भाजपा सरकार द्वारा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) भारतीय नागरिकता पर प्रहार : एडवोकेट विवेक हंस गरचा…..
चंडीगढ़. न्यू कांग्रेस पार्टी (NCP) के केंद्रीय अध्यक्ष एडवोकेट विवेक हंस गरचा ने निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया देश के करोड़ों नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार इस प्रक्रिया के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से नागरिकों के अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। एडवोकेट विवेक हंस गरचा ने कहा कि यह कदम सामाजिक समानता और संविधान की मूल भावना के विपरीत है तथा इसे उन्होंने “मनुस्मृति की सोच को अप्रत्यक्ष रूप से लागू करने की दिशा में पहला कदम” बताया।
एडवोकेट विवेक हंस गरचा ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार, सम्मान और लोकतांत्रिक भागीदारी की गारंटी देता है। यदि किसी भी नागरिक को बिना पर्याप्त आधार या पारदर्शी प्रक्रिया के मतदाता सूची अथवा नागरिक अधिकारों से वंचित किया जाता है, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा।
एडवोकेट विवेक हंस गरचा ने कहा कि वेस्ट बंगाल में TMC पार्टी के जिस इलाके में MP जीते हैं, बड़ी हैरानी की बात है, उसी MP के MLA हारे हैं। क्योंकि MP इलेक्शन के बाद SIR हो गई थी। मतलब वोटर लिस्ट में से भाजपा विरोधी वोट किसी ना किसी बहाने से काटे गई व भाजपा के हक्क के वोट वोटर लिस्ट में डाल दिए गए। यही हाल अब पंजाब में होने की आशंका है। एडवोकेट विवेक हंस गरचा ने कहा सभी पार्टियां, बुद्धिजीवी भाजपा सरकार की इस एस.आई.आर के सिस्टम को गलत कह रहे हैं। क्योंकि जिस के पास अगर पिछले 21 साल का अपने बाप दादा का वोटर कार्ड या कोई रिकॉर्ड नहीं है या किसी ने अपना घर बदल दिया, तो शायद उसका वोट काट दिया जाए।
एडवोकेट विवेक हंस गरचा ने यह भी कहा कि चंडीगढ़ भाजपा के प्रवक्ता आज कल बोहत बयान दे रहे हैं कि कांग्रेस सरकार की प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी ने 1975 में इमरजेंसी लगा कर लोकतन्त्र की हत्या की थी। तो अब भाजपा सरकार जिस तरीके से एस.आई.आर के जरिए सत्ता हांसिल करने के हथकंडे अपना रही है। यह तो इंदिरा गांधी की इमरजेंसी की डिक्टेटर से भी ऊपर का काम है। नागरिकों के वोट की हत्या कर रही है। तो क्या यह लोकतंत्र की हत्या नहीं है। बल्कि भाजपा ने तो इंदिरा गांधी के इमरजेंसी को भी मात दे दी है।
इसी लिए इस प्रक्रिया के कारण आम नागरिकों के संवैधानिक अधिकार प्रभावित होते हैं, इसलिए अब न्यू कांग्रेस पार्टी लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से देशव्यापी विरोध दर्ज कराने से पीछे नहीं हटेगी।


