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लिट फेस्ट में ‘बिकमइंग’ प्रदर्शनी के साथ 130 वर्षों की बाल पुस्तकों की कला का प्रदर्शन….

चंडीगढ़, 4 मई 2026: सेंट कबीर पब्लिक स्कूल का वार्षिक चिल्ड्रन्स लिटरेचर फेस्टिवल शुरू हो चुका है और यह 8 मई तक चलेगा। इस उत्सव में बाल साहित्यकार, कहानीकार और चित्रकार कक्षा 1 से 12 तक के लगभग 1,300 छात्रों को कहानियों, कला और कल्पना के जीवंत उत्सव में शामिल करेंगे। इस फेस्टिवल का मुख्य आकर्षण ‘‘बिकमइंग’ नामक एक महत्वपूर्ण प्रदर्शनी है, जो भारत में बाल पुस्तकों के चित्रण के 130 से अधिक वर्षों के इतिहास को दर्शाती है। उल्लेखनीय है कि 2025 में अपनी शुरुआत के बाद ‘ बिकमइंग ’ पहली बार दिल्ली से बाहर प्रदर्शित की जा रही है। फेस्ट में एक पॉप-अप बुक शॉप भी आकर्षण का केंद्र है।

पहले दिन फेस्टिवल की जानकारी साझा करने के लिए एक प्रेस मीट आयोजित की गई, जिसमें सेंट कबीर पब्लिक स्कूल की निदेशक प्रीति बख्शी; प्रिंसिपल सपना कटोच, रीडिंग एवं स्टोरीटेलिंग लीड दीप्था विवेकानंद, ‘बिकमिंग’ की क्यूरेटर ऋचा झा, लेखक-चित्रकार कृपा, लेखक-चित्रकार ग्रेस्ट्रोक और कार्टूनिस्ट एवं चित्रकार रोहन चक्रवर्ती उपस्थित रहे। भारतीय बाल साहित्य पर केंद्रित स्वतंत्र बुकशॉप और कंसल्टेंसी ‘फंकी रेनबो’ से विद्या मणि और मुथम्मा देवया ने भी मीडिया से बातचीत की।

इस पहल के बारे में बात करते हुए, निदेशक प्रीति बख्शी ने कहा कि, “सेंट कबीर में हम मानते हैं कि शिक्षा को बच्चों के दुनिया को देखने और समझने के तरीके को निरंतर विस्तार देना चाहिए। अपने साहित्य उत्सव के केंद्र में कला और चित्रण को रखकर हम छात्रों को केवल पाठक ही नहीं, बल्कि पर्यवेक्षक, विचारक और सृजनकर्ता बनने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।”

प्रिंसिपल सपना कटोच ने बताया कि, ‘बिकमइंग’ प्रदर्शनी फेस्टिवल के सभी दिनों में दोपहर 2:45 बजे से 4 बजे तक आम जनता के लिए खुली रहेगी। भ्रमण की समय-सारणी के लिए स्कूल प्रशासन से संपर्क किया जा सकता है।

दीप्था विवेकानंद ने कहा, “इस वर्ष का फेस्टिवल ‘आर्ट इज ए वॉइस थीम पर आधारित है, जिसमें चित्रण और दृश्य कहानी कहने पर विशेष जोर दिया गया है। यह इस बात को रेखांकित करता है कि कला बच्चों के पढ़ने, समझने और दुनिया से जुड़ने के तरीके को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।”

पुरस्कार विजेता लेखिका और प्रकाशक तथा ‘‘बिकमइंग’ प्रदर्शनी की क्यूरेटर ऋचा झा ने बताया कि इस प्रदर्शनी में 25 भारतीय प्रकाशकों के 50 से अधिक कलाकारों द्वारा बनाई गई लगभग 70 कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गई हैं, जो देश में बाल पुस्तक कला के विकास की एक दुर्लभ और व्यापक झलक प्रस्तुत करती हैं।

उन्होंने बताया कि इस प्रदर्शनी में अबनिंद्रनाथ टैगोर, सुकुमार रे, नंदलाल बोस और सत्यजीत रे जैसे अग्रणी कलाकारों के साथ-साथ समकालीन चित्रकारों—अतनु रॉय, कृपा, प्रिया कुरियन, राजीव ईपे, रुचि शाह, शिल्पा राणाडे, सुमंत डे और तपोशी घोषाल—की कृतियाँ भी शामिल हैं। “ये सभी मिलकर भारत में बाल साहित्य की विविधता, नवाचार और विकसित होती दृश्य भाषा को दर्शाते हैं,” उन्होंने कहा।

प्रदर्शनी, जो पहले दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में प्रदर्शित की गई थी, अब सेंट कबीर पब्लिक स्कूल के लिट फेस्ट के माध्यम से एक स्कूल वातावरण में लाई गई है। यह प्रदर्शनी केवल देखने से आगे बढ़कर एक शिक्षण वातावरण में सक्रिय सहभागिता को प्रोत्साहित करती है।

पाँच दिवसीय फेस्टिवल के दौरान छात्र विशिष्ट सत्रों में लेखकों और चित्रकारों के साथ भाग लेंगे और प्रदर्शनी के निर्देशित भ्रमण में शामिल होंगे। इस फेस्टिवल में प्रिया कुरियन, ग्रेस्ट्रोक, रोहन चक्रवर्ती, ऋचा झा, अश्विन प्रभु, कृपा और नंदिता बसु जैसे प्रमुख नाम शामिल होंगे।

 

लेखक-चित्रकार कृपा ने कहा, “चित्रण केवल पाठ का पूरक नहीं होते, बल्कि वे स्वयं में एक सशक्त कथा होते हैं। हम बच्चों को यह समझने में मदद करेंगे कि चित्र किस प्रकार पहचान, भावनाओं और अर्थ को आकार देते हैं।”

 

लेखक-चित्रकार ग्रेस्ट्रोक ने कहा, “फेस्टिवल की इंटरैक्टिव गतिविधियाँ बच्चों में दृश्य साक्षरता विकसित करने और कहानी कहने में चित्र और पाठ के संबंध को गहराई से समझाने के लिए तैयार की गई हैं।”

रोहन चक्रवर्ती ने कहा, “बाल पुस्तकों पर चर्चा करते समय उनके ग्राफिकल कंटेंट पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जो इन्हें रोचक और पढ़ने में आसान बनाता है। हम यह भी बताएंगे कि बाल साहित्य में कार्टून किस तरह पुस्तकों के आकर्षण को बढ़ाते हैं।”

फंकी रेनबो की विद्या मणि ने कहा, “ऐसे फेस्टिवल के माध्यम से हम समावेशी साहित्यिक स्थान बनाने का प्रयास कर रहे हैं, जो बच्चों को विविध और वास्तविक जीवन के अनुभवों से जुड़ी कहानियों से जोड़ते हैं।”

फंकी रेनबो की मुथम्मा देवया ने जोड़ा, “एक विशेष रूप से तैयार पॉप-अप बुकशॉप इस अनुभव को और समृद्ध बनाएगी, जिसमें छात्रों और आगंतुकों के लिए समकालीन पुस्तकों का विस्तृत चयन उपलब्ध होगा।”