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श्री शिव महापुराण कथा में सती चरित्र का भावपूर्ण वर्णन….

चंडीगढ़ के सेक्टर 29 ए स्थित श्री बाबा बालक नाथ मंदिर में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में निरंतर जारी है। यह कथा 11 फ़रवरी 2026 तक प्रतिदिन शाम 4:00 बजे से 7:00 बजे तक आयोजित की जा रही है। कथा का रसपान श्रद्धालुओं को प्रसिद्ध कथा वाचक श्री गोपाल शुक्ल जी महाराज करवा रहे हैं।

कथा के आयोजन में मुख्य यजमान श्रीमती जोत्सना शर्मा जी, मंदिर के प्रधान श्री विनोद कुमार चड्ढा तथा सभा की समस्त कार्यकारिणी का विशेष सहयोग रहा। इस अवसर पर पूर्व पार्षद जितेंद्र भाटिया विशेष तौर पर उपस्थित रहे।

कथा के दौरान सती चरित्र का अत्यंत मार्मिक और भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा वाचक ने बताया कि सती, प्रजापति दक्ष की पुत्री एवं भगवान शिव की प्रथम पत्नी थीं। बचपन से ही उनका मन भगवान शिव में रमा हुआ था और कठोर तपस्या के पश्चात उन्होंने शिव को पति रूप में प्राप्त किया। किंतु उनके पिता दक्ष को भगवान शिव का औघड़ और वैराग्यपूर्ण स्वरूप स्वीकार नहीं था।

कथा में बताया गया कि दक्ष द्वारा आयोजित विशाल यज्ञ में भगवान शिव का जान-बूझकर अपमान किया गया। अपने पति के अपमान को सहन न कर पाने के कारण सती ने योगाग्नि से अपने शरीर का त्याग कर दिया। इस घटना से व्यथित होकर भगवान शिव ने तांडव आरंभ किया, जिससे सृष्टि के नाश का संकट उत्पन्न हो गया। बाद में भगवान विष्णु द्वारा सती के शरीर के अंगों के विभाजन से विभिन्न शक्ति पीठों की स्थापना हुई। सती ने आगे चलकर पार्वती के रूप में जन्म लेकर पुनः भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया।

कथा वाचक ने कहा कि सती चरित्र त्याग, आत्मसम्मान और पति-पत्नी के अटूट संबंध का प्रतीक है, जो आज के समाज को भी महत्वपूर्ण संदेश देता है।

श्रद्धालुओं के लिए यह कथा सीधे प्रसारण के माध्यम से भी उपलब्ध है। कथा का लाइव प्रसारण यूट्यूब चैनल “gopal ji bhakti marg” तथा फेसबुक पर किया जा रहा है, जिससे दूर-दराज़ के भक्त भी कथा का आनंद ले