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सिद्धचक्र महामण्डल विधान एवं शांति महायज्ञ का शुभारंभ अष्टान्हिका महापर्व के पावन अवसर पर….

श्री दिगम्बर जैन मंदिर, चंडीगढ़ में अष्टान्हिका महापर्व के पावन अवसर पर आयोजित सिद्धचक्र महामण्डल विधान एवं शांति महायज्ञ का शुभारंभ आज अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं वैदिक गरिमा के साथ हुआ। यह संपूर्ण विधान ब्रह्मचारिणी आशा दीदी के सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में संपन्न हो रहा है, जबकि संगीतमय विधान के लिए उत्तर प्रदेश से विशेष संगीत मंडली आमंत्रित की गई है।

प्रातः 6:30 बजे मुख्य मंदिर में भगवान जिनेन्द्र देव के श्री अभिषेक के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके उपरांत विधिवत ध्वजारोहण संपन्न हुआ। ध्वजारोहण के पश्चात मंदिर परिसर में भव्य घट यात्रा निकाली गई, जिसमें महिलाओं ने अपने सिर पर पवित्र जल से भरे कलश धारण कर मंदिर की तीन परिक्रमा की। इस भक्ति एवं आस्था से परिपूर्ण दृश्य ने समस्त वातावरण को धर्ममय बना दिया।

घट यात्रा के पश्चात ब्रह्मचारिणी आशा दीदी के निर्देशन में मुख्य मंदिर एवं ध्यान मंदिर में विराजमान समस्त देव-देवियों का आवाहन कर उन्हें सिद्धचक्र विधान में पधारने का विनम्र निमंत्रण दिया गया। तत्पश्चात भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा को भव्य शोभायात्रा के साथ विधान मंडप में विराजमान कराया गया। इस शोभायात्रा में यज्ञ नायक श्री अशोक जैन ने भगवान की प्रतिमा को श्रद्धापूर्वक अपने मस्तक पर धारण कर मंदिर से विधान स्थल तक पहुँचाया, जहाँ पुनः भगवान का अभिषेक एवं प्रतिष्ठापूर्वक पूजन सम्पन्न हुआ।

आज के विधान में मंगलाचरण, भगवान महावीर पूजन, नवग्रह पूजन तथा सिद्धचक्र पूजन के आठ अर्घ्य अर्पित किए गए। विधान की विशेषता यह है कि प्रतिदिन अर्घ्यों की संख्या क्रमशः दोगुनी होती जाती है, जिससे विधान की आध्यात्मिक भव्यता निरंतर बढ़ती जाती है।

श्री दिगम्बर जैन सोसायटी के महासचिव श्री संत कुमार जैन ने बताया कि जैन आगमों के अनुसार अष्टान्हिका काल अत्यंत पवित्र एवं पुण्यदायी माना गया है तथा इसी काल में सिद्धचक्र महामण्डल विधान का विशेष महत्व है। इस विधान में आगमों के अनुसार नन्दीश्वर द्वीप पर देवों द्वारा सिद्ध भगवान की होने वाली पूजा का सजीव रूपांकन किया जाता है। विधान के दौरान संपूर्ण वातावरण को उसी दिव्य स्वरूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाता है तथा श्रद्धालु विभिन्न इन्द्रों का स्वरूप धारण कर देवों की भांति पूजा-अर्चना करते हैं।

इस वर्ष के विधान में सौधर्मेन्द्र का दायित्व श्री प्रमोद जैन /श्री धर्मबहादुर जैन एवं श्रीमती मेम लता जैन , कुबेर इन्द्र का दायित्व श्री नितिन जैन एवं श्रीमती प्रीति जैन, यज्ञ नायक का दायित्व श्री अशोक जैन एवं श्रीमती पिंकी जैन तथा श्रीपाल–मैना सुन्दरी की भूमिका श्री राजीव जैन एवं श्रीमती प्रियंका जैन द्वारा निभाई जा रही है।

आज के धार्मिक अनुष्ठान(पहला दिन ) प्रातः लगभग 11:30 बजे पूर्ण हुए, जिसके उपरांत सभी श्रद्धालुओं एवं विधान में सहभागी भक्तों ने मंदिर की भोजनशाला में सात्त्विक भोजन ग्रहण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

सिद्धचक्र महामण्डल विधान एवं शांति महायज्ञ आगामी दिनों तक प्रतिदिन विविध धार्मिक अनुष्ठानों एवं पूजन-विधानों के साथ श्रद्धा एवं भक्ति के वातावरण में संपन्न होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता कर धर्मलाभ अर्जित कर रहे हैं।