अष्टान्हिका महापर्व के छठे दिन साधु परमेष्ठी एवं सम्यक चारित्र की हुई आराधना…..
श्री दिगम्बर जैन मंदिर, सेक्टर-27 बी, चंडीगढ़ में अष्टान्हिका महापर्व के पावन अवसर पर आयोजित श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान एवं शांति महायज्ञ के छठे दिन श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण के मध्य विविध धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। प्रातःकाल अभिषेक, शांतिधारा, नित्य पूजन एवं श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान की विधिवत पूजा संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
आज भगवान् को 256 अर्घ्य समर्पित किये गए। अष्टान्हिका महापर्व के छठे दिन (षष्ठी तिथि) का जैन धर्म में विशेष आध्यात्मिक, दार्शनिक और ब्रह्मांडीय महत्व है। आठ दिवसीय इस शाश्वत उत्सव में छठा दिन आत्मा के ‘सम्यक चारित्र’ (Right Conduct) और साधु परमेष्ठी की आराधना को समर्पित होता है।
जैन दर्शन के नवपद (Navapada) सिद्धांत के अनुसार, अरिहंत, सिद्ध, आचार्य एवं उपाध्याय परमेष्ठी की आराधना के उपरांत छठे दिन साधु परमेष्ठी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। साधु परमेष्ठी त्याग, तप, संयम और आत्मानुशासन के साक्षात् प्रतीक हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि आत्मा की वास्तविक उन्नति केवल संयमित एवं मर्यादित आचरण से ही संभव है।
छठा दिन ‘सम्यक चारित्र’ को जाग्रत करने का दिन माना जाता है। सम्यक दर्शन और सम्यक ज्ञान तभी पूर्ण फल प्रदान करते हैं जब उनके अनुरूप जीवन में सम्यक आचरण भी स्थापित हो। इस दिन साधक अपने जीवन में अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य एवं अपरिग्रह जैसे जैन सिद्धांतों को आत्मसात करने का संकल्प लेते हैं।
इस दिन की पूजा एवं ध्यान का प्रमुख उद्देश्य चारित्र मोहनीय कर्म का क्षय करना है। ऐसे कर्म आत्मा को शुद्ध आचरण अपनाने तथा संसार के बंधनों से मुक्त होने में बाधक बनते हैं। सिद्धचक्र विधान की आराधना के माध्यम से श्रद्धालु इन कर्मों के क्षय की भावना रखते हुए आत्मशुद्धि एवं मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होने का संकल्प लेते हैं।
आज की शांतिधारा का परम सौभाग्य श्री नवरत्न जैन, श्री राजेंद्र प्रसाद जैन -जनित जैन , प्रमोद जैन मोहाली, नितिन जैन मंडी गोबिंदगढ़ ,अनिल कुमार जैन खरड़ को प्राप्त हुआ। उन्होंने अत्यंत श्रद्धा एवं भक्ति के साथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न कर समस्त विश्व के कल्याण, शांति एवं मंगल की कामना की।
आज के भोजन का पुण्यार्जन श्री सौरभ जैन एवं श्रीमती अनुपमा जैन परिवार, ज़ीरकपुर द्वारा किया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने परिवार की इस धर्मभक्ति एवं सेवा भावना की भूरि-भूरि सराहना की।
मंदिर समिति ने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे अष्टान्हिका महापर्व के शेष दिनों में भी अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान, शांति महायज्ञ एवं धर्मसभा का लाभ प्राप्त करें तथा अपने जीवन में सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र के आदर्शों को अपनाकर आत्मकल्याण के पथ पर अग्रसर हों।


