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100 दिन का हिसाब दो मेयर साहब….

पंचकूला : नगर निगम पंचकूला के मेयर और पार्षदों के शपथ ग्रहण को आज 100 दिन पूरे हो गए हैं, लेकिन इन 100 दिनों का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखा जाए तो उपलब्धियों से ज्यादा सवाल खड़े होते हैं। इंडियन नेशनल लोकदल के पंचकूला जिलाध्यक्ष शहरी एवं प्रदेश कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने कहा कि भाजपा के पास नगर निगम में स्पष्ट बहुमत है, मेयर भाजपा का है और प्रदेश में सरकार भी भाजपा की है, इसके बावजूद पंचकूला की बुनियादी समस्याएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं।

मनोज अग्रवाल ने कहा कि 100 दिनों में सबसे बड़ा सवाल निगम की आर्थिक स्थिति को लेकर है। उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों के अनुसार निगम का राजस्व ₹307.34 करोड़ से घटकर ₹167.65 करोड़ रह गया, यानी करीब ₹139.69 करोड़ की भारी गिरावट आई। दूसरी ओर निगम का खर्च ₹168.60 करोड़ से बढ़कर ₹190.50 करोड़ पहुंच गया। यानी आमदनी घट रही है और खर्च बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि सबसे चिंताजनक स्थिति संपत्ति कर की आय की है। आंकड़ों के अनुसार यह आय ₹159.82 करोड़ से गिरकर मात्र ₹40.54 करोड़ रह गई। ऐसे में सवाल है कि निगम की आय बढ़ाने के लिए मेयर और भाजपा नेतृत्व ने 100 दिनों में क्या ठोस कदम उठाए?

₹138.74 करोड़ के सरप्लस से ₹22.84 करोड़ के घाटे तक कैसे पहुंचा निगम?

अग्रवाल ने कहा कि जिस नगर निगम के खाते में पहले ₹138.74 करोड़ का सरप्लस बताया गया था, वह अब करीब ₹22.84 करोड़ के घाटे में पहुंच गया है। यानी वित्तीय स्थिति में लगभग ₹161.58 करोड़ का नकारात्मक बदलाव चिंता का गंभीर विषय है।

उन्होंने कहा कि भाजपा को जनता को यह बताना चाहिए कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि निगम की आमदनी इतनी तेजी से गिरी और खर्च लगातार बढ़ता गया? क्या वित्तीय प्रबंधन की कोई ठोस योजना बनाई गई है या पंचकूला नगर निगम को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है?

मनोज अग्रवाल ने कहा कि बरसात के दौरान शहर के विभिन्न हिस्सों में जलभराव, सीवरेज ओवरफ्लो, गलियों में गंदा पानी, टूटी सड़कें और सफाई की समस्याएं सामने आती रहीं। जबकि मेयर के 100 दिन के एजेंडे में रोड गलियों की सफाई-मरम्मत, सीवरेज समस्या, सड़क पैचवर्क और पार्कों के रखरखाव जैसे मुद्दे प्रमुख थे।

उन्होंने सवाल किया कि जब इन्हीं समस्याओं को पहले 100 दिनों में ठीक करने का वादा किया गया था तो फिर बरसात आते ही वही समस्याएं जनता के सामने क्यों खड़ी हो गईं?

अग्रवाल ने कहा कि नगर निगम चुनाव के चार महीने बाद भी वरिष्ठ डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर की टीम का गठन नहीं हुआ, जो कि नियमानुसार 60 दिन में होना चाहिए था और 100 दिन पूरे होने पर भी इस मुद्दे को लेकर भाजपा नेतृत्व को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि 20 सदस्यीय सदन में भाजपा के पास बहुमत, भाजपा का मेयर और ऊपर भाजपा सरकार—फिर नगर निगम की पूरी राजनीतिक व्यवस्था गठित करने में इतनी देरी क्यों?

अग्रवाल ने कहा कि पंचकूला जैसे योजनाबद्ध शहर में भी जगह-जगह कचरा, गंदगी, टूटी सड़कें, बंद रोड गलियां और सीवरेज की समस्या दिखाई दे तो 100 दिन के कार्यकाल का मूल्यांकन जनता किस आधार पर करे?

उन्होंने कहा कि अब भाजपा को फोटो और बैठकों का नहीं बल्कि काम का हिसाब देना चाहिए।

मनोज अग्रवाल ने मेयर से सवाल किया कि 100 दिनों में कितनी सड़कें ठीक हुईं, कितनी रोड गलियां साफ हुईं, कितने सीवरेज ओवरफ्लो स्थायी रूप से बंद हुए, कितने कचरा प्वाइंट खत्म किए गए और निगम की गिरती आय को रोकने के लिए क्या वित्तीय योजना बनाई गई?

उन्होंने कहा कि पंचकूला की जनता अब 100 दिन का जश्न नहीं, 100 दिन का हिसाब मांग रही है।