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उत्तम मार्दव धर्म पर श्रद्धालुओं ने की आत्मचिंतन एवं विनय की आराधना….

श्री दिगंबर जैन मंदिर, सेक्टर-27 बी, चंडीगढ़ में चल रहे पावन दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन आज श्रद्धालुओं ने उत्तम मार्दव धर्म की आराधना श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ की। प्रातःकाल मंदिर परिसर में भगवान का अभिषेक, शांतिधारा एवं दशलक्षण धर्म की विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई।

उत्तम मार्दव धर्म का अर्थ है मान, अहंकार और अभिमान का त्याग कर विनम्रता एवं सरलता को जीवन में धारण करना। जैन दर्शन के अनुसार धन, पद, रूप, ज्ञान, प्रतिष्ठा अथवा किसी अन्य उपलब्धि का अहंकार आत्मकल्याण के मार्ग में बाधक बनता है। मार्दव धर्म मनुष्य को यह संदेश देता है कि सभी जीवों के प्रति समान भाव रखते हुए विनम्रता, नम्रता और आत्मचिंतन के साथ जीवन व्यतीत करना चाहिए। वास्तविक महानता बाहरी वैभव में नहीं, बल्कि अहंकार से मुक्त होकर आत्मस्वरूप की पहचान करने में है।

आज मूलनायक भगवान के प्रथम अभिषेक का सौभाग्य श्री इंदरमल जैन एवं श्रीमती चंदा जैन को प्राप्त हुआ। प्रथम शांतिधारा श्री अनिल जैन एवं श्रीमती मधु जैन द्वारा की गई। द्वितीय शांतिधारा का सौभाग्य श्री ऋषभ जैन एवं श्री यश जैन, मोहाली तथा श्री दिनेश जैन एवं श्रीमती स्वाति जैन, बूंदी (राजस्थान) को प्राप्त हुआ।

आज के धार्मिक आयोजन में विभिन्न पात्रों की भूमिका भी श्रद्धा एवं उत्साह के साथ निभाई गई। यज्ञनायक की भूमिका श्री अशोक जैन ने निभाई, जबकि सौधर्मेंद्र की भूमिका श्री संत कुमार जैन एवं श्रीमती नीलम जैन ने निभाई। कुबेर इंद्र की भूमिका श्री सुभाष जैन द्वारा निभाई गई।

मंदिर समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने भी आयोजन में सक्रिय सहभागिता की। इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री धर्म बहादुर जैन, उपाध्यक्ष एडवोकेट आदर्श जैन, महासचिव श्री संत कुमार जैन तथा कोषाध्यक्ष श्री राजा बहादुर सिंह जैन सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

श्रद्धालुओं ने उत्तम मार्दव धर्म के संदेश को आत्मसात करते हुए अहंकार का त्याग, विनम्रता का विकास तथा सभी जीवों के प्रति समान एवं सम्मानपूर्ण दृष्टिकोण रखने का संकल्प लिया। मंदिर परिसर में दिनभर भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने दशलक्षण पर्व के माध्यम से आत्मशुद्धि एवं आत्मकल्याण की भावना से धार्मिक आराधना की।