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हर्षोल्लाह के साथ मनाया गया अष्टान्हिका महापर्व का दूसरा दिन….

श्री दिगम्बर जैन मंदिर, सेक्टर 27-बी, चंडीगढ़ में अष्टान्हिका महापर्व के पावन अवसर पर आयोजित सिद्धचक्र महामण्डल विधान एवं शांति महायज्ञ के दूसरे दिन भी श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास का अनुपम वातावरण रहा। प्रातः 6:30 बजे भगवान जिनेन्द्र देव का अभिषेक एवं मुख्य मंदिर तथा विधान मंडप में शांतिधारा के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।

इसके उपरांत विधानाचार्य ब्रह्मचारिणी आशा दीदी के सान्निध्य में मंगलाचरण, भगवान महावीर पूजा, नन्दीश्वर द्वीप पूजा तथा सिद्धचक्र महामण्डल विधान के 16 अर्घ्य अत्यंत श्रद्धा एवं भक्तिभाव से समर्पित किए गए। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने विधान में सहभागिता करते हुए धर्मलाभ प्राप्त किया।

दीदी ने अपने प्रवचनों के माध्यम से बताया कि अनादि काल से हमारी आत्मा में कर्म लगे हुए हैं उनका कैसे समन हो दमन हो तो हमने उसके लिए कल हम सब श्रद्धालुओं ने आठ गुणों से सिद्धों की आराधना की परंतु जब कीचड़ ज्यादा लगा हुआ होता है तो एक बार में साफ नहीं होता इसलिए हमने आज 16 गुणों से सिद्धों की आराधना की। पूज्य दीदीजी ने सिद्धचक्र विधान के 16 अर्घ्यों के आध्यात्मिक एवं दार्शनिक महत्व पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए बताया कि इन अर्घ्यों के माध्यम से जीव अपने संचित कर्मों के बंधनों के क्षय एवं आत्मा की शुद्धि का भाव करता है। उन्होंने कहा कि यह विधान मन को समता, आत्मसंयम एवं एकाग्रता की दिशा में अग्रसर करता है, जिससे साधक के भीतर आध्यात्मिक जागृति का विकास होता है। साथ ही यह विधान लौकिक जीवन में उत्तम स्वास्थ्य, मानसिक शांति एवं आध्यात्मिक कल्याण की प्रेरणा देता है, जिसका उल्लेख जैन परंपरा की अनेक ऐतिहासिक एवं धार्मिक कथाओं में मिलता है। आज का कार्यक्रम प्रातः 10 बजे संपन्न हुआ। पूरे विधान के दौरान मंदिर परिसर भक्तों के जयघोष एवं भक्ति-भाव से गूंजता रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने विधान में भाग लेकर धर्माराधना की तथा समाज एवं विश्व के सुख, शांति और मंगल की कामना की। शांतिधारा सौधर्मइंद्र श्रीमान धर्म बहादुर जैन ने की दूसरी ओर से शांतिधारा करने का सौभाग्य श्रीमान दामोदरदास जैन परिवार ने प्राप्त किया एवं गुप्तिसागर हाल में शांति धारा करने का सौभाग्य श्रीमान नवरत्न जैन परिवार ने प्राप्त किया

श्री दिगम्बर जैन मंदिर समिति ने समस्त श्रद्धालुओं से आगामी दिनों के विधान एवं शांति महायज्ञ में अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त करने का आग्रह किया।