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तीन दिवसीय 45वें वार्षिक चंडीगढ़ संगीत सम्मेलन आयोजित…

चंडीगढ़ 5 नवम्बर 2023ः इंडियन नेशनल थियेटर द्वारा दुर्गा दास फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय 45वें वार्षिक चंडीगढ़ संगीत सम्मेलन के अंतिम दिन सुरमनी सितार संगीतकार अनुपमा भागवत की सितार वादन प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सितार की कर्णप्रिय लहरियों को सुनकर श्रोताओं ने उनकी खूब प्रशंसा की।

सुरमनी श्रीमती अनुपमा भागवत, सितार संगीतकार नॉनपैरिल, ने बहुमुखी और उदार शैली के साथ भारतीय शास्त्रीय संगीत में अपनी पहचान बनाई है। वर्तमान पीढ़ी की एक ताजा बहुमुखी सितार वादक हैं, जो इमदादखानी घराने के दिग्गज, स्वर्गीय पंडित श्री बिमलेंदु मुखर्जी (स्वर्गीय उस्ताद इनायत खान के शिष्य और पंडित श्री बुधादित्य मुखर्जी के पिता) की एक प्रमुख शिष्या हैं। उन्होंने उस शक्ति को आत्मसात कर लिया है जो उनके घराने की पहचान है – उनकी शैली की विशेषता शानदार तेज तान, ध्यानपूर्ण आलाप की निपुणता और माधुर्य (राग-भाव) का शानदार प्रवाह है, साथ ही परंपरा के प्रति सच्चा रहना भी है। वे सितार की भावनात्मक ताल के साथ मानवीय आवाज पर आधारित सूक्ष्म रूप से सूक्ष्म शैली को सामने लाती हैं।

सितार वादक अनुपमा भागवत ने अपने प्रदर्शन की शुरुआत भावपूर्ण राग मियां की तोड़ी से की। जो कि सुबह का राग भक्ति रस में भक्तिपूर्ण मनोदशा और करुणा (विरह) भाव को व्यक्त करता है। इस राग में अनुपमा ने अलाप (राग का एक धीमा वर्णन) के साथ शुरुआत की, जिसमें गायकी अंग के विभिन्न रंग सामने आए, जो इमदादखानी घराने की पहचान है। इसके पश्चात उन्होंने जोड़, अलाप और जोड झाला बखूबी प्रस्तुत किया।

उन्होंने अपने सितार वादन से पारंपरिक लयकारी के साथ तीनताल में पारंपरिक विलम्बित गत को खूबसूरती से श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत कर खूब प्रशंसा बटोरी । जिसके पश्चात उन्होंने तीनताल में निबद्ध एक सुंदर द्रुत रचना श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत की।

अनुपमा ने देर सुबह का खूबसूरत राग अलैह्य बिलावल भी प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने राग की लयात्मक बारीकियों और मधुर धुन का प्रदर्शन कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके पश्चात उन्होंने उस्ताद विलायत खान साहिब द्वारा रचित मध्यलय रचना प्रस्तुत की। अनुपमा भागवत ने अपने गायन का समापन लोक धुन पर आधारित एक बहुत ही सुंदर धुन के साथ कर श्रोताओं का मन मोह लिया।

सितार वादक अनुपमा भागवत के साथ तबले पर विनोद लेले ने बखूबी संगत की।

इस अवसर पर इंडियन नेशनल थियेटर के प्रेसिडेंट अनिल नेहरू व सैकेटरी विनीता गुप्ता ने बताया कि इस वर्ष का यह संगीत सम्मेलन इंडियन थियेटर के संरक्षक स्वर्गीय एन खोसला की याद में आयोजित किया गया था। शहर में आयोजित हुए इस तीन दिवसीय सम्मेलन में शहरवासियों ने शास्त्रीय संगीत के प्रति जो प्यार दिखाया वह सरहानीय है। उन्होंने कहा कि वे हर वर्ष स्वर्गीय एन खोसला के मार्ग दर्शन पर सम्मेलन करवाते रहे है और संगीत सम्मेलन की यह कड़ी भविष्य में भी इस प्रकार से अपनी परम्परा निभाने में कायम रहेगी। उन्होंने सभी कलाकारों द्वारा सम्मेलन को चार चांद लगाने पर अपना आभार जताया।