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लेखिका निकाशा लूथरा ने लिखा नया उपन्यास – ‘लॉस्ट एंड फाउंड इन कश्मीर’….

चंडीगढ़, 8 जून 2026: 19 वर्षीय लेखिका , अभिनेत्री, और फिल्म डायरेक्टर – निकाशा लूथरा ने, चंडीगढ़ प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अपने नवीनतम उपन्यास ‘लॉस्ट एंड फाउंड इन कश्मीर’ के विमोचन की घोषणा की। इससे पहले निकाशा ‘डार्क ट्यूलिप्स’ नामक कविता संग्रह तथा ‘फ्लावर्स इन हर रूम’ नामक पांच लघु नाटकों के संग्रह की रचना कर चुकी हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने ‘अनकहे ख़्वाब’ तथा ‘सहर की तलाश में’ फिल्मों का लेखन और निर्देशन भी किया है।

निकाशा ने बताया कि 270 पृष्ठों के इस उपन्यास को लिखने में उन्हें लगभग दो वर्ष लगे। यह पुस्तक अनंता प्रेस प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई है। उन्होंने कहा कि इस उपन्यास की प्रेरणा उन्हें पहलगाम आतंकी हमले की घटना के उन पर हुए भावनात्मक प्रभाव से मिली।

निकाशा ने कहा कि हालांकि यह एक काल्पनिक कहानी है, लेकिन इसमें हिंसा, दुख और संघर्ष से जुड़े मानवीय अनुभवों को दर्शाया गया है। यह बताती है कि असाधारण परिस्थितियां किस प्रकार सामान्य लोगों के जीवन को बदल देती हैं।

पत्रकार वार्ता के दौरान निकाशा ने पुस्तक के कुछ अध्यायों पर आधारित एक लघु चलचित्र की झलक भी दिखाई। उन्होंने बताया कि पहलगाम की घटना ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया था। इस घटना ने उन्हें केवल हमले के बारे में ही नहीं, बल्कि उन लोगों के बारे में भी सोचने पर मजबूर किया जिनकी ज़िंदगी अचानक बदल गई, जिनकी अनेक बातें अधूरी रह गईं और जिनके मन का दर्द अक्सर अनकहा रह गया।

उपन्यास की कहानी कश्मीर की खूबसूरत वादियों की पृष्ठभूमि में बुनी गई है। इसमें मुख्य पात्र हीर और कबीर हिंसा, दिल टूटने और अपनों को खोने के बाद पैदा होने वाली भावनात्मक परिस्थितियों का सामना करते हैं। कहानी उनके अनुभवों, यादों और संवादों के माध्यम से यह दर्शाती है कि त्रासदी किस प्रकार लोगों की दुनिया बदल देती है।

निकाशा ने बताया कि कश्मीर में सुंदरता और पीड़ा एक साथ मौजूद हैं। वहां की वादियों में जहां अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य है, वहीं इतिहास, संघर्ष और अनकहे दुख भी समाए हुए हैं। यही कारण है कि कश्मीर इस उपन्यास में एक महत्वपूर्ण पात्र की तरह उभरता है।

उन्होंने कहा कि हिंसा और दुख जैसे विषयों पर लिखते समय संवेदनशीलता और जिम्मेदारी बनाए रखना बहुत आवश्यक था। उनकी कोशिश रही कि कहानी में हिंसा को सनसनीखेज बनाने के बजाय पात्रों की भावनाओं और मानवीय पक्ष को प्रमुखता दी जाए।

निकाशा ने कहा कि मेरे लिए सबसे बड़ी सफलता यह होगी कि पाठक पुस्तक पढ़ने के बाद भी इसकी कहानी और भावनाओं को अपने साथ लेकर चलें। यदि यह उपन्यास किसी एक व्यक्ति में भी दूसरों के प्रति अधिक संवेदनशीलता पैदा कर सके, तो मैं इसे सार्थक मानूंगी। मैं यह भी आशा करती हूं कि भविष्य में कश्मीर को हिंसा के लिए नहीं, बल्कि वहां के लोगों, संस्कृति, सुंदरता और मानवीय मूल्यों के लिए याद किया जाए।”

इस उपन्यास का औपचारिक विमोचन मुख्य अतिथि डॉ. सुमिता मिश्रा, आईएएस, वित्त आयुक्त (राजस्व), हरियाणा द्वारा किया जाएगा। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल के.जे.एस. ढिल्लों (सेवानिवृत्त), जिन्हें टाइनी ढिल्लों के नाम से भी जाना जाता है, तथा डॉ. मनमोहन सिंह, आईपीएस (सेवानिवृत्त), चेयरमैन, चंडीगढ़ साहित्य अकादमी उपस्थित रहेंगे। यह कार्यक्रम 9 जून को शाम 6:30 बजे मिनी टैगोर थिएटर, सेक्टर-18, चंडीगढ़ में द नरेटर्स परफॉर्मिंग आर्ट्स सोसायटी (इंडिया) के बैनर तले आयोजित किया जाएगा। संस्था की विशेष पहचान साहित्य को मंच और पर्दे पर जीवंत रूप में प्रस्तुत करना है। इस अनूठे पुस्तक विमोचन समारोह में उपन्यास के चयनित अध्यायों पर आधारित लघु चलचित्र का प्रदर्शन तथा एक संक्षिप्त नाट्य प्रस्तुति भी की जाएगी।