ता है।

इस अवसर पर चंडीगढ़ की पूर्व महापौर श्रीमती कमलेश बनारसी दास ने कहा कि यह केवल किसी मंत्री के पद छोड़ने का मामला नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त लापरवाही, अनियमितताओं और जवाबदेही की कमी के विरुद्ध जनता के संघर्ष की जीत है। यह उन लाखों छात्रों की जीत है, जिनका भविष्य इस पूरे विवाद से प्रभावित हुआ और जिन्होंने न्याय तथा पारदर्शिता की मांग को मजबूती से उठाया।

श्रीमती कमलेश बनारसी दास ने कहा कि जिन व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है, उनके खिलाफ कानून के अनुसार निष्पक्ष, पारदर्शी और सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। केवल इस्तीफा पर्याप्त नहीं है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों को कठोर दंड मिले तथा इस प्रकरण में पुलिस और संबंधित एजेंसियों की भूमिका की भी गंभीरता से समीक्षा की जाए।

उन्होंने कहा कि यदि जांच के दौरान पुलिस या प्रशासनिक स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही, ढिलाई अथवा मिलीभगत सामने आती है, तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। देश के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता।

अंत में श्रीमती कमलेश बनारसी दास ने इस ऐतिहासिक संघर्ष में सहभागी रहे सभी विद्यार्थियों, अभिभावकों, युवाओं और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले प्रत्येक नागरिक को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह केवल एक आंदोलन की सफलता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, जवाबदेही और न्याय की दिशा में एक सशक्त संदेश है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह संघर्ष भविष्य में शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और छात्र हितैषी बनाने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगा।