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अधिक मास में भगवान विष्णु की विधिवत पूजा का विशेष महत्व : पंडित राम गोपाल….

चंडीगढ़ 15 मई 2026: हिन्दू पंचांग में अधिक मास का विशेष महत्व माना गया है। इस माह को पुरुषोत्तम मास अथवा मलमास भी कहा जाता है। सेक्टर 24 स्थित प्राचीन शिव मंदिर के पंडित राम गोपाल ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अवधि में विवाह, मुंडन, जनेऊ, गृह प्रवेश एवं देव प्रतिष्ठा जैसे शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं, लेकिन भगवान विष्णु की आराधना, स्नान, दान, जप-तप, मंत्र एवं यंत्र साधना के लिए यह समय अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। लगभग तीन वर्ष बाद यह विशेष संयोग बनता है।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष विशेष स्थिति यह बन रही है कि ज्येष्ठ माह में दो महीने पड़ेंगे। पंचांग की गणना के अनुसार जब चंद्र और सौर वर्ष के बीच का अंतर बढ़ जाता है, तब उसे संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त माह जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है। एक सौर वर्ष लगभग 365 दिनों का होता है, जबकि चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है। यही अंतर लगभग 32 महीने 16 दिन में एक पूरे महीने के बराबर हो जाता है।

पंडित राम गोपाल ने बताया कि इस दौरान दो संक्रांतियां, दो पूर्णिमा और दो अमावस्या पड़ेंगी। इसी कारण इस माह का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि अधिक मास में भगवान विष्णु की विधिवत पूजा-अर्चना करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

उन्होंने श्रीमद्भागवत महापुराण एवं नारद पुराण का उल्लेख करते हुए बताया कि हिरण्यकश्यप ने ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया था कि वह न दिन में मारा जाए, न रात में, न महीने में और न पक्ष में। तब भगवान विष्णु ने उसके वध के लिए अधिक मास की रचना की। वहीं नारद पुराण के अनुसार मलमास का कोई स्वामी देवता बनने को तैयार नहीं था, तब भगवान विष्णु ने स्वयं इसका स्वामी बनकर इसे “पुरुषोत्तम मास” का नाम दिया।

पंडित राम गोपाल ने कहा कि यह समय मंत्रों और यंत्रों की सिद्धि के लिए अत्यंत अद्भुत माना जाता है। इस अवधि में विवाह, संतान प्राप्ति, कारोबार में वृद्धि, राजनीतिक सफलता, नौकरी, प्रमोशन, स्वास्थ्य रक्षा एवं आयु रक्षा हेतु विशेष साधनाएं की जाएंगी। उन्होंने बताया कि मंत्रों की ध्वनि को यंत्रों में परिवर्तित कर विशेष यंत्र सिद्धि भी इस दौरान की जाएगी।

उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 2026 का पुरुषोत्तम मास विशेष संयोग लेकर आ रहा है, क्योंकि सामान्यतः एक माह में एक ही पुष्य नक्षत्र आता है, लेकिन इस अधिक मास में दो गुरु पुष्य योग बन रहे हैं। पहला मई माह के अंत में तथा दूसरा जून माह में पड़ेगा, जो साधना और धार्मिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है।

दिवाकर पंचांग के अनुसार पुरुषोत्तम मास 17 मई 2026, रविवार से प्रारंभ होकर 15 जून 2026, सोमवार तक रहेगा। इस अवधि में सभी मांगलिक कार्य स्थगित रहेंगे, लेकिन आध्यात्मिक साधना, दान-पुण्य एवं यंत्र-मंत्र सिद्धि का विशेष महत्व रहेगा।