सम्मेलन के अंतिम दिन हेमंत पेंडसे, ने अपने शास्त्रीय संगीत गायन से श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध….
चंडीगढ़ 10 अक्टूबर 2026: इंडियन नेशनल थियेटर द्वारा दुर्गा दास फाउंडेशन के सहयोग से सेक्टर 26 स्थित स्ट्रोबरी फील्डस हाई स्कूल के सभागार में तीन दिवसीय 48वां वार्षिक चंडीगढ़ संगीत सम्मेलन के अंतिम दिन शास्त्रीय संगीत गायक हेमंत पेंडसे, ने अपने गायन की कर्णप्रिय लहरियों से श्रोताओं का समां बांधा और खूब प्रशंसा बटोरी।
कार्यक्रम से पूर्व इंडियन नेशनल थिएटर के प्रेसिडेंट अनिल नेहरू व मानद सैक्रेटरी विनीता गुप्ता ने सभी संगीत श्रोताओं का स्वागत किया।
हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के प्रख्यात गायक हेमंत पेंडसे ने 10 अक्टूबर को आयोजित 48वें चंडीगढ़ संगीत सम्मेलन के प्रातःकालीन सत्र में अपनी भावपूर्ण और मधुर प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उन्होंने अपनी गायन प्रस्तुति का आरंभ राग मनोरंजनी से किया। इसमें उन्होंने पं. जितेंद्र अभिषेकी द्वारा रचित बंदिश पर आधारित विलंबित खयाल प्रस्तुत किया। इसके बाद उन्होंने झपताल में मध्य लय की बंदिश प्रस्तुत की और फिर स्वयं रचित तराना सुनाया।
प्रस्तुति को आगे बढ़ाते हुए पेंडसे ने रामाश्रय झा की रचना पर आधारित राग जौनपुरी में विलंबित खयाल प्रस्तुत किया। इसके पश्चात उन्होंने राग देव गांधार में द्रुत तीनताल में पारंपरिक छोटा खयाल गाया। उन्होंने राग जीलाफ में द्रुत लय की बंदिश प्रस्तुत कर अपनी गायकी को और समृद्ध किया।
इसके बाद गायन में भक्ति रस का समावेश हुआ। उन्होंने ‘एक सुर चराचर छाए’ प्रस्तुत किया, जिसके बाद स्वयं रचित भैरवी सरगम गीत सुनाया। समापन खंड में उन्होंने भैरवी में एक भजन प्रस्तुत किया और अंत में स्वयं रचित मीरा भजन ‘बादल देख डरी’ के भावपूर्ण गायन के साथ प्रस्तुति का समापन किया।
उनकी इस प्रस्तुति में शास्त्रीय रागों, लयकारी की जटिलताओं और भक्तिपूर्ण रचनाओं का सुंदर समन्वय देखने को मिला। उनकी सुमधुर गायकी ने श्रोताओं को हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा और भाव-सौंदर्य में पूरी तरह सराबोर कर दिया।
हेमंत पेंडसे, पंडित जितेंद्र अभिषेकी जी के वरिष्ठ शिष्य और हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन के क्षेत्र में प्रसिद्ध नाम हैं। उन्होंने प्रारंभिक संगीत शिक्षा भुसावल में स्वर्गीय श्री मनोहर बेतावडकर से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने पद्मश्री पंडित जितेंद्र अभिषेकी से लगभग 20 वर्षों तक संगीत सीखा, जिसमें 12 वर्ष पारंपरिक गुरुकुल पद्धति से प्रशिक्षण लिया। बाद में उन्होंने स्वर्गीय पंडित बाबनराव हलदंकर और पंडित विकास काशलकर से भी संगीत की शिक्षा प्राप्त की।
तबले पर विनोद लेले तथा हारमोनियम पर प्रोमिता मुखर्जी ने बखूबी संगत की।
इस अवसर पर इंडियन नेशनल थियेटर के प्रेसिडेंट अनिल नेहरू व सैकेटरी विनीता गुप्ता ने बताया कि शहर में आयोजित हुए इस तीन दिवसीय सम्मेलन में शहरवासियों ने शास्त्रीय संगीत के प्रति जो प्यार दिखाया वह सरहानीय है। उन्होंने कहा कि संगीत सम्मेलन की यह कड़ी भविष्य में भी इस प्रकार से अपनी परम्परा निभाने में कायम रहेगी। उन्होंने सभी कलाकारों द्वारा सम्मेलन को चार चांद लगाने पर अपना आभार जताया। कार्यक्रम में मंच का संचालन अतुल दुबे ने किया।


