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पीजीआई के डॉ. राकेश कपूर ने जताई चिंता: 60% से अधिक लोग पाचन समस्याओं के बावजूद डॉक्टर से नहीं लेते सलाह…..

चंडीगढ़, 1 अप्रैल 2026: तेज रफ्तार जीवनशैली, अस्वस्थ खान-पान और लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदतों के कारण भारत में पाचन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसके बावजूद कोलोरेक्टल कैंसर जैसे गंभीर जठरांत्र रोगों के प्रति जागरूकता अब भी सीमित है। एक हालिया सर्वेक्षण में सामने आया है कि चंडीगढ़ के 60% से अधिक लोग अनियमित मल त्याग की समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद डॉक्टर से परामर्श लेने में देरी करते हैं।

इसी परिप्रेक्ष्य में मर्क स्पेशियलिटीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा “जीवनशैली एवं पाचन स्वास्थ्य जागरूकता सर्वेक्षण” के तहत एक राष्ट्रीय स्तर का अध्ययन किया गया। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य यह समझना था कि लोग पाचन संबंधी लक्षणों को कैसे पहचानते हैं और कब चिकित्सकीय सहायता लेते हैं। अध्ययन में अनियमित मल त्याग, अम्लता और मल में खून जैसे लक्षणों के प्रति लोगों की प्रतिक्रिया के साथ-साथ समय पर निदान में देरी के कारणों का भी विश्लेषण किया गया।

सर्वेक्षण के निष्कर्ष एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में साझा किए गए, जिसमें पीजीआई, चंडीगढ़ के डॉ. राकेश कपूर, प्रोफेसर एवं यूनिट प्रमुख, रेडियोथेरेपी एवं ऑन्कोलॉजी विभाग, चंडीगढ़; डॉ. जतिन सरीन, निदेशक – मेडिकल ऑन्कोलॉजी, लिवासा हॉस्पिटल, मोहाली एवं चंडीगढ़ कैंसर एंड डायग्नोस्टिक सेंटर, चंडीगढ़; और कर्नल डॉ. गुरजीत सिंह चौधरी, कंसल्टेंट मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, इंडस सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, मोहाली जैसे विशेषज्ञ शामिल हुए। इस दौरान डॉक्टरों ने पाचन स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समय पर चिकित्सा परामर्श लेने की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. राकेश कपूर ने कहा, “कोलोरेक्टल कैंसर बड़ी आंत या मलाशय में विकसित होता है और अक्सर छोटे पॉलिप्स से शुरू होता है, जो समय के साथ कैंसर में बदल सकते हैं। मल त्याग में बदलाव, मल में खून, पेट में असुविधा, थकान या बिना कारण वजन कम होना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कोलोनोस्कोपी जैसी जांच से इस कैंसर का शुरुआती अवस्था में पता लगाया जा सकता है और इसका इलाज संभव है।”

डॉ. जतिन सरीन ने कहा, “चंडीगढ़ के आंकड़े बताते हैं कि लोग पाचन के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करते हैं और डॉक्टर के पास जाने में देरी करते हैं। इसके बजाय वे स्वयं दवा लेते हैं, जिससे वास्तविक समस्या छिप जाती है और निदान में देरी होती है। मल त्याग की आदतों में बदलाव या मल में खून जैसे संकेतों को अक्सर हल्के में लिया जाता है, जबकि ये कोलोरेक्टल कैंसर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।”

कर्नल डॉ. गुरजीत सिंह चौधरी ने कहा, “खराब जीवनशैली की आदतें कोलोरेक्टल कैंसर के बढ़ते मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्रोसेस्ड फूड, शारीरिक गतिविधि की कमी, तंबाकू सेवन और मोटापा जोखिम को बढ़ाते हैं। वहीं फाइबर युक्त आहार, नियमित व्यायाम और समय-समय पर जांच इस खतरे को कम कर सकते हैं।”

राष्ट्रीय स्तर पर किए गए इस सर्वेक्षण में 14 प्रमुख भारतीय शहरों के 25 से 65 वर्ष आयु वर्ग के 10,198 लोगों को शामिल किया गया। निष्कर्षों में सामने आया कि 80% से अधिक लोग अम्लता, अपच या कब्ज जैसी समस्याओं के लिए डॉक्टर से सलाह लेने के बजाय स्वयं दवा लेते हैं। वहीं 65% से अधिक लोग अनियमित मल त्याग का अनुभव करते हैं। 50% से अधिक लोग सप्ताह में कम से कम तीन बार बाहर या पैकेज्ड भोजन का सेवन करते हैं, जबकि केवल 45.2% लोग नियमित व्यायाम करते हैं।

चंडीगढ़ के आंकड़े और भी चिंताजनक हैं। यहां 624 प्रतिभागियों पर किए गए विश्लेषण में पाया गया कि 60.5% लोग अनियमित मल त्याग का अनुभव करते हैं, जबकि 81.5% लोगों को अधूरे मल त्याग की समस्या रहती है। 81% से अधिक लोग मल में खून को गंभीर चेतावनी संकेत नहीं मानते और 85% से अधिक लोग स्वयं दवा या जीवनशैली में बदलाव के जरिए समस्या का समाधान करने की कोशिश करते हैं।

सर्वेक्षण के अनुसार, चंडीगढ़ में 78% लोग बाहर या पैकेज्ड भोजन का सेवन करते हैं और केवल 44.3% लोग ही नियमित व्यायाम करते हैं। 37.2% लोग तंबाकू का सेवन करते हैं। 85% से अधिक लोग गैस्ट्रिक समस्याओं का इलाज स्वयं करते हैं, जबकि केवल 10.4% ही डॉक्टर से परामर्श लेते हैं। इतना ही नहीं, 39.2% लोग मल में खून आने पर भी खुद दवा लेने को प्राथमिकता देते हैं। चिकित्सकीय सहायता लेने में देरी के पीछे कई कारण सामने आए हैं। इनमें समय की कमी (33.1%), डर (26.7%) और झिझक (22.9%) प्रमुख हैं। इसके अलावा 79% लोग यह नहीं जानते कि गंभीर पाचन रोग बिना दर्द के भी हो सकते हैं। हालांकि 23.6% लोगों ने पारिवारिक इतिहास की जानकारी दी, फिर भी आनुवंशिक जोखिम को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच, सही खान-पान, नियमित व्यायाम और तंबाकू से दूरी बनाकर पाचन स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है और कोलोरेक्टल कैंसर जैसे गंभीर रोगों के जोखिम को कम किया जा सकता है।