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उत्तम सत्य धर्म की आराधना के साथ श्रद्धालुओं ने मनाया दशलक्षण पर्व का पांचवां दिन…..

श्री दिगंबर जैन मंदिर, सेक्टर-27 बी, चंडीगढ़ में चल रहे पावन दशलक्षण पर्व के पांचवें दिन आज उत्तम सत्य धर्म की श्रद्धा एवं भक्तिभाव से आराधना की गई। प्रातःकाल भगवान के अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन के साथ श्रद्धालुओं ने सत्य को जीवन का आधार बनाने, असत्य एवं कपट से दूर रहने तथा मन, वचन और कर्म में एकरूपता बनाए रखने का संकल्प लिया।

आज के धार्मिक आयोजन में प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य श्री संदीप जैन एवं श्रीमती पूनम जैन, मोहाली को प्राप्त हुआ। प्रथम शांतिधारा श्री अतुल जैन एवं श्रीमती निशा जैन, डेराबस्सी द्वारा की गई, जबकि द्वितीय शांतिधारा का सौभाग्य श्रीमती मंजू देवी, श्री ऋषभ जैन एवं श्री यश जैन, किशनगढ़ (राजस्थान) को प्राप्त हुआ।

दशलक्षण विधान के दौरान सौधर्मेंद्र बनने का सौभाग्य श्री इंद्रेश जैन एवं श्रीमती रानी जैन तथा श्री संजय जैन एवं श्रीमती अमिता जैन, सेक्टर-42 को प्राप्त हुआ। कुबेर इंद्र बनने का सौभाग्य श्री अमित जैन एवं श्रीमती नेहा जैन, महेंद्रगढ़ (हरियाणा) तथा ईशान इंद्र बनने का सौभाग्य श्री नितिन जैन एवं श्रीमती नेहा जैन, मंडी गोबिंदगढ़ को प्राप्त हुआ।

इस अवसर पर श्री धर्म बहादुर जैन ने उत्तम सत्य धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि सत्य केवल सही शब्द बोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन, वचन और कर्म की पवित्रता एवं एकरूपता का नाम है। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन में सत्य का अर्थ ऐसा वचन बोलना है जो वास्तविकता पर आधारित हो, हितकारी हो और किसी को पीड़ा पहुंचाने वाला न हो। सत्य का पालन व्यक्ति के भीतर विश्वास, निर्भयता और आत्मिक शांति का विकास करता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे दैनिक जीवन में किसी भी परिस्थिति में असत्य, छल और कपट का सहारा न लें तथा सत्य एवं सरलता को अपने आचरण का हिस्सा बनाएं।

इस अवसर पर महासचिव श्री संत कुमार जैन ने भी श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए दशलक्षण पर्व के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दशलक्षण पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मसंयम और अपने आचरण में सकारात्मक परिवर्तन लाने का अवसर है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि मंदिर में की जाने वाली पूजा एवं आराधना के साथ-साथ इन धर्मों के सिद्धांतों को अपने दैनिक जीवन में भी उतारें।

उत्तम सत्य धर्म हमें यह प्रेरणा देता है कि सत्य केवल बोलने का विषय नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति है। सत्यनिष्ठ जीवन में विश्वास, पारदर्शिता, सरलता और आत्मिक शांति का विकास होता है। जैन दर्शन के अनुसार सत्य का पालन अहिंसा एवं संयम की भावना के साथ किया जाना चाहिए, ताकि हमारे वचन से किसी भी जीव को अनावश्यक कष्ट न पहुंचे।

आज के भोजन की व्यवस्था श्री महावीर जैन, अर्थ प्रकाश, चंडीगढ़ द्वारा की गई। मंदिर में दशलक्षण पर्व के अवसर पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले रहे हैं। मंदिर परिसर का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है और श्रद्धालु आत्मचिंतन, संयम एवं धर्माराधना के माध्यम से आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

कार्यक्रम में मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री धर्म बहादुर जैन, उपाध्यक्ष एडवोकेट आदर्श जैन, महासचिव श्री संत कुमार जैन तथा कोषाध्यक्ष श्री राजा बहादुर सिंह जैन सहित समिति के अन्य सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।