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राष्ट्रीय शैक्षिक कार्यशाला एवं 94वीं जन्म वर्षगांठ समारोह….

चंडीगढ़, 23 अगस्त 2026: न्यूरो थैरेपी को शिक्षा, शोध, व्यवस्थित प्रशिक्षण और प्रमाण आधारित प्रैक्टिस के माध्यम से समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाने की जरूरत है। दवा रहित एवं वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ इनके क्षेत्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से शोध और अकादमिक गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। यह बात पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने लाजपत राय मेहरा न्यूरो थैरेपी रिसर्च ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एलएमएनआरटीआई) की ओर से न्यूरो थैरेपी के संस्थापक पूज्य लाजपत राय मेहरा जी की 94वीं जन्म वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय शैक्षिक कार्यशाला एवं समारोह के उद्घाटन अवसर पर कही।

22 एवं 23 अगस्त को चंडीगढ़ में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से न्यूरो थैरेपिस्ट, विशेषज्ञ और प्रतिनिधि शामिल हुए। समापन एवं शैक्षिक कार्यक्रम में पंजाब सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर के असिस्टेंट डायरेक्टर एवं सिविल अस्पताल, कुराली, मोहाली के सीनियर मेडिकल ऑफिसर-इंचार्ज डॉ. अमित अरोड़ा तथा स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीईआरटी) के असिस्टेंट डायरेक्टर श्री राजीव कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दोनों अतिथियों ने प्रतिभागियों को शिक्षा, प्रशिक्षण, स्वास्थ्य एवं शोध के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया तथा उन्हें सम्मानचिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के दूसरे दिन पांच राज्यों से आए करीब 180 न्यूरो थैरेपिस्ट एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया। शैक्षिक कार्यशाला में अवधेश ठाकुर एवं प्रशांत ने एक्स-रे एवं एमआरआई जैसी जांच रिपोर्टों को समझने तथा उपलब्ध चिकित्सकीय जानकारी के आधार पर मरीज की स्थिति के समग्र मूल्यांकन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। प्रतिभागियों को मेडिकल रिपोर्ट, एक्स-रे एवं एमआरआई में दिखाई देने वाले विभिन्न संकेतों को समझने तथा मरीज की स्थिति का आकलन करते समय आवश्यक चिकित्सकीय पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय स्तर पर न्यूरो थैरेपी एवं संबंधित विषयों में प्रस्तावित बैचलर, मास्टर एवं पीएच.डी. स्तर के अकादमिक पाठ्यक्रमों की भी जानकारी दी गई। एलएमएनआरटीआई के नेशनल प्रेसिडेंट श्री राम गोपाल परिहार ने विश्वविद्यालयों के साथ अकादमिक सहयोग, नए पाठ्यक्रमों तथा उच्च शिक्षा के माध्यम से न्यूरो थैरेपी को शिक्षा एवं शोध से जोड़ने के प्रयासों की जानकारी साझा की।

कार्यक्रम में नेशनल कैंप इंचार्ज, डॉक्यूमेंटेशन इंचार्ज एवं नेशनल कोऑर्डिनेटर सहित संगठन की राष्ट्रीय टीम के प्रमुख पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। राष्ट्रीय टीम की उपस्थिति में कार्यशाला की शैक्षिक गतिविधियों, दस्तावेजीकरण, समन्वय एवं संगठनात्मक व्यवस्थाओं को व्यवस्थित रूप से संचालित किया गया।

वैदिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने पर जोर

एलएमएनआरटीआई के नेशनल पैट्रन श्री जयदेव सिंह (दादा) ने भारतीय एवं वैदिक चिकित्सा परंपराओं के संरक्षण और विस्तार की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन चिकित्सा विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।

एलएमएनआरटीआई के संरक्षक श्री अजय गांधी ने न्यूरो थैरेपिस्टों के हितों और पेशेवर मानकों को मजबूत करने की बात कही। उन्होंने कहा कि एजुकेशन सिस्टम के बारें में जानकारी दी।

कार्यक्रम में मैनेजमेंट एवं संगठनात्मक विकास पर भी विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें टीम प्रबंधन, कार्य विभाजन, अनुशासन, प्रभावी संचार व्यवस्था, संगठन के सुचारू संचालन और भविष्य की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने जैसे विषयों पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र एवं सम्मानचिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया, जबकि शिक्षा, शोध, संगठन एवं सामाजिक क्षेत्र में योगदान देने वाले विशिष्ट अतिथियों को भी सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के अंत में संगठन के महामंत्री श्री पुष्पक श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, प्रतिनिधियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की व्यवस्थाएं कोषाध्यक्ष श्री सुमित महाजन की देखरेख में संपन्न हुईं।

दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि न्यूरो थैरेपी को शिक्षा, वैज्ञानिक शोध, प्रमाण आधारित प्रैक्टिस एवं व्यवस्थित प्रशिक्षण के माध्यम से आगे बढ़ाते हुए समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाने के प्रयास किए जाएंगे।