लाइव कैलेंडर

August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31  

LIVE FM सुनें

India News24x7 Live

Online Latest Breaking News

उद्यमियों की पुस्तक ‘किलिंग कैंसर’ में फार्मा उद्योग शुरू करने और संचालित करने की चुनौतियों पर महत्वपूर्ण जानकारी….

चंडीगढ़, 19 जून 2026: फार्मास्युटिकल उद्यमी और पति-पत्नी की जोड़ी अभिनव गर्ग एवं मेहक अग्रवाल ने एक प्रेस वार्ता के दौरान अपनी पुस्तक ‘किलिंग कैंसर: 13 सीक्रेट्स ऑफ द हाई-स्टेक्स ड्रग मैन्युफैक्चरिंग वर्ल्ड’ का विमोचन किया। यह पुस्तक पाठकों को दवा निर्माण की जटिल दुनिया की अभूतपूर्व झलक प्रदान करती है।

कैंसर संबंधी दवाओं के निर्माण में वर्षों के अनुभव के आधार पर लेखकों ने उन निर्णयों, असफलताओं, नियमों, नेतृत्व संबंधी चुनौतियों और नैतिक जिम्मेदारियों का खुलकर वर्णन किया है, जो दुनिया भर के करोड़ों मरीजों तक पहुंचने वाली दवाओं को आकार देते हैं।

अभिनव गर्ग ने बताया कि 13 अध्यायों में विभाजित यह पुस्तक रेगुलेटरी कंप्लायंस, सप्लाई चेन की मजबूती, उद्यमिता, गुणवत्ता प्रणालियों, उत्पादन संबंधी विफलताओं और अत्यधिक विनियमित उद्योगों में नेतृत्व जैसे विषयों को विस्तार से प्रस्तुत करती है।

उन्होंने कहा कि हमने अपनी पुस्तक में फार्मा मैन्युफैक्चरिंग जगत की वास्तविकताओं को सामने लाने का प्रयास किया है। अधिकांश लोग सोचते हैं कि दवा निर्माण का लाइसेंस मिलना ही अंतिम लक्ष्य है, जबकि वास्तव में यह केवल शुरुआत होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू एच ओ) के गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज (जीएमपी) मानकों का केवल प्रमाणपत्र प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका लगातार पालन भी करना पड़ता है। प्रत्येक सप्लायर को मंजूरी और वैलिडेशन की आवश्यकता होती है। स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी), वार्षिक उत्पाद समीक्षा और विभिन्न बाजारों के लिए नियामकीय दस्तावेज नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बन जाते हैं। यहां तक कि उत्पादन प्रक्रिया में छोटे बदलाव भी दोबारा वैलिडेशन की मांग कर सकते हैं। जैसे-जैसे फार्मा व्यवसाय बढ़ता है, नियामकीय आवश्यकताएं कम नहीं होतीं बल्कि और बढ़ जाती हैं। जो उद्यमी इसे हल्के में लेते हैं, वे अक्सर कठिन अनुभवों से सीखते हैं।

लेखकों ने बताया कि ‘किलिंग कैंसर’ कोई तकनीकी मैनुअल नहीं है, बल्कि व्यावहारिक अनुभवों और जानकारियों का संग्रह है, जो उद्यमियों, उद्योग विशेषज्ञों, स्वास्थ्य कर्मियों, नियामकों और आम लोगों के लिए उपयोगी है, जो यह समझना चाहते हैं कि दवाएं मरीजों तक कैसे पहुंचती हैं।

मेहक अग्रवाल ने कहा कि यह पुस्तक लोगों की धारणा और फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग की वास्तविकताओं के बीच की दूरी को कम करने की सोच से लिखी गई है।

उन्होंने कहा कि लोग दवाओं को केवल एक उत्पाद के रूप में देखते हैं, लेकिन उनके पीछे लिए जाने वाले निर्णयों, नियमों, असफलताओं और मानवीय समझ को शायद ही समझ पाते हैं। हमने इस दुनिया को ईमानदारी से दस्तावेज़ित करने की जिम्मेदारी महसूस की। हमारा उद्देश्य इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना या महिमामंडित करना नहीं था, बल्कि इसे समझने योग्य बनाना था। उद्योग के भीतर काम करने वाले विशेषज्ञों द्वारा लिखी गई इस तरह की पुस्तक शायद ही कोई दूसरी हो।

पुस्तक में जीवनरक्षक दवाओं के निर्माण की विशेष चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई है, जहां गलती की गुंजाइश बेहद कम होती है और किसी भी चूक के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

अभिनव ने कहा कि फार्मास्युटिकल प्लांट के भीतर लिया गया हर निर्णय सप्लाई चेन के अंत में मौजूद मरीज से अदृश्य रूप से जुड़ा होता है। जब आप इस वास्तविकता को समझते हैं, तो गुणवत्ता, नेतृत्व, अनुपालन और व्यावसायिक निर्णयों को देखने का आपका दृष्टिकोण पूरी तरह बदल जाता है।

उल्लेखनीय है कि मेहक अग्रवाल ने वर्ष 2024 में फैशन और मॉडलिंग के क्षेत्र में भी कदम रखा था और वर्तमान में फार्मास्युटिकल व्यवसाय संभालने के साथ-साथ अपने इस जुनून को भी आगे बढ़ा रही हैं।

मेहक ने कहा कि फैशन इंडस्ट्री में मेरे अनुभव ने मुझे धारणा और वास्तविकता के बीच का अंतर समझाया। फैशन में धारणा ही उत्पाद होती है, जबकि फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग में वास्तविकता ही उत्पाद होती है और यहां किसी भी तरह की गलती की कोई गुंजाइश नहीं होती। एक महिला उद्यमी के रूप में मैंने इस उद्योग में अपनी विश्वसनीयता योग्यता और निरंतरता के आधार पर बनाई है। इन अनुभवों ने न केवल मेरे नेतृत्व के सफर को आकार दिया, बल्कि इस पुस्तक में साझा किए गए कई महत्वपूर्ण सबकों को भी जन्म दिया।

वैश्विक स्वास्थ्य सेवाओं में भारत की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए लेखकों ने कहा कि भारत आज दुनिया में जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के बद्दी जैसे फार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब्स के महत्व को भी रेखांकित किया।

अभिनव ने कहा कि भारत आज वैश्विक जेनेरिक दवा निर्यात का लगभग पांचवां हिस्सा उपलब्ध कराता है और दुनिया भर की स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जैसे-जैसे उद्योग जटिल जेनेरिक दवाओं, बायोसिमिलर्स और पर्सनलाइज्ड मेडिसिन की ओर बढ़ रहा है, हमें ऐसे नेतृत्वकर्ताओं की आवश्यकता है जो विज्ञान और व्यवसाय दोनों को अच्छी तरह समझते हों। हमें उम्मीद है कि यह पुस्तक उस संवाद में सार्थक योगदान देगी।

यह पुस्तक लेखकों ने अपनी पुत्री काश्वी को समर्पित की है। यह उनके उस विश्वास और उम्मीद का प्रतीक है कि आने वाली पीढ़ियों को एक ऐसा स्वास्थ्य तंत्र विरासत में मिले, जो आज की तुलना में अधिक सुरक्षित, मजबूत और जवाबदेह हो।