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निर्जला एकादशी पर रवि योग और शिव योग का दुर्लभ संयोग, बढ़ा व्रत का महत्व….

निर्जला एकादशी व्रत हिन्दू धर्म के सबसे पवित्र और कठिन उपवासों में से एक है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ने वाले इस व्रत में भक्त पूरे 24 घंटे बिना अन्न और जल (निर्जल) के भगवान विष्णु की उपासना करते हैं। सेक्टर 28 स्थित श्री खेड़ा शिव मंदिर के मुख्य अर्चक आचार्य ईश्वर चन्द्र शास्त्री ने बताया कि यह व्रत भगवान विष्णु के आशीर्वाद और सभी 24 एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त करने के लिए किया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भीमसेन को बहुत भूख लगती थी और वे भूखे नहीं रह पाते थे। तब महर्षि वेदव्यास ने उन्हें केवल इस एक व्रत (निर्जला एकादशी) को करने का सुझाव दिया था, जिसका पुण्य पूरे साल की एकादशियों के बराबर होता है। भीमसेन के द्वारा निर्जला व्रत रखे जाने के कारण इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी भी कहते हैं। इस दिन जल से भरा कलश, मौसमी फल और वस्त्रों का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन विष्णु भगवान की पूजा एवं द्वादशाक्षरी मंत्र “ओम् नमो भगवते वासुदेवाय” का ज्यादा से ज्यादा जाप करना चाहिए। यह व्रत केवल अन्न त्यागने तक सीमित नहीं है बल्कि मन, वचन और कर्म की पवित्रता का प्रतीक है। इस दिन इंद्रियों पर नियंत्रण रखकर भगवान विष्णु के नाम का स्मरण और जप किया जाता है। वैज्ञानिक और आयुर्वेद दृष्टिकोण से भी एकादशी व्रत का बहुत लाभ देने वाला है। महीने में दो बार व्रत करने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है, शरीर से विषैले तत्व (toxins) बाहर निकलते हैं और ऊर्जा का स्तर बेहतर होता है।

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 जून 2026 को सायं 6 बजकर 13 मिनट पर आरंभ होगी और 25 जून 2026 को रात 8 बजकर 10 मिनट पर समाप्त होगी। सूर्योदय व्यापिनी तिथि के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026, बृहस्पतिवार को ही रखा जाएगा।

रवि योग एवं शिव योग का संयोग..

अबकी बार निर्जला एकादशी पर रवि-योग एवं शिव-योग के साथ स्वाती नक्षत्र का संयोग बन रहा है, जिससे व्रत की महिमा और भी बढ़ जाती है। इस दिन गंगादि पवित्र नदियों व तीर्थ में स्नान करना बहुत श्रेष्ठ बताया गया है

दिनभर इन बातों का ध्यान रखें

1.संध्या पूजन के समय जल आचमन के अलावा अगले दिन सूर्योदय तक पानी नहीं पीएं।

2. दिनभर कम बोलें और हो सके तो मौन रहने की कोशिश करें।

3. दिन में न सोएं।

4. ब्रह्मचर्य का पालन करें।

5. झूठ न बोलें और किसी की निंदा न करें।

6. 6. क्रोध और विवाद न करें।

पद्म पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार एकादशी का व्रत करने वाले व्यक्ति के अपने पितृ (पूर्वज) भी तृप्त होकर बैकुंठ लोक को प्राप्त करते हैं और आने वाली कई पीढ़ियों का कल्याण होता है।