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दिल्ली से चंडीगढ़ तक — एंटरटेनमेंट, एंटरटेनमेंट और एंटरटेनमेंट- डॉ. इंजीनियर राजेंद्र जैना….

चंडीगढ़ : निर्माता, निर्देशक, लेखक, अभिनेता और गायक डॉ. इंजीनियर राजेंद्र जैना के एंटरटेनमेंट शो का दायरा अब दिल्ली से बाहर चंडीगढ़ तक पहुँच गया है। चंडीगढ़ स्थित करतार आसरा आश्रम में “एक शाम वृद्धों के नाम” कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें आश्रम के बुजुर्गों के मनोरंजन के लिए उनके समय के मशहूर गीतों से भरी एक विशेष संगीतमय शाम प्रस्तुत की गई।

इस अवसर पर डॉ. ई. राजेंद्र जैना ने कहा कि गाना गाना उनकी हॉबी है, लेकिन इसके माध्यम से वह उन लोगों के बारे में सोचते हैं जो जीवन की इस भीड़ में अकेले रह गए हैं। उन्होंने कहा कि कई लोग वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों को कपड़े और भोजन उपलब्ध कराते हैं, लेकिन उनकी जरूरतें इससे कहीं ज्यादा हैं। सबसे जरूरी है उनके साथ समय बिताना, उनकी कहानियाँ सुनना, उनके अनुभवों को समझना और उनका मनोरंजन करना। इसी सोच के साथ इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्रीमती  मोनिका ने कहा कि यहाँ आकर उन्हें बहुत अच्छा लगा और वे यहाँ से बहुत कुछ सीखकर जा रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. इंजीनियर राजेंद्र जैना ने कई पुराने लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए, जिन्हें लोगों ने खूब सराहा। कई वृद्धजन आगे आए और अपने जीवन के अनुभव साझा कर मन हल्का किया। कुछ बुजुर्गों ने गीत गाए और कई महिलाओं ने नृत्य भी किया। कार्यक्रम का सबसे रोमांचक पल तब आया जब राजेंद्र जैना ने “ओ जानेमन दिलारा-एक नज़र इधर भी, किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार, शोखियों में घोला जाए फूलों का सबाब, प्यार बांटते चलो, दिल करता ओह यार दिलदारा मेरा दिल करता” गीत प्रस्तुत किया और आश्रम के सभी वृद्धजन नाचने-गाने लगे।

इस अवसर पर डॉ. इंजीनियर राजेंद्र जैना की आने वाली फिल्म “बेदखल” का मुहूर्त भी किया गया। इस फिल्म का क्लैप करतार आसरा ट्रस्ट की फाउंडर एवं चेयरपर्सन माताजी चरण कमल कौर ने दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें बहुत खुशी है कि डॉ. राजेंद्र जैना ने वृद्धों को भी नाचने-गाने पर मजबूर कर दिया और उनके चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी। उन्होंने वाहेगुरु से प्रार्थना की कि यह फिल्म सफलतापूर्वक पूरी हो और इसकी शूटिंग आश्रम व गुरुद्वारे में भी की जाए। कार्यक्रम में फिल्म क्रिटिक्स, क्रिएटिव फिल्म डायरेक्टर और जाने-माने पत्रकार सुनील पाराशर ने कहा कि आओ हम सब मिलकर एक नई जीने की राह सीखें। उन्होंने कहा कि पहले लोग बच्चों को गोद लेते थे, तो क्यों न जिन लोगों के माता-पिता नहीं हैं वे ऐसे वृद्धों को गोद लेकर अपना परिवार पूरा करें।  यह कार्यक्रम वास्तव में “एक शाम वृद्धों के नाम” को सार्थक करता नजर आया, जहाँ संगीत, भावनाएँ और मानवीय संवेदनाएँ एक साथ देखने को मिलीं। इतना शानदार मनोरंजन देखकर आश्रम के जनरल मैनेजर बलजीत सिंह ने कहा कि वे चाहते हैं कि डॉ. राजेंद्र जैना हर महीने आकर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करें, जिससे वृद्धों के जीवन में नई रोशनी आए और उन्हें जीने की नई उमंग मिले। इस अवसर पर लाइफ केरी ऑन संस्था से शफ़ीक़ उर रहमान , गोपाल और मुमताज़ भी शामिल हुए. शफ़ीक़ उर रहमान ने कहा की इस तरह के कार्यक्रेम सभी के लिए प्रेरणा    का काम करते है