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57वां मूर्ति स्थापना समारोह पूर्णाहुति के उपरांत संपन्न….

चंडीगढ़ 28 फरवरी 2026: सेक्टर 23 डी स्थित श्री महावीर मंदिर मुनि सभा (साधु आश्रम) में पूज्यपाद ब्रह्मलीन श्री सतगुरु देव श्रीश्री 108 श्री मुनि गौरवानंद गिरि जी महाराज की प्ररेणा से परम्परानुसार 57 वें वार्षिक मूर्ति स्थापना समारोह संपन्न हो गया।

समारोह के अंतिम दिन विधि विधान के साथ भगवान का पूजन-अर्चना व हवन किया गया और हवन की पूर्णाहुति के पश्चात आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ समारोह का विधिवत समापन किया गया। इस दौरान प्रधान दिलीप चंद गुप्ता, सांस्कृतिक सचिव पं. दीप भारद्वाज, उप प्रधान ओपी पाहवा, महासचिव अशोक ठाकुर, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र गुप्ता, कार्यालय सचिव नंदलाल शर्मा, ऑडिटर नरेश महाजन, मंदिर के पं. अरविंद शर्मा, पं. चमनलाल व श्रद्धालु उपस्थित थे।

समारोह में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास श्री हरिजी महाराज ने श्रद्धालुओं को बताया कि भगवान को प्राप्त करने के लिए भक्ति मार्ग को शास्त्रों में सर्वोत्तम मार्ग माना गया है। भक्ति के प्रभाव से ही जीव भगवान को पाने में समर्थ होता है।

कथा व्यास श्री हरिजी महाराज ने श्रद्धालुओं को श्रीकृष्ण और सुदामा जी के पावन संवाद का रसपान कराते हुए बताया कि सुदामा जी ने जीवनभर भगवान श्रीकृष्ण से कभी कोई भौतिक वस्तु नहीं माँगी; जबकि वे चाहते तो प्रभु से सब कुछ प्राप्त कर सकते थे। भगवान सदैव उनके निकट थे, फिर भी सुदामा जी ने अटूट विश्वास और निष्कपट भक्ति को ही अपना आधार बनाया तथा संपूर्ण जीवन श्रीकृष्ण स्मरण और भक्ति में समर्पित कर दिया। कथा व्यास ने समझाया कि सच्ची मित्रता निस्वार्थ भाव, विनम्रता और प्रेम का प्रतीक होती है। सुदामा जी द्वारका किसी याचना के लिए नहीं, बल्कि अपने प्रिय सखा से भावपूर्ण मिलन के लिए गए थे। निस्वार्थ प्रेम और आत्मीय समर्पण ही सच्ची मित्रता का वास्तविक स्वरूप है। कथा व्यास ने श्रद्धालुओं को बताया कि भगवान को प्राप्त करने के लिए भक्ति मार्ग को शास्त्रों में सर्वोत्तम मार्ग माना गया है। भक्ति के प्रभाव से ही जीव भगवान को पाने में समर्थ होता है।

इस अवसर पर सभा के प्रधान दलीप चंद गुप्ता ने आयोजन की भव्य एवं सफल संपन्नता पर सभा के सभी पदाधिकारियों, सदस्यों तथा श्रद्धालुओं का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग, समर्पण और अथक परिश्रम के कारण ही यह पावन आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो पाया है। उन्होंने विशेष रूप से उन सेवादारों और भक्तजनों की सराहना की, जिन्होंने तन-मन-धन से सेवा करते हुए कार्यक्रम को गरिमामय स्वरूप प्रदान किया। उन्होंने आगे कहा कि यह वार्षिक आयोजन संस्था की परंपरा का अभिन्न अंग है, जिसे प्रत्येक वर्ष श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया जाता है। भविष्य में भी इसी उत्साह, भव्यता और धार्मिक भावना के साथ इस आयोजन को निरंतर जारी रखा जाएगा, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु भगवान की कृपा और आध्यात्मिक आनंद का लाभ प्राप्त कर सकें।

कथा के पश्चात् श्रीमद्भागवत भगवान की सामूहिक आरती की गयी , जिसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद व भण्डारा वितरित किया गया।