उत्तम उत्तम आकिंचन्य धर्म की आराधना के साथ दशलक्षण पर्व का नौवां दिन श्रद्धा से मनाया….
श्री दिगंबर जैन मंदिर, सेक्टर-27 बी, चंडीगढ़ में चल रहे पावन दशलक्षण पर्व के नौवें दिन आज उत्तम उत्तम आकिंचन्य धर्म की श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक भाव से आराधना की गई। भगवान के अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने सांसारिक परिग्रह, मोह एवं आसक्ति से दूर रहते हुए आत्मा की ओर उन्मुख होने का संकल्प लिया।
आज के धार्मिक आयोजन में प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य श्री रमेश जैन, आशीष जैन एवं श्रीमती शिखा जैन को प्राप्त हुआ। प्रथम शांतिधारा श्री अमित जैन एवं श्रीमती बीनू जैन द्वारा की गई, जबकि द्वितीय शांतिधारा श्री धर्म बहादुर जैन एवं श्रीमती मेम लता जैन द्वारा की गई।
हॉल में भिषेक एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य भी श्री रमेश जैन आशीष जैन एवं श्रीमती शिखा जैन को प्राप्त हुआ। दशलक्षण विधान के दौरान सौधर्मेंद्र की भूमिका श्री राजीव जैन एवं श्रीमती प्रियंका जैन द्वारा निभाई गई। कुबेर इंद्र बनने का सौभाग्य श्री सुंदर लाल जैन एवं श्री आशीष जैन को प्राप्त हुआ।
उत्तम आकिंचन्य धर्म का संदेश
उत्तम आकिंचन्य धर्म का अर्थ है किसी भी बाहरी वस्तु के प्रति ममत्व और आसक्ति का त्याग। जैन दर्शन में आकिंचन भाव व्यक्ति को यह समझने की प्रेरणा देता है कि सांसारिक वस्तुएं स्थायी नहीं हैं और आत्मा का वास्तविक स्वरूप इन बाहरी परिग्रहों से अलग है।
उत्तम आकिंचन्य हमें केवल धन-संपत्ति का त्याग करने का संदेश नहीं देता, बल्कि मन में उत्पन्न होने वाले मोह, ममता, अहंकार, लोभ और संग्रह की भावना को कम करने की प्रेरणा देता है। जब व्यक्ति बाहरी वस्तुओं पर अपनी निर्भरता और आसक्ति कम करता है, तो उसके भीतर संतोष, स्वतंत्रता और आत्मिक शांति का विकास होता है। दशलक्षण पर्व इसी आत्मचिंतन के माध्यम से व्यक्ति को अपने वास्तविक आत्मस्वरूप की ओर बढ़ने का अवसर प्रदान करता है।
आज की पूजन सामग्री विभिन्न श्रद्धालु परिवारों द्वारा श्रद्धापूर्वक प्रायोजित की गई। इनमें श्री दिनेश जैन एवं श्रीमती स्वाती जैन, श्रीमती त्रिशला जैन एवं श्री सुनील जैन, श्री विनीत जैन एवं श्रीमती सोनी जैन तथा श्रीमती स्वर्ण लता जैन एवं श्री दीपक जैन शामिल रहे।
दशलक्षण पर्व के नौवें दिन मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में कार्यकारिणी के सदस्यों श्री धर्म बहादुर जैन, एडवोकेट आदर्श जैन ,श्री संत कुमार जैन , श्री राजा बहादुर सिंह जैन , श्री नीरज जैन , श्री शरद जैन, श्री नितिन जैन , श्री नव रतन जैन, श्री रमेश जैन , श्री दामोदर दास जैन सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे और भगवान की आराधना, अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन में भाग लिया। मंदिर का वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने उत्तम आकिंचन धर्म के संदेश को आत्मसात करते हुए मोह, ममता और परिग्रह से ऊपर उठकर आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प लिया।


