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प्राचीन कला केंद्र द्वारा “हॉर्न-मुक्त चंडीगढ़ ” जन-जागरूकता पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन….

चंडीगढ़:–विश्व स्तर पर अपनी खूबसूरती के लिए विख्यात “सिटी ब्यूटीफुल” चंडीगढ़ शहर को “हॉर्न-मुक्त चंडीगढ़” बनाने की दिशा में और लोगों को जागरूक झरने के लिए प्राचीन कला केंद्र के गुरमत संगीत विभाग के प्रमुख डॉ. मलकीत सिंह जंडीयाला द्वारा एक विशेष संगीत संध्या ” शांति नाद” का आयोजन किया जा रहा है। जिसके जरिये लोगों को अनावश्यक रूप से हॉर्न न् बजाने के प्रति जागरूक किया जाएगा।

प्राचीन कला केंद्र के गुरमत संगीत विभाग के प्रमुख डॉ. मलकीत सिंह जंडीयाला और केंद्र के सेक्रेटरी सजल कौसर ने बताया कि “हॉर्न-मुक्त चंडीगढ़” विषय पर एक विशेष जन जागरूकता अभियान का प्रस्ताव केंद्र के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। इस महत्त्वपूर्ण एवं जनहितकारी पहल की गंभीरता को समझते हुए प्राचीन कला केंद्र ने इस विशेष अभियान को अपना पूर्ण सहयोग एवं समर्थन प्रदान करने का निर्णय लिया गया है।

उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य चंडीगढ़ शहर में अनावश्यक हॉर्न बजाने से उत्पन्न ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभावों के प्रति नागरिकों को जागरूक करना, जिम्मेदार वाहन संचालन की भावना को प्रोत्साहित करना तथा शांत, स्वच्छ एवं अनुशासित वातावरण की स्थापना करना है। यह पहल “स्वच्छ भारत अभियान” की भावना के अंतर्गत समाज में नागरिक चेतना एवं सामाजिक उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। डॉ. मलकीत सिंह जंडीयाला ने बताया के अगले हफ्ते से ही हमारे वॉलिंटियर चंडीगढ़ के चौक पर खड़े होकर लोगों को अवेयर करेंगे बताया कि जो हम प्रोग्राम करने जा रहे हैं इस कार्यक्रम में चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस के एस एस पी भी शामिल होंगे। इन्होंने बताया कि हमारा यह पहला और अनूठा प्रयास है और हमें विश्वास है यह छोटा सा प्रयास चंडीगढ़ के लोगों को ध्वनि प्रदूषण के लिए अवेयर करेगा।

डॉ. मलकीत सिंह जंडीयाला ने बताया कि इस संगीत संध्या में वो हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का गायन करेंगे। जबकि उनके साथ मंच पर विख्यात तबला वादक उस्ताद अकरम खान और विख्यात सारंगी प्लेयर उस्ताद मुराद अली खान साथ देंगे। उस्ताद अमजद अली खान बतौर विशेष अतिथि प्रस्तुति देंगे।

डॉ. मलकीत सिंह जंडीयाला ने आगे बताया कि हालिया अध्ययनों के अनुसार अत्यधिक हॉर्न बजाना चंडीगढ़ में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण का एक प्रमुख कारण बन चुका है। प्राचीन कला केंद्र का मानना है कि जनसहभागिता एवं सामूहिक प्रयासों के माध्यम से चंडीगढ़ को एक शांत, सभ्य एवं अनुशासित नगर के रूप में स्थापित किया जा सकता है, जैसा कि ज्युरिक, जिसे वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन द्वारा विश्व के सबसे शांत नगरों में सम्मिलित किया गया है।