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बटरफ्लाई पार्क, चंडीगढ़ में तितली जागरूकता कार्यशाला ने इंटर्न विद्यार्थियों को किया प्रेरित

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द एनवायरमेंट सोसायटी ऑफ इंडिया (ESI), चंडीगढ़ द्वारा वन एवं वन्यजीव विभाग, यू.टी. चंडीगढ़ के सहयोग से बटरफ्लाई पार्क, सेक्टर-26, चंडीगढ़ में तितलियों पर एक शैक्षणिक एवं जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय, गवर्नमेंट पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, चंडीगढ़, डीएवी कॉलेज सेक्टर-10 चंडीगढ़, डीएवी कॉलेज करनाल तथा अन्य संस्थानों से आए इंटर्न विद्यार्थियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ द एनवायरमेंट सोसायटी ऑफ इंडिया के सचिव एवं भारतीय एकता मंच (पर्यावरण प्रकोष्ठ), चंडीगढ़ के सचिव श्री एन.के. झिंगन के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने मुख्य वक्ता, गणमान्य अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए पर्यावरण शिक्षा में फील्ड विजिट्स के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने डॉ. कुलभूषण कंवर, प्रख्यात पर्यावरणविद्, फोटोग्राफर एवं तितली विशेषज्ञ के योगदान की सराहना की, जिन्होंने वर्षों से तितलियों के संरक्षण एवं प्रलेखन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने श्री यशिंदर बाघा, प्रख्यात फोटोग्राफर एवं आर्किटेक्ट, तथा कार्यक्रम की निगरानी कर रही सुश्री ऋतिका, फॉरेस्ट गार्ड, चंडीगढ़ सहित अन्य अतिथियों का भी स्वागत किया।

मुख्य वक्ता डॉ. कुलभूषण कंवर ने तितलियों एवं उनके पारिस्थितिक महत्व पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ में तितलियों की लगभग 143 प्रजातियां दर्ज की जा चुकी हैं तथा बटरफ्लाई पार्क इनके संरक्षण का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने तितलियों के जीवन चक्र, उनके होस्ट पौधों तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में उनकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।

डॉ. कंवर ने तितलियों, मधुमक्खियों तथा अन्य परागण करने वाले जीवों की घटती संख्या पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि पर्यावरणीय क्षरण, प्राकृतिक आवासों के नष्ट होने तथा रसायनों के अत्यधिक उपयोग के कारण परागण गतिविधियों में पिछले वर्षों में उल्लेखनीय गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि तितलियां एवं अन्य परागणकर्ता जैव विविधता, कृषि एवं खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक हैं और इनके बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना संभव नहीं है।

इस अवसर पर सुश्री अंजली कपूर, सदस्य, ईएसआई ने जलाशयों एवं जल स्रोतों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैव विविधता एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए तालाबों, झीलों एवं आर्द्रभूमियों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।

श्री सेठी, ट्रस्टी, पर्यावरण न्यास, चंडीगढ़ ने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण हेतु सतत जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।

इंटर्न विद्यार्थियों ने कार्यशाला में गहरी रुचि दिखाई तथा तितली संरक्षण, जैव विविधता, होस्ट पौधों, शहरी पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण संरक्षण से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे। प्रतिभागियों ने इस व्यावहारिक एवं ज्ञानवर्धक कार्यक्रम की सराहना की।

कार्यक्रम का समापन श्री अशोक बंसल द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य वक्ता, वन एवं वन्यजीव विभाग के अधिकारियों, गणमान्य अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी को धन्यवाद दिया।

एन.के. झिंगन

सचिव

द एनवायरमेंट सोसायटी ऑफ इंडिया, चंडीगढ़

मोबाइल: 9417004937