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चंडीगढ़ के छात्रों ने धर्मशाला में निर्वासित तिब्बतियों के जीवन पर किया शोध प्रोजेक्ट…

चंडीगढ़, 30 जुलाई: चंडीगढ़ के कुछ छात्रों ने एक हफ्ता धर्मशाला में बिताया, जहां उन्होंने निर्वासित तिब्बतियों के जीवन पर रिसर्च किया। इन छात्रों ने तिब्बतियों की संस्कृति और परंपराओं को बचाए रखने के उनके प्रयासों पर लेख लिखे और एक डॉक्यूमेंट्री भी बनाई।छात्रों को एडु सेन्से और प्रोजेक्ट-आधारित शिक्षा में विशेषज्ञ कीगेन एकेडमी का सहयोग मिला। इस प्रोजेक्ट को ‘द एंचांटिंग रिल्म – ए धर्मशाला डॉक्यूमेंट्री’ नाम की डॉक्यूमेंट्री और बुकलेट के रूप में पेश किया गया।

यह उल्लेख करना जरूरी है कि ‘कैपस्टोन प्रोजेक्ट’ एक बहुआयामी प्रोजेक्ट होता है, जो किसी शैक्षणिक कार्यक्रम के अंत में छात्रों द्वारा किया जाता है। यह उनके ज्ञान और समझ का सार प्रस्तुत करता है।

एडु सेन्से की फाउंडर पुनीता वढेरा ने कहा कि इन छात्रों ने मिलकर न सिर्फ ज्ञान हासिल किया है, बल्कि ऐसे कौशल भी सीखे हैं जो उनके भविष्य के प्रयासों में मदद करेंगे।

‘कैपस्टोन प्रोजेक्ट की हेड और मेंटर आशीता सिंह वढेरा ने बताया, “हमने एक बुकलेट और डॉक्यूमेंट्री रिलीज की है, जिसमें छात्रों की रिसर्च को लेखों, तस्वीरों और वॉइस ओवर के माध्यम से दिखाया गया है। यह प्रोजेक्ट रचनात्मकता और साहसिकता का बेहतरीन मिश्रण है।”

उन्होंने बताया कि कैपस्टोन प्रोजेक्ट में भाग लेने वाले छात्रों ने धर्मशाला की यात्रा की। इस यात्रा का उद्देश्य था धर्मशाला को करीब से जानना और समझना — क्योंकि यह एक ऐसा स्थान है जो जीवंत संस्कृति की मिसाल है, खासकर इसलिए क्योंकि यह निर्वासित तिब्बती सरकार का मुख्य केंद्र भी है।

आशीता ने कहा, “इस यात्रा में हमने तिब्बती संस्कृति की गहराई को जाना और वहां के लोगों से बहुत कुछ सीखा। उन्होंने कैसे अपनी सांस्कृतिक पहचान को बचा रखा है, यह समझना हमारे लिए एक गहरा अनुभव रहा।”

विद्यार्थी ब्रहमलीन , जिनका लेख तिब्बती लोगों के संघर्ष और उनके द्वारा अपनी संस्कृति को बचाने के प्रयासों पर आधारित है, ने कहा कि मेरे लेख में तिब्बत के बलिदानों और दलाई लामा के नेतृत्व में चल रहे संघर्ष का जिक्र है। भारत सरकार का सहयोग भी इसमें अहम रहा है।

एक अन्य छात्रा, कुदरतजोत ने अपने लेख में तिब्बती महिलाओं की प्रगति और संघर्ष को उजागर किया है।

छात्र अर्शान ने तिब्बत की पारंपरिक थंका पेंटिंग पर लेख लिखा। उन्होंने बताया, “मेरे लेख में बताया गया है कि कैसे तिब्बती कला उनकी संस्कृति को जीवित रखने का एक तरीका है। थंका पेंटिंग तिब्बती लोगों की श्रद्धा और निष्ठा को दर्शाती है।”

डॉक्यूमेंट्री के बारे में आशीता ने बताया, “डॉक्यूमेंट्री की लंबाई 10 मिनट है। इसमें हमारे धर्मशाला के अनुभवों को दिखाया गया है। इसे मैंने एडिट किया है और स्क्रिप्ट और वीडियो पर पूरी टीम ने मिलकर काम किया है। इसमें छात्रों की आवाजें भी हैं जो इस यात्रा को दर्शकों को समझाती हैं।”

उन्होंने बताया कि बुकलेट में छात्रों की गतिविधियां, उनकी फोटोग्राफी, डॉक्यूमेंट्री की स्क्रिप्ट और जापानी शैली की छोटी कविताएं (हाइकु) भी शामिल हैं।