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पंचकूला में ‘सिद्ध जोगी’ भजन उत्सव की धूम: हिमाचली धाम और भजनों की रसधार में डूबे श्रद्धालु…..

पंचकूला के सेक्टर-10 स्थित कम्युनिटी सेंटर में श्रद्धा, भक्ति और हिमाचली संस्कृति का एक अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। सिद्ध जोगी सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट (रजि.) ट्राईसिटी इनके प्रमुख चेयरमैन बावा विक्रांत शर्मा व प्रधान निर्मल लुवाणा तथा ऊमेश शर्मा ने बताया वार्षिक सिद्ध जोगी सर्व साझां भजन उत्सव’ और बाबे दा प्रशादा ‘हिमाचली धाम’ में हजारों की संख्या में पहुंचे भक्तों ने बाबा बालकनाथ जी का आशीर्वाद लिया और हिमाचल की पारंपरिक विरासत का आनंद लिया। उत्सव का शुभारंभ सुहाने मौसम के बीच श्री गणपति जी की स्तुति और बाबा बालकनाथ जी के पवित्र धूना प्रज्वलन के साथ हुआ। ट्रस्ट के चेयरमैन विक्रांत वावा ने बताया कि यह आयोजन हर वर्ष 6 मई को पूरी परंपरा और मर्यादा के साथ मनाया जाता है। बाबा जी के दिव्य दरबार को फूलों और लाइटों से भव्य रूप से सजाया गया था, जहाँ श्रद्धालुओं ने सामूहिक चालीसा और आरती कर देश की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की प्रार्थना की।

इस अवसर पर ट्राईसिटी और आसपास के क्षेत्रों से आए प्रमुख संत-महात्माओं ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से श्रद्धालुओं को आशीर्वाद भी दिया। उन्होंने भक्तों को अपना आशीर्वाद देते हुए समाज में एकता, शांति और सेवा का संदेश दिया।

हिमाचल के विख्यात टीवी गायक अमित मितू और उनकी टीम ने अपनी सुरीली आवाज़ से कार्यक्रम में समां बांध दिया। बाबा बालकनाथ जी के भजनों की ऐसी रसधार बही कि पांडाल में मौजूद श्रद्धालु खुद को रोक नहीं पाए और भक्ति में सराबोर होकर नाचने लगे।

समाजसेवी पंडित राम कृष्ण शर्मा इस मौके पर कहा, “अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना ही समाज और राष्ट्र के उत्थान का एकमात्र मार्ग है।”

उत्सव का सबसे विशिष्ट आकर्षण पारंपरिक ‘हिमाचली धाम’ बाबे दा प्रशादा रहा। वरिष्ठ उपाध्यक्ष राविंद्र नक्कई , उपाध्यक्ष भगत रमेश चाचा, जानकारी दी कि 2013 से वार्षिक समारोह में विशेष रूप से हिमाचल से बुलाए गए रसोइयों (बौटियों) द्वारा पीतल के बर्तनों (चरोटियों) में शुद्धता और पौष्टिकता के साथ तैयार किया गया था। ओर धाम को स्वादिष्ट कर दिया।

देशराज शर्मा तथा बृजमोहन शर्मा ने बताया कि हिमाचली धाम बाबे दा प्रशादा में विशेष रूप से अंगुर मदरा, सफेद चने मदरा और राजमाह मदरा, पहाड़ी मटर-पनीर मदरा और चना दाल, माह की दाल और काले चने का खट्टा, बदणा व ब्रेड मीठा, पकौड़ा कढी, चावल और रूमाली रोटी हजारों भक्तों ने पंगत में बैठकर टोरी की पतलों (पत्तों से बनी प्लेट्स) पर भोजन किया। इन पारंपरिक पतलों में भोजन करना न केवल सांस्कृतिक अनुभव था, बल्कि इसके स्वास्थ्यवर्धक गुणों की भी सराहना की गई।

ट्राईसिटी में यह उत्सव अपनी शुद्ध हिमाचली संस्कृति और पारंपरिक स्वाद के लिए पहचाना जाता है। टोरी की पत्तल में परोसा जाने वाला भोजन न केवल पर्यावरण के लिए अनुकूल है, बल्कि यह श्रद्धालुओं को उनकी प्राचीन जीवनशैली से भी जोड़ता है।

ट्रस्ट के प्रमुख चेयरमैन विक्रांत वावा जी ने कहा कि प्राचीन शिव बाबा मंदिर रैला सेक्टर 12 में ज्येष्ठ रविवार को सफल कार्यक्रम की खुशी में बाबे दा प्रशादा में इस बार मेवे वाली खीर का वितरण किया जाएगा।

सिद्ध जोगी सेवा चैरीटेबल ट्रस्ट रजि ट्राईसिटी कार्यक्रम कमेटी पंचकूला – प्रमुख चेयरमैन वरिष्ठ पत्रकार विक्रांत वावा जी, प्रधान निर्मल लुवाणा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष रविन्द्र नक‌ई , उपाध्यक्ष भगत रमेश चाचा, वित्त सचिव ऊमेश शर्मा, सचिव संदीप सिंह तथा प्रवीण रैला, प्रेस सचिव पत्रकार हरीश शर्मा सलाहकार अश्वनी बरवाला, सुखविंदर बिट्टू, दिनेश शर्मा, हेमंत, विनोद जिंदल जी

सिद्ध जोगी बाबे दा प्रशादा सेवा दल युवा टीम में श्री राज कुमार श्री नरेंद्र,श्री विकी,श्री ईशान,श्री शेरू, श्री सौरभ,श्री प्रिंस,श्री सतनाम, श्री जसविंदर, श्री अजय कुमार, श्री अमन,श्री जिती कुड़ी,श्री जस्सी,श्री रवि, श्री रमन,श्री योगेश,श्री भूपेन्द्र डीसी, श्री लक्की ओमी,

ने कहा कि इस आयोजन का मूल उद्देश्य सामाजिक समरसता और राष्ट्र की समृद्धि है।