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चंडीगढ़ में न्यायिक सुधारों की तत्काल आवश्यकता पर सेमिनार आयोजित…..

चंडीगढ़, 3 जून 2026: देशभर की अदालतों में 5.5 करोड़ से अधिक मामलों के लंबित होने की गंभीर स्थिति के बीच, संवैधानिक न्याय का वादा करोड़ों नागरिकों के लिए एक दूर का सपना बनता जा रहा है। इसी पृष्ठभूमि में फोरम फॉर फास्ट जस्टिस, मुंबई द्वारा GA 500 लॉयर्स कॉन्फ्रेंस, महिला अधिवक्ताओं, महिला कार्यकर्ताओं तथा आरटीआई कार्यकर्ताओं के सहयोग से “समयबद्ध न्याय वितरण के लिए न्यायिक सुधारों की तत्काल आवश्यकता” विषय पर एक उच्च स्तरीय सेमिनार का आयोजन प्रेस क्लब, चंडीगढ़ में किया गया।

सेमिनार को श्री भगवानजी रैयानी, चेयरमैन एवं मैनेजिंग ट्रस्टी, फोरम फॉर फास्ट जस्टिस, श्री प्रवीण पटेल, राष्ट्रीय संयोजक, फोरम फॉर फास्ट जस्टिस, श्री संजय चद्दार ट्रस्टी, फोरम फॉर फास्ट जस्टिस, एडवोकेट भारत भूषण चौधरी, संस्थापक एवं अध्यक्ष GA 500 लॉयर्स कॉन्फ्रेंस, श्री पल्लव मुखर्जी चंडीगढ़, महिला अधिवक्ता शालिनी बागड़ी, उषा उर्फ मांसी शर्मा, महिला कार्यकर्ता अमिता मरवाहा तथा आरटीआई कार्यकर्ता आर.के. गर्ग ने संबोधित किया।

जसपाल सिंह, आरटीआई एवं सामाजिक कार्यकर्ता ने मंच सचिव के रूप में कार्यक्रम का संचालन किया। जसपाल सिंह ने कहा कि जो वकील और माननीय चर्च न्यायाधीश जल्द सही इंसाफ देने का काम करते हैं उन्हें सरकार उचित पारितोषिक दे और सबके लिए शीघ्र न्याय सही न्याय उपलब्ध करवाने के कार्य को प्रोत्साहित करे।

वक्ताओं ने कहा कि यह सेमिनार केवल एक विचार-विमर्श नहीं है, बल्कि “जनता की अदालत” की अवधारणा को समयबद्ध न्याय की वास्तविकता में बदलने का आह्वान है, जिसे राजनीतिक इच्छाशक्ति, संस्थागत सुधारों और तकनीकी सहयोग के माध्यम से ही संभव बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम में अधिवक्ताओं, विधि शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं तथा नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत समय पर न्याय के संवैधानिक वादे को पुनर्स्थापित करने के लिए आवश्यक सुधारों पर चर्चा की।

न्याय में देरी का बढ़ता संकट और संवैधानिक चिंता

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार भारतीय अदालतों में लंबित मामलों की संख्या 5.5 करोड़ से अधिक हो चुकी है। लाखों वादकारी वर्षों, यहां तक कि दशकों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। न्याय में ऐसी देरी न केवल न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को कमजोर करती है, बल्कि जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार को भी प्रभावित करती है, जिसमें त्वरित न्याय का अधिकार भी शामिल है।

वक्ताओं ने कहा कि विचाराधीन कैदियों (अंडरट्रायल कैदियों) की स्थिति तथा न्याय तक समान पहुंच भी महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जिन पर गंभीर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। सेमिनार में इस संकट का विश्लेषण भारत की संवैधानिक प्रतिबद्धताओं तथा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के संदर्भ में भी किया गया।

सेमिनार के प्रमुख विषय

केस प्रबंधन, सूचीकरण (लिस्टिंग) प्रणाली और न्यायिक अवसंरचना में संरचनात्मक सुधार।

राष्ट्रीय वाद नीति (National Litigation Policy) तथा वैकल्पिक विवाद निपटान (ADR) तंत्र के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता।

ई-कोर्ट, वर्चुअल सुनवाई और केस-ट्रैकिंग सिस्टम जैसी तकनीकों के विवेकपूर्ण उपयोग द्वारा अनावश्यक स्थगन और देरी को कम करना।

विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ जैसे क्षेत्रों में अधीनस्थ न्यायपालिका पर बढ़ते बोझ को कम करने के उपाय, जहां प्रति न्यायाधीश मामलों का भार राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है।

जनहित याचिकाओं तथा निगरानी तंत्र को सशक्त बनाकर न्याय वितरण प्रणाली के विभिन्न स्तरों की जवाबदेही सुनिश्चित करना।

कार्यक्रम में समयबद्ध न्याय की संवैधानिक आवश्यकता पर विशेष संबोधन, गणमान्य व्यक्तियों के बीच पैनल चर्चा तथा मीडिया प्रतिनिधियों, विधि छात्रों, स्थानीय नागरिक समाज समूहों और अन्य प्रतिभागियों के साथ प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया।

उपरोक्त कार्यक्रम में श्री ओ. पी. चोपड़ा श्री बलबीर गुरे, श्री रजिंदर भुकल् , श्री आर. पी. सिंह, श्री राजेंद्र कुमार सभी चंडीगढ़ व हरियाणा में श्री गुरु रविदास सभा प्रबंधक सामाजिक कार्यकर्ताओं, एडवोकेट श्री सतीश कादियान, एडवोकेट श्री सुनील कुमार, एडवोकेट श्री आर. के. जोशी एडवोकेट श्री प्यारचंद कोंडल, एडवोकेट रंजीत धीमान, एडवोकेट कनू शर्मा, एडवोकेट शालिनी बागड़ी एडवोकेट उषा मानसी शर्मा और अधिवक्ता सहित अनेक गणमान्य लोगों ने भाग लिया।

प्रवीण पटेल 9827158588

संयोजक फॉर्म फॉर फास्ट जस्टिस

जसपाल सिंह 998881460

सामाजिक कार्यकर्ता