लागत में भारी उछाल से संकट में कॉरुगेटेड बॉक्स उद्योग, कीमतों में संशोधन और नीति समर्थन की मांग….
चंडीगढ़ 30 अप्रैल 2026: भारत के कॉरुगेटेड बॉक्स निर्माताओं ने बढ़ती लागत को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है और इसे अभूतपूर्व संकट करार दिया है। द हिमाचल प्रदेश कॉरुगेटेड बॉक्स मैनुफैक्चर्स एसोसिएशन (एचपीसीबीएमए) ने उद्योग की वर्तमान स्थिति को देखते हुए ग्राहकों, भागीदारों और नीति-निर्माताओं से तुरंत हस्तक्षेप और सुधारात्मक कदम उठाने की अपील की है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में फेडरेशन ऑफ कॉरुगेटेड बॉक्स मैन्युफैक्चरर्स ऑफ इंडिया (एफसीबीएम) के प्रेसीडेंट श्री राजिंदर भाटी; एचपीसीबीएमए के प्रेसीडेंट श्री आदित्य सूद एचपीसीबीएमए के पूर्व प्रेसीडेंट गगन कपूर, यूपी सीबीएमए के प्रेसीडेंट श्री एस. के. चौहान, एनसीएम के प्रेसीडेंट श्री हरीश जयरथ, एचसीबीएमए के प्रेसीडेंट श्री सनी जैन तथा पीसीबीएमए के प्रेसीडेंट श्री कुलदीप मक्कड़ उपस्थित रहे।
चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस वार्ता में एफसीबीएम के प्रेसीडेंट श्री राजिंदर भट्टी ने बताया कि कॉरुगेटेड बॉक्स निर्माण में उपयोग होने वाले प्रमुख कच्चे माल क्राफ्ट पेपर की कीमतों में पिछले कुछ महीनों में 15–20 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। चूंकि क्राफ्ट पेपर कुल लागत का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा होता है, इस बढ़ोतरी का सीधा और व्यापक असर पूरे उद्योग पर पड़ रहा है। इस वृद्धि के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां, सप्लाई चेन में बाधाएं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता प्रमुख कारण बताए गए हैं।
इसके अलावा, गोंद, स्याही, चिपकने वाले पदार्थ, स्टेपल वायर और स्ट्रैपिंग वायर जैसे अन्य आवश्यक इनपुट्स की कीमतों में 30–40 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इन सभी लागतों में वृद्धि ने प्रोडक्शन कॉस्ट को अत्यधिक बढ़ा दिया है और उद्योग पर वित्तीय दबाव और गहरा कर दिया है।
उन्होंने कहा कि “हिमाचल प्रदेश के निर्माता विशेष रूप से लागत दबाव और लॉजिस्टिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। सरकार को तुरंत राहत उपायों पर विचार करना चाहिए।”
एचपीसीबीएमए के प्रेसीडेंट श्री आदित्य सूद ने कहा कि ने कहा कि कच्चे माल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने उद्योग की लागत संरचना को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। यदि समय रहते मूल्य संशोधन और नीतिगत समर्थन नहीं मिला, तो कई इकाइयों के लिए टिके रहना मुश्किल हो जाएगा।” केवल कच्चे माल ही नहीं, बल्कि फैक्ट्री संचालन से जुड़ी लागतें भी लगातार बढ़ रही हैं। बिजली दरों में वृद्धि और वैधानिक मजदूरी में बढ़ोतरी के कारण उत्पादन लागत और बढ़ गई है, जिससे कई इकाइयों के लिए संचालन बनाए रखना मुश्किल हो गया है।
इसके साथ ही, जीएसटी व्यवस्था में मौजूद उल्टा शुल्क ढांचा (इनवर्टेड ड्यूटी कॉस्टI भी उद्योग के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। इनपुट टैक्स अधिक होने और आउटपुट टैक्स कम होने के कारण रिफंड में देरी हो रही है। जटिल और समय लेने वाली प्रक्रियाओं के चलते उद्योग की कार्यशील पूंजी फंस रही है, जिससे नकदी प्रवाह और तरलता पर गंभीर असर पड़ रहा है।
एचपीसीबीएमए के पूर्व प्रेसीडेंट गगन कपूर ने बताया कि 19 किलो के एलपीजी सिलेंडर की कीमत फरवरी से अप्रैल के बीच 1,600 रुपये से बढ़कर 2,200 रुपये हो गई है और वर्तमान में आवश्यक आपूर्ति का केवल 25–30% ही उपलब्ध है। एलपीजी की कमी के कारण मजदूर भी वापस लौट रहे हैं, जिससे फैक्ट्रियों में कार्यबल 25–30% तक कम हो गया है।
यूपीएसबीएमबीए के प्रेसीडेंट एस के चौहान. तथा एनआईसीएमए के प्रेसीडेंट हरीश जयरथ ने बताया कि इनपुट सेवाओं पर जीएसटी रिफंड में देरी और बढ़ती लागत ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। रिफंड प्रक्रिया में लंबा समय लगने के कारण कार्यशील पूंजी चक्र प्रभावित हो रहा है और उद्योग वित्तीय दबाव में आ गया है। जीएसटी में उल्टा शुल्क ढांचा उद्योग के लिए गंभीर समस्या बन चुका है। रिफंड में देरी से कार्यशील पूंजी पर भारी दबाव पड़ रहा है। “इनपुट लागत में 30–40 प्रतिशत तक की वृद्धि ने छोटे और मध्यम उद्योगों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। इनके लिए विशेष सहायता आवश्यक है।
एच सी बी एम ए के प्रेसीडेंट सनी जैन तथा पीसीबीएमए के प्रेसीडेंट कुलदीप मक्कड़ ने कहा, बिजली दरों और मजदूरी में वृद्धि ने उत्पादन लागत को और बढ़ा दिया है। उद्योग को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए नीति समर्थन जरूरी है। यह समय उद्योग और सरकार के बीच सहयोग का है। यदि उचित कदम उठाए जाएं, तो इस संकट से बाहर निकला जा सकता है। यह समय उद्योग और सरकार के बीच सहयोग का है। यदि उचित कदम उठाए जाएं, तो इस संकट से बाहर निकला जा सकता है।
एसोसिएशन ने सरकार और संबंधित पक्षों से तत्काल कदम उठाने, मूल्य संशोधन को स्वीकार करने और उद्योग को राहत देने के लिए नीतिगत समर्थन प्रदान करने की मांग की है, ताकि इस महत्वपूर्ण पैकेजिंग क्षेत्र को स्थिरता मिल सके।


