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सार्वभौमिक मानवीय मूल्य: व्यावसायिक नैतिकता की ओर एक यात्रा” विषय पर दो-दिवसीय कार्यशाला…..

सरकारी वाणिज्य एवं व्यवसाय प्रशासन महाविद्यालय, सेक्टर 50, चंडीगढ़ में आज “सार्वभौमिक मानवीय मूल्य: व्यावसायिक नैतिकता की ओर एक यात्रा” विषय पर दो-दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। यह कार्यशाला पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के पाठ्यक्रम विकास एवं सतत शिक्षा निदेशालय (डीसीडीसी) के तत्वावधान में आयोजित की जा रही है। उद्घाटन दिवस पर लगभग 33 विद्यार्थियों तथा क्षेत्र भर से लगभग 70 शिक्षाविदों सहित कुल 110 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. (डॉ.) भोला राम गुर्जर, निदेशक, एनआईटीटीटीआर चंडीगढ़ उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र में वृक्षारोपण, पुष्प स्वागत तथा दीप शिखा प्रज्ज्वलन शामिल रहा। डॉ. संगम कपूर, प्राचार्या, जीसीसीबीए-50 ने सभी का स्वागत किया, इसके पश्चात सुश्री पालिका अरोड़ा, पीसीएस, निदेशक उच्चतर शिक्षा, चंडीगढ़ प्रशासन, प्रो. पूनम अग्रवाल, डीन, जीसीसीबीए-50 ने अपने विचार व्यक्त किए, तथा अंत में प्रो. गुर्जर का अध्यक्षीय संबोधन हुआ। डॉ. अमरप्रीत सिंह सिझर, उप-प्राचार्य, अन्य संकाय सदस्यों के साथ उपस्थित रहे। सत्र का समापन सम्मान समारोह तथा समूह छायाचित्र के साथ हुआ।

इस अवसर पर बोलते हुए मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) भोला राम गुर्जर ने कहा, “व्यावसायिक दक्षता तभी सार्थक होती है जब वह मानवीय मूल्यों में निहित हो; इस प्रकार की कार्यशालाएँ युवा मन में क्षमता के साथ-साथ चरित्र निर्माण में भी सहायक होती हैं।” सुश्री पालिका अरोड़ा, पीसीएस, निदेशक उच्चतर शिक्षा, चंडीगढ़ प्रशासन ने कहा, “उच्च शिक्षा संस्थानों को ज्ञान के साथ-साथ नैतिकता और सहानुभूति के संवर्धन पर भी उतना ही ध्यान देना चाहिए, और यह कार्यशाला इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।” डॉ. संगम कपूर, प्राचार्या, जीसीसीबीए-50 ने कहा, “विद्यार्थियों को मूल्य-आधारित शिक्षा से परिचित कराना हमारा निरंतर प्रयास रहा है, ताकि वे उत्तरदायी पेशेवर एवं नागरिक बन सकें।” प्रो. पूनम अग्रवाल, डीन, जीसीसीबीए-50 ने कहा, “सच्ची शिक्षा विनम्रता प्रदान करती है (‘विद्या ददाति विनयं’), जो समस्त व्यावसायिक नैतिकता एवं व्यक्तिगत आचरण की आधारशिला है।”

तकनीकी सत्रों में डॉ. पी. के. सिंगला ने “नैतिकता एवं मूल्यों की अवधारणा और महत्व” विषय पर, डॉ. शिवानी शर्मा ने “धर्मो रक्षति रक्षितः: भारतीय मूल्य प्रणाली को समझना” विषय पर, तथा डॉ. गरिमा जोशी ने “पारिवारिक मूल्य एवं जीवन में सामंजस्य” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। दिन का समापन उच्च चाय के दौरान एक संवादात्मक चर्चा के साथ हुआ।

धन्यवाद ज्ञापन कार्यशाला की महासचिव डॉ. प्रीति शारदा द्वारा प्रस्तुत किया गया।