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हार्टिकल्चर प्लांट के बाद सॉलिड वेस्ट प्लांट में पार्षदों ने पकड़ा नगर निगम का नुकसान….

चंडीगढ़: नगर निगम पहले से दयनीय वित्तीय स्थिति से गुजर रहा है उसके बाद बहुत से प्लांट/प्रोजेक्टों में कंपनियां अपना फायदा उठाकर नगर निगम को चूना लगा रही है। पिछली नगर निगम की हाउस की मीटिंग में हॉर्टिकल्चर प्लांट का मुद्दा उठा था जिसमें पार्षद तरुणा मेहता, प्रेमलता ओर जसबीर बंटी ने नगर निगम को हो रहे नुकसान को उजागर किया था

उसके बाद अब इन्हीं तीनों पार्षदों ने सेक्टर 25 के सॉलिड वेस्ट प्लांट का औचक निरीक्षण किया था जिसमें बहुत बड़ी खामियां मिली थी यानी प्लांट लगभग बंद की स्थिति में था। पार्षदों ने वहां देखा कि पिछले कई महीनों से कपड़ों के बड़े बड़े ढेर बिना प्रोसेस के पड़े थे यानी जो क्लॉथ शरेडर भी एमसी के खर्चे से लगाया गया था वो नहीं चल रहा था उसके इलावा…

1. एक साल से कपड़ों को छोटे छोटे पिस यानी 200 सौ एमएम में काटने वाला प्राइमरी शरेडर मशीन खराब थी

2. उसके साथ ड्रायर भी खराब था उसका आईडी फेन ओर उसके साथ लगी पाइप लाइन काम नहीं कर रही थी

3. कंप्रेशर कई महीनों से चल नहीं रहा था।

4. ब्लेंडर रिमूव करके रखा हुआ था।

5. लिफ्टर को बदले कई महीने हो चुके थे।

6. बाल्स्टिक स्प्रेटर की चार में से दो शाफ़्ट हटा कर रखी हुई थी। उसके कारण इनर्ट्स के साथ साथ रिसाइकल मैटीरियल भी मिक्स होकर लैंडफिल साइट पर जा रहा था जोकि कूड़े के पहाड़ बनने का कारण बन रहा था इनर्ट्स लगभग 10% गिरना चाहिए था। लेकिन इस से तो परसेंटेज की सीमा ही नहीं रह रही थी।

7. ब्लास्टिक सेपरेटर के साथ कन्वेयर बेल्ट उसको बदलने की जगह बेल्ट को काटकर रखा हुआ था। जिस से इनर्ट्स के साथ फ्रेश वेस्ट मिक्स होकर अंदर ही गिर रहा था जोकि की आरडीएफ के बाहर यार्ड में गिरना चाहिए उसे अंदर ट्राली में भरकर बाहर गिराया जा रहा था।

8. 50 एमएम कपड़े को काटने वाला सेकंडरी शरेडर जिसे दस टन प्रति घंटा प्रोसेस करना था वो दो या तीन टन के करीब प्रति घंटा प्रोसेस कर रही थी वो भी तीन शिफ्ट में यानी कम कपेस्टी से काम हो रहा था।

9. सभी बेल्ट खराब या फटी हुई थी जिसमें BC 1 से लेकर BC 5, 7,11 ओर 12 सभी बदलने वाली थी।

10. कंपनी एक प्लांट के कर्मचारियों को दूसरे प्लांट (सेग्रीगेशन प्लांट) में भी काम करवा रही थी जबकि पेमेंट दोनों प्लांट के ले रही थी।

11. बिजली पानी का बिल भी नगर निगम खुद भर रहा हे।

12. कंपनी को महीने के 33 लाख रुपए के करीब नगर नगर पेमेंट करता है जिसमें सैलरी, डीजल, प्लांट एंड मशीनरी मेंटेनेंस के देने होते है।

13. जो फाइनल प्रोडेक्ट निकलता है यानी आरडीएफ वो भी कंपनी खुद बेचती है।

सीनियर डिप्टी मेयर

जसबीर सिंह बंटी, डिप्टी मेयर तरुणा मेहता ओर पार्षद प्रेमलता ओर ने ज्वाइंट स्टेटमेंट देते हुए कहा कि इसकी जानकारी हमने कमिश्नर को दे दी थी जिस पर उन्होंने जल्द जांच करने ओर उस पर कारवाई करने का भरोसा दिया था। नगर निगम को हाउस की मीटिंग इस मुद्दे को जरूर उठाएंगे और कमिश्नर से कंपनी पर भारी जुर्माने के साथ ब्लैक लिस्ट करने की मांग करेंगे। कंपनियां नगर निगम को मात्र कमाई करने का साधन ना समझे।