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होलिका दहन कब और कितने बजे, होली का त्योहार मतलब बुराई पर अच्छाई की जीत…..

(आचार्य शिल्पा सेठी) होली बुराई पर अच्छाई की जीत, धार्मिक कथाओं (जैसे प्रहलाद और होलिका), और वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है, जो लोगों को प्रेम, सौहार्द और खुशी के साथ एकजुट करती है यह पवित्र अग्नि (होलिका दहन) में नकारात्मकता को जलाने और रंगों के साथ जीवन का जश्न मनाने का पर्व है, जो सामाजिक भेदभाव मिटाकर नई शुरुआत का संदेश देता है।

होली की असली कहानी कुछ इस प्रकार है :

हिरण्यकशिपु ने अपने पुत्र प्रह्लाद, जो भगवान विष्णु का परम भक्त था, की हत्या करने के लिए अपनी बहन होलिका की सहायता ली । प्रह्लाद को जलाने के प्रयास में, होलिका ने आग से बचाव के लिए एक आवरण ओढ़कर उसके साथ चिता पर बैठ गई। लेकिन आवरण ने प्रह्लाद की रक्षा की और होलिका जल गई।

आइये जानते है पहली होली कब मनाई गई थी?

भगवान कृष्ण की कथा भी होली से जुड़ी हुई है, क्योंकि उन्होंने अपनी प्रिय राधा और अन्य गोपियों को रंग लगाकर रंगों से खेलने की परंपरा शुरू की थी और इतना ही नहीं कुछ पुराणों, दण्डिन द्वारा रचित दशकुमार चरित और चौथी शताब्दी में चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल के दौरान कवि कालिदास द्वारा होली का उल्लेख मिलता है। सातवीं शताब्दी के संस्कृत नाटक रत्नावली में भी होली के उत्सव का उल्लेख है।

होली मनाने के मुख्य कारण:

धार्मिक कथाएँ:

प्रहलाद और होलिका: हिरण्यकश्यप की बहन होलिका, जिसे आग में न जलने का वरदान था, प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन विष्णु भक्त प्रहलाद बच गए और होलिका जल गई; यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है.

राधा-कृष्ण: यह भगवान कृष्ण द्वारा राधा और गोपियों के साथ रंगों से खेलने की लीला का भी उत्सव है, जो प्रेम और आनंद का प्रतीक है.

कामदेव: एक कथा के अनुसार, शिव की तपस्या भंग करने पर कामदेव भस्म हो गए थे, लेकिन बाद में पुनर्जीवित हुए; इस घटना से भी होली जुड़ी है, जो सच्चे प्रेम और खुशी का संदेश देती है.

सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्व:

वसंत का आगमन: यह सर्दियों के अंत और वसंत ऋतु की शुरुआत का उत्सव है, जो प्रकृति में नए जीवन और रंगों के खिलने का प्रतीक है.

सामाजिक सौहार्द: यह त्योहार सभी भेदभाव मिटाकर लोगों को प्रेम, क्षमा और मेल-मिलाप के साथ एकजुट करता है.

आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक अर्थ:

नकारात्मकता का अंत: होलिका दहन नकारात्मक विचारों और बुराइयों को जलाने का प्रतीक है.

नवीनीकरण: रंगों के साथ खेलना जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करता है.संक्षेप में, होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की विजय, प्रेम, एकता और नए जीवन के आगमन का एक गहरा और आनंदमय उत्सव है।

इस बार होलिका दहन 3 मार्च होली बुराई पर अच्छाई की जीत, धार्मिक कथाओं (जैसे प्रहलाद और होलिका), और वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है, जो लोगों को प्रेम, सौहार्द और खुशी के साथ एकजुट करती है यह पवित्र अग्नि (होलिका दहन) में नकारात्मकता को जलाने और रंगों के साथ जीवन का जश्न मनाने का पर्व है, जो सामाजिक भेदभाव मिटाकर नई शुरुआत का संदेश देता है।

होली की असली कहानी कुछ इस प्रकार है :

हिरण्यकशिपु ने अपने पुत्र प्रह्लाद, जो भगवान विष्णु का परम भक्त था, की हत्या करने के लिए अपनी बहन होलिका की सहायता ली । प्रह्लाद को जलाने के प्रयास में, होलिका ने आग से बचाव के लिए एक आवरण ओढ़कर उसके साथ चिता पर बैठ गई। लेकिन आवरण ने प्रह्लाद की रक्षा की और होलिका जल गई।

आइये जानते है पहली होली कब मनाई गई थी?

भगवान कृष्ण की कथा भी होली से जुड़ी हुई है, क्योंकि उन्होंने अपनी प्रिय राधा और अन्य गोपियों को रंग लगाकर रंगों से खेलने की परंपरा शुरू की थी और इतना ही नहीं कुछ पुराणों, दण्डिन द्वारा रचित दशकुमार चरित और चौथी शताब्दी में चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल के दौरान कवि कालिदास द्वारा होली का उल्लेख मिलता है। सातवीं शताब्दी के संस्कृत नाटक रत्नावली में भी होली के उत्सव का उल्लेख है।

होली मनाने के मुख्य कारण:

धार्मिक कथाएँ:

प्रहलाद और होलिका: हिरण्यकश्यप की बहन होलिका, जिसे आग में न जलने का वरदान था, प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन विष्णु भक्त प्रहलाद बच गए और होलिका जल गई; यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है.

राधा-कृष्ण: यह भगवान कृष्ण द्वारा राधा और गोपियों के साथ रंगों से खेलने की लीला का भी उत्सव है, जो प्रेम और आनंद का प्रतीक है.

कामदेव: एक कथा के अनुसार, शिव की तपस्या भंग करने पर कामदेव भस्म हो गए थे, लेकिन बाद में पुनर्जीवित हुए; इस घटना से भी होली जुड़ी है, जो सच्चे प्रेम और खुशी का संदेश देती है.

सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्व:

वसंत का आगमन: यह सर्दियों के अंत और वसंत ऋतु की शुरुआत का उत्सव है, जो प्रकृति में नए जीवन और रंगों के खिलने का प्रतीक है.

सामाजिक सौहार्द: यह त्योहार सभी भेदभाव मिटाकर लोगों को प्रेम, क्षमा और मेल-मिलाप के साथ एकजुट करता है.

आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक अर्थ:

नकारात्मकता का अंत: होलिका दहन नकारात्मक विचारों और बुराइयों को जलाने का प्रतीक है.

नवीनीकरण: रंगों के साथ खेलना जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करता है.संक्षेप में, होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की विजय, प्रेम, एकता और नए जीवन के आगमन का एक गहरा और आनंदमय उत्सव है।

इस बार होलिका दहन 3 मार्च (मंगलवार ) ब्रह्म मुहूर्त 05:05 am से 05:55 am अति शुभ है।