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आचार्य श्री 108 सुबल सागर जी महाराज 03.12.2023…

चंडीगढ़ दिगंबर जैन मंदिर सेक्टर 27 बी में परम पूज्य आचार्य श्री 108 सुबल सागर जी महाराज के मंगल सानिध्य एवं प्रेरणा आशीर्वाद से एवं कमेटी के सभी सदस्यों की कड़ी मेहनत से और संपूर्ण चंडीगढ़, हरियाणा, पंचकुला समाज के सहयोग से श्रीमद् 1008 पंचकल्याणक महा महोत्सव निर्विघ्न शांति के साथ संपन्न हुआ
इस महा महोत्सव में एक शिल्पी जो एक पाषाण खंड में भगवान की मूर्ति निहारता है और छेनी और हथौड़ी से उस पाषाण को एक मूर्ति का रूप देकर शेष पाषाण को वहां से बाहर से निकाल देता है, इसी प्रकार हमारे गुरु महाराज भी किसी संसारी जीव को जिसमें भगवान बनने की योग्यता दिख रही है उसे भेद विज्ञान रूपी पैनी छेनी और वैराग्य रूपी हथौड़ी से उसमें रहने वाले विकारी भावों को नष्ट कर देते हैं l ऐसे शुद्ध पाषाण की मूर्ति पर ही पांचो कल्याणको में अर्थात गर्भकल्याणक,जन्म कल्याणक, तप कल्याणक,ज्ञान कल्याणक और मोक्ष कल्याणक में संस्कारों से प्रभावित करके और विशेष विशेष मंत्रो की शक्ति आदि से वह शुद्ध पाषाण आज भगवान जिनेंद्र के रूप में हमारे सामने उपस्थित है

हे गुरुवर जी आपने तो एक अचेतन पाषाण खंड को चेतन रूप भगवान बना दिया जो की जगत पूज्यता को प्राप्त हो गया तो हमें भी हमारे अंदर रहने वाले दोषों को ज्ञान वैराग्य, भेद विज्ञान से और अपने आशीर्वाद से उन्हें दूर कीजिए l
कार्यक्रम की समाप्ति पर सभी का स्वागत सम्मान संपन्न हुआ बाहर से आए सभी अतिथियों के आवास, भोजन पानी की समुचित व्यवस्थाओ से सभी का मन प्रसन्न रहा मंच समारोह स्थान से श्री जी भगवान के जिन बिम्ब गानों बाजों के साथ मंदिर जी में लाए गए और यथायोग्य स्थान पर विराजमान किए गए संपूर्ण समाज में बड़ा ही हर्ष है जिन श्रावकों के द्वारा यह भगवान विराजमान किए गए उन्होंने कुछ ही दिनों में सातिशय पुण्य को प्राप्त किया यह पुण्य एक दिन उन्हें भी भगवान जैसा सुख, वैभव, राज्य, संपदा को देने वाला होगा क्योंकि आगम में लिखा है गुरुओं के मुख से सुना कि पुण्य का फल ही अरिहंत अवस्था है
जयपुर, अहमदाबाद, ग्वालियर, भिंड, अकोदिया, अमलाहा,भोपाल, इटावा आदि समाज से अतिथि गण दीक्षा महोत्सव तथा पंचकल्याणक महोत्सव में उपस्थित हुए l चंडीगढ़ से शिमला के लिए आज गुरुदेव 108 सुबल सागर जी महाराज का बिहार होगा l जैन मंदिरों के दर्शन हेतु गुरु महाराज अपना विहार करते हैं दिगंबर साधु जो कि शरीर पर किसी भी प्रकार का वस्त्र धारण नहीं करते ऐसी सर्दी के दिनों में परिषहों को सहन करते हुए अपने मोक्ष मार्ग पर सतत आगे बढ़ते रहते हैं lआत्म बल की दृढ़ता से से सब असंभव काम भी संभव हो जाते है lऔर मोक्ष मार्ग प्रशस्त हो जाता है l यह जानकारी संघस्थ बाल ब्र गुंजा दीदी एवं श्री धर्म बहादुर जैन जी ने दी