डॉ. नरेश चंडीगढ़ साहित्य अकादमी के प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चयनित.,..
चंडीगढ़, 27 अक्टूबर: प्रसिद्ध कवि, लेखक और शिक्षाविद् डॉ. नरेश को वर्ष 2025 के लिए चंडीगढ़ साहित्य अकादमी द्वारा उर्दू साहित्य में आजीवन योगदान के लिए दिए जाने वाले ‘अवार्ड ऑफ रिकग्निशन’ (सम्मान पुरस्कार) के लिए चुना गया है। डॉ. नरेश पंजाब विश्वविद्यालय में आधुनिक साहित्य के पूर्व प्रोफेसर और चंडीगढ़ साहित्य अकादमी (चंडीगढ़ एकेडमी ऑफ लेटर्स) के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। यह प्रतिष्ठित सम्मान उर्दू साहित्य में उनके उल्लेखनीय योगदान और छह दशकों से अधिक समय के उनके समृद्ध साहित्यिक एवं शैक्षणिक सफर को मान्यता देता है।
इस सम्मान के लिए आभार व्यक्त करते हुए डॉ. नरेश ने उर्दू साहित्य में उनके आजीवन योगदान को मान्यता देने के लिए चंडीगढ़ साहित्य अकादमी का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन्हें अपनी साहित्यिक यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
डॉ. नरेश ने उर्दू, हिंदी, पंजाबी और अंग्रेजी साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कविता, कथा साहित्य, साहित्यिक आलोचना, दर्शन, आध्यात्मिकता और अन्य विषयों पर 100 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। इसके अलावा, उनकी 1,000 से अधिक रचनाएं, जिनमें लेख, कविताएं और लघु कथाएं शामिल हैं, विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी रचनाएं अनेक साझा साहित्यिक संकलनों में भी शामिल हैं।
डॉ. नरेश की साहित्यिक यात्रा में उर्दू का विशेष स्थान रहा है। इस भाषा के प्रति उनके योगदान को कई प्रमुख साहित्यिक संस्थानों और सरकारों ने सम्मानित किया है। उनके प्रमुख सम्मानों में गालिब पुरस्कार, मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी का अखिल भारतीय पुरस्कार, पंजाब सरकार का शिरोमणि साहित्यकार पुरस्कार, ख्वाजा अल्ताफ हुसैन हाली पुरस्कार, लाला जगत नारायण पुरस्कार और हरियाणा सरकार का फख्र-ए-हरियाणा पुरस्कार शामिल हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार की उर्दू अकादमियों से भी पुरस्कार मिल चुके हैं। उनकी पुस्तक ‘लौह-ए-हयात’ को उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी द्वारा सम्मानित किया गया था।
साहित्य के क्षेत्र में उनके व्यापक योगदान के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी मिले हैं। इनमें उनकी पुस्तक ‘चिंतन और मूल्यांकन’ के लिए भारत सरकार का पुरस्कार तथा हिंदी, उर्दू और पंजाबी साहित्य में उनके योगदान के लिए हरियाणा सरकार का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार शामिल हैं।
वर्ष 2025 के लिए चंडीगढ़ साहित्य अकादमी का अवार्ड ऑफ रिकग्निशन डॉ. नरेश की साहित्यिक यात्रा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनका साहित्यिक जीवन उर्दू साहित्य को समृद्ध करने और भारत की प्रमुख साहित्यिक भाषाओं के बीच आपसी जुड़ाव और संवाद को बढ़ावा देने के लिए समर्पित रहा है।


