मोबिक्रिप्ट करोड़ों के घोटाले में राज्य पक्ष और शिकायतकर्ता की और अधिवक्ता सुशांत गुप्ता ने अदालत में रखीं दलीलें, हाईकोर्ट ने आरोपियों की अग्रिम जमानत खारिज की…..
कथित मोबिक्रिप्ट ऐप (Mobiecrypt App) के माध्यम से करोड़ों रुपये की साइबर धोखाधड़ी और क्रिप्टोकरेंसी घोटाले के मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपियों रणधीर सिंह, दिनेश कुमार एवं अन्य की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इस मामले में शिकायतकर्ता सुमित गुप्ता की ओर से एडवोकेट सुशांत गुप्ता पैरवी कर रहे थे।
अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान राज्य पक्ष और शिकायतकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता सुशांत गुप्ता ने काफी देर तक अपनी-अपनी दलीलें अदालत के समक्ष रखीं। इसके बाद माननीय न्यायमूर्ति श्री एच.एस. ग्रेवाल की अदालत ने मामले की गंभीरता, कथित धोखाधड़ी की राशि, आरोपियों की भूमिका और जांच की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
अदालत में सामने आए करोड़ों की कमाई और कंपनी में ‘डायमंड रैंक’ के पद से जुड़े तथ्य
अदालत के आदेश में दर्ज स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, जांच के दौरान याचिकाकर्ताओं के नाम सह-आरोपी के डिस्क्लोजर स्टेटमेंट में सामने आए। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ताओं ने कथित फर्जी मोबिक्रिप्ट ऐप के माध्यम से करोड़ों रुपये कमाए। वे इस एप्लिकेशन का प्रचार करने वाली कंपनी से जुड़े हुए थे। जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी में इन लोगों का पद ‘डायमंड रैंक’ था।
अदालत ने कहा कि इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ताओं की वास्तविक भूमिका और कथित धोखाधड़ी में उनकी संलिप्तता की सीमा का पता लगाने के लिए गहन जांच आवश्यक है। अदालत के अनुसार, कथित धोखाधड़ी का बड़ा पैमाना और जांच की मौजूदा स्थिति देखते हुए अग्रिम जमानत देने के लिए कोई असाधारण आधार नहीं बनता।
शॉर्टकट से रातों-रात अमीर बनने का लालच पड़ सकता है भारी
आजकल अधिक मुनाफे का लालच देकर लोगों को फर्जी निवेश योजनाओं, क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म और कथित आरबीआई पंजीकरण के नाम पर गुमराह करने के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे प्लेटफॉर्म आम जनता की जीवनभर की बचत को निशाना बना सकते हैं। मोबिक्रिप्ट ऐप से जुड़ा मामला भी ऑनलाइन निवेश के जोखिमों के प्रति सतर्क रहने की जरूरत को उजागर करता है।
हरियाणा पुलिस और साइबर क्राइम सेल की जांच अहम
मामले की जांच में हरियाणा पुलिस और साइबर क्राइम सेल की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। पुलिस अधीक्षक (Cyber Crime) डॉ. मयंक गुप्ता और उनकी टीम द्वारा अदालत के समक्ष प्रस्तुत स्टेटस रिपोर्ट में कथित नेटवर्क और कंपनी में आरोपियों के पदों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों का उल्लेख किया गया है।
साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस, जांच एजेंसियों और न्यायपालिका के बीच प्रभावी समन्वय बेहद जरूरी है।
आम जनता से सतर्क रहने की अपील
किसी भी ऑनलाइन निवेश योजना, क्रिप्टोकरेंसी ऐप या असामान्य रूप से अधिक रिटर्न देने के दावे पर आंख मूंदकर विश्वास न करें। निवेश करने से पहले संबंधित संस्था की वैधता, नियामकीय स्थिति और विश्वसनीयता की पूरी जांच करें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपनी बैंकिंग जानकारी, ओटीपी या निवेश संबंधी गोपनीय विवरण साझा न करें।
साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करवाएं और आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी रिपोर्ट करें।
साइबर अपराध के खिलाफ जागरूक बनें, कानून का सम्मान करें और अपनी मेहनत की कमाई सुरक्षित रखें।


