चीनी के दामों में 15 रूपए किलो की बढोतरी, लेकिन गन्ना किसान को सिर्फ 15 पैसे किलो की राहत; भाजपा सरकार किसानों के साथ भेदभाव बंद करे : मनोज अग्रवाल……
इंडियन नेशनल लोकदल के प्रदेश कोषाध्यक्ष एवं पंचकूला शहरी जिलाध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने हरियाणा सरकार द्वारा गन्ने के भाव में मात्र 15 पैसे प्रति किलो यानि 15 रूपए क्विंटल की बढ़ोतरी किए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने गन्ना किसानों की मेहनत और उनकी आर्थिक परेशानियों का मजाक बनाकर रख दिया है। एक तरफ बाजार में चीनी के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं और दूसरी तरफ गन्ना पैदा करने वाले किसान को केवल 15 पैसे प्रति किलो की बढ़ोतरी देकर संतुष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है।
मनोज अग्रवाल ने कहा कि हालिया बाजार आंकड़े सरकार की किसान नीति पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। चीनी के मिल भाव में महज छह दिनों के भीतर उत्तर प्रदेश में लगभग 13 प्रतिशत और महाराष्ट्र में लगभग 17 प्रतिशत तक उछाल दर्ज किया गया। वहीं देश के खुदरा बाजार में चीनी का औसत भाव अक्टूबर में 56 रुपये प्रति किलो से ऊपर पहुंच गया। बाजार में चीनी की कीमतों में इतनी तेजी दिखाई दे रही है, लेकिन गन्ना किसान को उसके उत्पादन के मूल्य में केवल 15 पैसे प्रति किलो की बढ़ोतरी मिल रही है।
उन्होंने सवाल किया कि जब चीनी की कीमतों में तेजी का असर बाजार में दिखाई दे रहा है तो गन्ना पैदा करने वाले किसान को उसका उचित लाभ क्यों नहीं मिल रहा? चीनी उद्योग की पूरी अर्थव्यवस्था जिस किसान की मेहनत पर टिकी है, उसी किसान को लागत और महंगाई के अनुपात में मूल्य देने के समय सरकार हाथ क्यों खींच लेती है?
मनोज अग्रवाल ने कहा कि डीजल, खाद, बीज, कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी और कृषि मशीनरी की लागत लगातार बढ़ रही है। गन्ने की फसल तैयार करने में किसान को कई महीने तक मेहनत और पूंजी लगानी पड़ती है। इसके बावजूद 15 रुपये प्रति क्विंटल की मामूली बढ़ोतरी से किसान की बढ़ी हुई लागत की भरपाई भी संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा में चौटाला सरकार और हुड्डा सरकार के कार्यकाल में गन्ने के भाव में हुई बढ़ोतरी के आंकड़ों को भी सार्वजनिक बहस का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। हुड्डा सरकार के अंतिम दौर में गन्ने का भाव 310 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच चुका था। आज महंगाई और उत्पादन लागत में भारी वृद्धि के बावजूद किसानों को अपेक्षित राहत नहीं मिल रही।
मनोज अग्रवाल ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों की आमदनी दोगुनी करने के वादे करती रही है, लेकिन हकीकत यह है कि खेती की लागत बढ़ रही है और किसान की आमदनी उसी अनुपात में नहीं बढ़ रही। सरकार को चीनी मिलों और उपभोक्ताओं के हितों के साथ-साथ गन्ना उत्पादक किसानों के हितों की भी समान रूप से चिंता करनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि सरकार गन्ने के मूल्य में की गई मामूली बढ़ोतरी पर पुनर्विचार करे और किसानों की वास्तविक लागत, महंगाई तथा चीनी के बाजार भाव को ध्यान में रखते हुए गन्ने का लाभकारी मूल्य घोषित करे।


