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डॉ. कुमार अम्बरीश चंचल के समधुर गायन एवं कुशल दास के सितार ने जमाया भास्कर राव सम्मेलन का आठवां दिन..

प्राचीन कला केन्द्र द्वारा आयोजित किए जा रहे 53वें भास्कर राव सम्मेलन के आठवें दिन आज बनारस के के.ऐ.चंचल के सधे हुए गायन एवं कोलकाता की मिठास लिए कुशल दास के सितार ने खूब रंग जमाया । टैगोर थियेटर में चल रहे इस सम्मेलन में चण्डीढ़ के कला जगत से जुड़े गणमान्य अतिथि नित उपस्थित होकर शोभा बढ़ा रहे हैं ।

आज के कलाकार कुमार अम्बरीश चंचल ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा गुरू आर.वी.कविमंडल से प्राप्त की । इसके उपरांत किराना घराने के गुरू पंडित माधव गुणी के शिष्यत्व में संगीत की बारीकियां सीखी । पंडित चंचल बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत है। इन्हें गुरू गंगुबाई हंगल के सानिध्य में भी सीखने का मौका मिला । विभिन्न कार्यक्रमों में अपनी कला का प्रदर्शन करके प्रशंसा हासिल करने वाले चंचल का आज संगीत जगत में अहम स्थान है ।

आज के दूसरे कलाकार पंडित कुशल दास संगीत जगत की जानी मानी हस्तियों में से एक है। संगीतज्ञों के परिवार में जन्में कुशल दास ने अपने दादा एवं पिता से संगीत की शिक्षा प्राप्त की । साथ ही इन्होंने पंडित संजय बैनर्जी से सितार की बारीकियां भी सीखी । इसके अलावा इनकी पं.मानस चक्रवर्ती,पं.रामकृष्ण बासु,पं.अजय सिन्हा राय का सानिध्य भी मिला । टॉप ग्रेड रेडियो एवं दूरदर्शन कलाकार कुशल को इनके संगीत जगत में उल्लेखनीय योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है ।

आज के कार्यक्रम की शुरुआत डॉ.के.ऐ.चंचल के सधे हुए गायन से हुई जिसमें उन्होंने राग पूरीया कल्याण में विलंबित एक ताल की बंदिश ‘‘जाप कहो उनसे इतनो संदेशवा मोरा’’पेश की और दर्शकों को सहज ही अपने संगीत के जादू से मोहित कर दिया । इसके उपरांत द्रुत ख्याल की बंदिश ‘‘बहुत दिन बीते तेरे अजहूं न आए मोरे श्याम ’’ पेश करके दर्शकों को मधुर संगीत का रसास्वादन करवाया । इन्होंने कार्यक्रम का समापन एक भजन‘‘तुम बिन मेरो कौन खबर ले गोवर्धन गिरधारी’’ जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इनके साथ तबले पर चण्डीगढ़ के जानेमाने तबला वादक डॉ.महेन्द्र प्रसाद तथा हारमोनियम पर प्रो.गुरमीत सिंह ने साथ दिया । इनके साथ चण्डीगढ़ के ही सारंगीवादक राजेश कुमार ने संगत की ।

इस सधे हुए गायन के बाद दर्शकों के दिलों के तार छेड़ने मंच पर कुशल दास ने स्थान लिया । इन्होंने राग शुद्ध बसंत से कार्यक्रम की शुरूआत की और जोड़ झाले से राग की खूबसूरती को मधुर स्वर लहरियों से सजा कर प्रस्तुत किया । इसके उपरांत इन्होंने होली के त्योहार के अनुरूप कुछ रंग भरी गतें पेश की ।कार्यक्रम का अंत एक मिश्र पहाड़ी धुन से करके पंडित कुशल दास ने खूबसूरत समापन किया । दर्शकों के जाने माने तबला वादक पंडित परीमल चक्रवर्ती के खूबसूरत साथ ने दर्शकों को खूब आनंदित किया ।

कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को उतरीया और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया ।

केन्द्र के सचिव श्री सजल कौसर ने बताया कि कल शामली जोशी के गायन और पंडित रोनू मजूमदार एवं उनके समूह द्वारा वाद्ययंत्र से भास्कर राव का नौंवा दिन सजेगा ।