लाइव कैलेंडर

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930  

LIVE FM सुनें

India News24x7 Live

Online Latest Breaking News

सरोगेसी अधिनियम – निःसंतान दम्पत्तियों के लिए वरदान या अभिशाप…

इंडियन फर्टिलिटी सोसाइटी (आई.एफ.एस) के ग्रेटर चंडीगढ़ चैप्टर ने जिंदल आईवीएफ के सहयोग से आज चंडीगढ़ में एक दिवसीय 18वें एआरटी अपडेट का आयोजन किया, जिसमें उत्तर भारत के वरिष्ठ डॉक्टरों, क्षेत्र के प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञों, वकीलों और बांझपन से निपटने वाले अन्य हितधारकों एवं प्रतिनिधियों ने असिस्टेड रिप्रोडक्शन टेक्नोलॉजी (ए.आर.टी) और सरोगेसी रेगुलेशन एक्ट 2021, ओवेरियन स्टिमुलेशन प्रोटोकॉल, जेनेटिक्स और भ्रूण चिकित्सा आदि विषयों पर चर्चा में भाग लिया ।

कार्यक्रम में 200 से अधिक डॉक्टरों ने भाग लिया और सरोगेसी, आईवीएफ में जेनेटिक्स के भविष्य और खुद को उन्नत करने के क्षेत्र में नवीनतम प्रगति पर दिन भर चर्चा की।

कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों की राय थी कि दिसंबर 2021 में ए.आर.टी और सरोगेसी रेगुलेशन एक्ट 2021 के पारित होने के बाद से, ए.आर.टी और सरोगेसी को सुव्यवस्थित और वैध बनाने के लिए, सरकार द्वारा इसे लागू करने के लिए बहुत कम काम किया गया है।

अधिनियम के क्रियान्वयन में हो रही देरी के कारण मुख्य चिंताओं को उठाते हुए वरिष्ठ फर्टिलिटी सलाहकार और जिंदल आईवीएफ की निदेशक डॉ. उमेश जिंदल ने कहा नए अधिनियम के अनुसार केवल परोपकारी सरोगेसी की अनुमति है, जिसका अर्थ है बच्चा पैदा करने के लिए किसी और के गर्भाशय का उपयोग करना और सरोगेट को कोई शुल्क नहीं देना होगा। यह अधिनियम कमीशनिंग दंपत्ति, सरोगेट और इलाज करने वाले डॉक्टर के हितों की रक्षा करता है। महिलाओं में बार-बार गर्भपात या घाव वाले गर्भाशय के कारण कई जोड़ों को सरोगेसी की वास्तविक आवश्यकता होती है। इच्छुक जोड़ों को अब इलाज शुरू करने से पहले विभिन्न स्थानों से कई अनुमतियां और मंजूरी लेनी पड़ती हैं, जैसे सरोगेसी का कारण बताते हुए मेडिकल बोर्ड की अनुमति, दोनों पक्षों की फिटनेस, उचित प्राधिकारी से अनिवार्यता प्रमाण पत्र, माता-पिता के लिए अदालत का आदेश और कई अन्य। पूरी प्रक्रिया में 3-6 महीने लग सकते हैं और इस समय यह बिल्कुल भी सुव्यवस्थित नहीं है। उन्होंने कहा कि हम नहीं जानते कि मरीजों का मार्गदर्शन कैसे किया जाए और उन्हें कहां भेजा जाए।

जिंदल आईवीएफ के वरिष्ठ सलाहकार और इंडियन फर्टिलिटी सोसाइटी (आई.एफ.एस) के ग्रेटर चंडीगढ़ चैप्टर की महासचिव डॉ. अनुपम गुप्ता ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इन सभी कारणों से पहले से ही पीड़ित दंपत्तियों की निराशा और बढ़ रही है क्योंकि इससे इलाज में काफी देरी होगी और आईवीएफ में सफलता के लिए उम्र एक बड़ी बाधा है। ऐसे कुछ राज्य हैं जहां कदम स्पष्ट हैं और अब मामले निपटाए जा रहे हैं। लेकिन चंडीगढ़ और अन्य राज्यों में देरी के क्या कारण हैं, यह हमें स्पष्ट नहीं है, उन्होंने अपने संबोधन में सरकार से शीघ्र कदम उठाने और मदद करने का अनुरोध किया।

इंडियन फर्टिलिटी सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ के.डी नायर ने अपने संबोधन में कहा कि “जेनेटिक्स भविष्य बनने जा रहा है”। उन्होंने विस्तार से बताया कि कई ऐसे जोड़े हैं जिन्हें एक आनुवंशिक बीमारी है और जो परिवार में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती आ रही है और उनके परिवारों में मौत का कारण भी बनती है। दुर्भाग्य से इसका कोई इलाज नहीं है। हालाँकि, पीजीटी (प्री इम्प्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग) के साथ आईवीएफ (टेस्ट ट्यूब बेबी) एक ऐसी तकनीक है जहां इन प्रभावित जीनों का भ्रूण में परीक्षण किया जा सकता है और केवल अप्रभावित भ्रूण को गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है, जिससे भविष्य की पीढ़ियों से आनुवंशिक विकार स्थायी रूप से समाप्त हो जाता है। यह तकनीक क्रांतिकारी है और उन जोड़ों के लिए एकमात्र आशा है जिन्हें प्रभावित भ्रूण के लिए बार-बार गर्भपात कराना पड़ता है और पीड़ा झेलनी पड़ती है। पीजीटी के साथ आईवीएफ का उपयोग करके कई जोड़ों का इलाज किया गया है और अब उनके स्वस्थ बच्चे हैं।

यह देखना वास्तव में संतोषजनक है कि हम इन जोड़ों के लिए खुशियाँ पैदा कर रहे हैं – डॉ. शीतल जिंदल ने कहा, जो इस तकनीक पर अपनी आनुवंशिक टीम के साथ लगन से काम कर रही हैं। ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए जागरूकता ही कुंजी है। जो जोड़े जानते हैं कि ऐसी तकनीक उपलब्ध है, वे इलाज कराने के लिए दूर-दूर से आते हैं – डॉ. संगीता खट्टर ने कहा।

इस आयोजन में राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों द्वारा युवा चिकित्सकों के लिए विशेष कार्यशालाएं भी आयोजित की गई ।