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केंद्र के देश में सोलर सेल्स और पैनल निर्माण को तुरंत अनिवार्य करने के फैसले से पूरा सोलर सेक्टर संकट में आ गया है : सेवा….

चण्डीगढ़ : सोलर एनर्जी वेंडर्स एसोसिएशन (सेवा), पंजाब ने केंद्र सरकार और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) से एप्रूव्ड लिस्ट ऑफ़ मॉडल्स एंड मैन्युफैक्चरर्स (एएलएमएम)-2 के तहत डीसीआर (डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट) सोलर पैनलों की अनिवार्यता को तत्काल प्रभाव से लागू करने के फैसले पर पुनर्विचार करने तथा इसके क्रियान्वयन को आगे बढ़ाने की मांग की है।

एसोसिएशन पंजाब ने केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई एएलएमएम इंप्लीमेंटेशन और डीसीआर (डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट) पैनल पॉलिसी की अनिवार्यता को लेकर चंडीगढ़ प्रेस क्लब में प्रैस कांफ्रेंस की। एसोसिएशन के पदाधिकारियों खुशविंदर सिंह बराड़ व गुरिंदर सिंह बराड़ ने कहा कि केंद्र सरकार का देश में सोलर सेल्स और पैनल निर्माण को बढ़ावा देने का फैसला सही हो सकता है, लेकिन जमीनी हकीकत को समझे बिना इसे तुरंत अनिवार्य करने से पूरा सोलर सेक्टर संकट में आ गया है। प्रेस वार्ता के दौरान सेवा के अध्यक्ष सुखपाल सिंह व अन्य पदाधिकारी अमित खुराना, संग्राम सिंह, बलविंदर सिंह विर्क, गुरिंदर लोहारा व सक्षम वर्मा आदि ने कहा डीएसआर नियम और एएलएमएम-2 लिस्ट-ई के अनिवार्य होने से देश सहित पंजाब के सोलर उद्योग और उपभोक्ताओं पर गहरा असर पड़ रहा है।

इन सख्त नियमों के कारण सोलर प्रोजेक्ट्स की लागत, बाजार में उपकरणों की उपलब्धता और आम लोगों की जेब पर बड़ा असर पड़ेगा। पहले एक साधारण 3 केडब्ल्यू का नॉन-डीसीआर सिस्टम करीब 1.5 लाख रु. में लग जाता था। लेकिन अब पूरी तरह से अल्मम डीएसआर और लिस्ट-ई अनुपालन वाला 3 केडब्ल्यू का सिस्टम करीब 1.8 लाख से 2.1 लाख रु. के बीच बैठ रहा है।

एसोसिएशन का कहना है कि घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और भारत को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य का वह समर्थन करती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में इस नीति के लागू होने से सौर उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहा है।

प्रेस वार्ता के दौरान एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि डीसीआर और एनडीसीआर पैनलों के बीच मूल्य अंतर वर्तमान में 10,000 से 14,000 रुपये प्रति किलोवाट तक पहुंच चुका है, जबकि वर्ष 2020 में यह अंतर मात्र 2,000 रुपये प्रति किलोवाट था। इससे सौर परियोजनाओं की लागत में अचानक भारी वृद्धि हुई है और उपभोक्ताओं के लिए सोलर सिस्टम लगवाना महंगा हो गया है।

एक आम घर के लिए 3 केडब्ल्यू का सिस्टम अब करीब 30,000 रु. तक महंगा हो गया है, जिससे आम जनता पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है।

उन्होंने कहा हालांकि सरकार भारी सब्सिडी दे रही है, लेकिन उपभोक्ता को यह सब्सिडी तभी मिलेगी जब वह पूरी तरह एएलएमएम-2 लिस्ट-ई प्रमाणित महंगे भारतीय पैनल लगवाएगा। वहीं फैक्ट्रियों, मॉल, अस्पतालों लगने वाले कैप्टिव और बड़े उद्योगों की छतों पर नेट-मीटरिंग प्रोजेक्ट्स पर इसका सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ेगा।

एसोसिएशन के अनुसार हजारों सौर परियोजनाएं एनडीसीआर पैनलों की कीमतों के आधार पर स्वीकृत और योजनाबद्ध की गई थीं। अब बढ़ी हुई लागत के कारण सौर विक्रेताओं को इन परियोजनाओं को पूरा करने में वित्तीय और परिचालन संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं कई उपभोक्ता नई परियोजनाओं को स्थगित या रद्द कर रहे हैं।

पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि बाजार में डीसीआर पैनलों की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है, जिसके कारण परियोजनाओं में देरी हो रही है। उनका आरोप है कि वर्तमान स्थिति का लाभ केवल कुछ बड़े घरेलू निर्माताओं को मिल सकता है, जबकि प्रतिस्पर्धा की कमी से कीमतों में और वृद्धि होने की आशंका है।

एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि परियोजनाओं की लागत लगातार बढ़ती रही और पैनलों की आपूर्ति में कमी बनी रही तो इससे आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों में सौर ऊर्जा को अपनाने की रफ्तार धीमी पड़ सकती है, जिससे भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों पर भी असर पड़ सकता है।

एसोसिएशन ने केंद्र सरकार और एमएनआरई से देशभर में डीसीआर पैनलों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने, कीमतों को नियंत्रित करने, पारदर्शी मूल्य निर्धारण प्रणाली लागू करने तथा सभी श्रेणियों की सौर परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता और सब्सिडी उपलब्ध कराने की मांग की। इसके अलावा नीति लागू होने से पहले स्वीकृत परियोजनाओं के लिए पर्याप्त संक्रमण अवधि देने का भी आग्रह किया गया।

प्रेस वार्ता के दौरान पंजाब से जुड़ी समस्याओं को भी उठाया गया। एसोसिएशन ने कहा कि पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) द्वारा हाल ही में लागू किए गए नए सॉफ्टवेयर के कारण राज्य में सौर परियोजनाओं की स्वीकृतियों, व्यवहार्यता रिपोर्ट, कार्य पूर्णता प्रमाणन, मीटर स्थापना, लोड वृद्धि और उपभोक्ताओं के नाम परिवर्तन जैसी प्रक्रियाओं में देरी हो रही है। इसके अलावा बिजली वितरण कंपनियों में ऊर्जा मीटरों की कमी भी परियोजनाओं को प्रभावित कर रही है।

एसोसिएशन ने केंद्र और संबंधित विभागों से उद्योग प्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित कर समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की अपील की है ताकि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा, घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन और भारत के नवीकरणीय ऊर्जा मिशन की गति बरकरार रखी जा सके।

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