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दशलक्षण पर्व का भव्य शुभारंभ, शांतिधारा एवं घट यात्रा के साथ श्रद्धालुओं ने की आराधना….

श्री दिगंबर जैन मंदिर, सेक्टर-27 बी, चंडीगढ़ में पावन दशलक्षण पर्व का शुभारंभ धार्मिक श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ हुआ। दशलक्षण पर्व जैन धर्म में आत्मशुद्धि, संयम और आत्मकल्याण की साधना का विशेष पर्व माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन्य एवं उत्तम ब्रह्मचर्य जैसे दस धर्मों की आराधना करते हैं। आज की पूजा उत्तम क्षमा को समर्पित थी जिसमे की क्षमा के महत्व को समझाया गया। यह विधान श्री अजय जैन भैया जी (तमूरा वाले ) के निर्देशन में किया जा रहा है।

पर्व के प्रथम दिन प्रातः 6:30 बजे शांतिधारा के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।आज का मूलनायक भगवान महावीर स्वामी के प्रथम अभिषेक का सौभाग्य श्री शैलेंदर जैन सीनियर एडवोकेट को प्राप्त हुआ, शांतिधारा का सौभाग्य डॉ. संयोग जैन, मोहाली को प्राप्त हुआ। इसके पश्चात श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धा एवं उल्लास के साथ घट यात्रा आयोजित की गई।

धार्मिक विधान में सौधर्मेंद्र बनने का सौभाग्य श्री नितिन जैन एवं श्रीमती प्रीति जैन, मोहाली को, कुबेर इंद्र बनने का सौभाग्य श्री राजकुमार जैन, जीरकपुर को तथा महायज्ञनायक बनने का सौभाग्य श्री संत कुमार जैन एवं श्री अशोक जैन, चंडीगढ़ को प्राप्त हुआ।

पूजन सामग्री की व्यवस्था श्री सतीश जैन एवं श्रीमती राज रानी जैन, सेक्टर-32, चंडीगढ़ द्वारा की गई। पूजा-अर्चना एवं धार्मिक विधान के उपरांत सभी श्रद्धालुओं को सात्विक भोजन कराया गया। आज के भोजन की व्यवस्था श्री धर्म बहादुर जैन एवं श्रीमती मेम लता जैन, चंडीगढ़ द्वारा की गई।

इस अवसर पर मंदिर समिति के सभी पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना में भाग लेकर भगवान जिनेंद्र की आराधना की तथा दशलक्षण धर्म को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

*संध्या समय हुआ भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम*

संध्या 7:00 बजे मंदिर परिसर में महाआरती के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। महाआरती के पश्चात विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई। इसके साथ ही विद्वानों द्वारा धार्मिक प्रवचन किए गए, जिनमें दशलक्षण पर्व के आध्यात्मिक महत्व तथा दस धर्मों के माध्यम से आत्मशुद्धि एवं आत्मकल्याण के मार्ग पर प्रकाश डाला गया।

कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। दशलक्षण पर्व के आगामी दिनों में भी मंदिर में प्रतिदिन प्रातः धार्मिक विधान, पूजा-अर्चना, प्रवचन तथा संध्या समय महाआरती एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।