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‘डिजिटल फास्टिंग’ – तेज़ दिमाग़ की कुंजी: डॉ. मोनिका बी. सूद, स्टेट कन्वीनर, इंटेलेक्चुअल सेल, भाजपा चंडीगढ़….

चंडीगढ़, 20 नवंबर 2025: भाजपा चंडीगढ़ की इंटेलेक्चुअल सेल की स्टेट कन्वीनर डॉ. मोनिका बी. सूद के अनुसार ‘डिजिटल फास्टिंग’ यानी स्क्रीन टाइम को सीमित करना, मन को अधिक तेज़, शांत और रचनात्मक बनाता है। स्टेपिंग स्टोन्स स्कूल के वार्षिक खेल दिवस में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए उन्होंने ‘डिजिटल फास्टिंग’ के इस नए विचार को साझा किया।

उन्होंने छात्रों को प्रतिदिन केवल 30 मिनट सोशल मीडिया उपयोग करने की सलाह दी और कहा कि कम स्क्रीन टाइम से एकाग्रता, याददाश्त, नींद और मानसिक स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार होता है। उन्होंने छात्रों से कहा कि भगवान ने आपको एक खूबसूरत जीवन दिया है। इसे बस स्क्रॉल करते हुए बर्बाद मत करो। इसे जियो, महसूस करो और कुछ नया बनाओ।

डॉ. मोनिका बी. सूद, जो नवजीवन हेल्थ की सीईओ और नेशनल यूनिटी एंड सिक्योरिटी काउंसिल की चेयरपर्सन भी हैं, स्टेपिंग स्टोन्स स्कूल की प्रतिष्ठित पूर्व छात्रा हैं। स्कूल के वार्षिक खेल दिवस पर उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया, जहां प्रिंसिपल अनु कुमार और पूरी फैकल्टी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और उनके योगदान एवं विद्यालय से भावनात्मक जुड़ाव की सराहना की।

अपने छात्र जीवन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि स्टेपिंग स्टोन्स स्कूल ही वह स्थान है जहां उनके सपनों ने पहली बार चलना शुरू किया था।

इस दौरान वार्षिक खेल दिवस में ऊर्जा से भरपूर प्रस्तुतियाँ और सभी कक्षाओं के छात्रों की उत्साही भागीदारी देखने को मिली। डॉ. सूद ने शिक्षकों की मेहनत, अभिभावकों के सहयोग और छात्रों के शानदार प्रदर्शन की प्रशंसा की, जिन्होंने इस दिन के लिए कठिन अभ्यास किया था।

खेलों को जीवन कौशल से जोड़ते हुए डॉ. सूद ने कहा कि स्पोर्ट्स डे केवल पदक जीतने का दिन नहीं है, बल्कि अनुशासन, साहस, टीमवर्क और दृढ़ता सीखने का अवसर है। उन्होंने बच्चों को याद दिलाया कि असफलताएँ और संघर्ष ही मजबूत व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं, जैसे हीरा दबाव में और सोना आग में तपकर ही निखरता है।

उन्होंने कहा कि खेल जगत के आइकॉन भी यही संदेश देते हैं—पी.वी. सिंधु ने चोटों के बीच प्रशिक्षण जारी रखा, नीरज चोपड़ा ने मोटापे और बुलिंग से लड़ाई लड़ी, और मैरी कॉम ने गरीबी और आलोचनाओं के बावजूद सफलता हासिल की। हर चैम्पियन के सफर में आँसू, दर्द और संघर्ष होते हैं, लेकिन दृढ़ निश्चय उन्हें विजेता बनाता है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने छात्रों को खुद पर विश्वास रखने, लगातार आगे बढ़ने और कभी हार न मानने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि अगर कभी इन्हीं बेंचों पर बैठने वाली एक लड़की बदलाव ला सकती है, तो आप सब उससे भी ज़्यादा आगे जा सकते हैं। उन्होंने बच्चों को बड़े सपने देखने और स्कूल का नाम रोशन करने के लिए प्रोत्साहित किया।