चंडीगढ़ कांग्रेस ने चंडीगढ़ भाजपा के पूर्व अध्यक्ष संजय टंडन और मेयर सौरभ जोशी के मुख्य चुनाव आयुक्त का बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है….
चंडीगढ़ कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता राजीव शर्मा ने कहा कि मोदी सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त को दीवानी और आपराधिक मुकदमों से उम्र भर के लिए एक बेमिसाल छूट दी है, फिर भी उनके अनधिकृत और गलत काम जनता की अदालत के सामने साफ हो गए हैं। एक तरफ चुनाव आयोग लोकतंत्र विरोधी काम कर रहा है, दूसरी तरफ भाजपा इन कामों का बेशर्मी से बचाव कर रही है। इससे साफ पता चलता है कि चुनाव आयोग के अवैध कामों में भाजपा की भी मिलीभगत है।
शर्मा ने आगे कहा कि शहर के मेयर का संवैधानिक पद पर रहते हुए लगातार चुनाव आयोग के पक्ष में पैरवी करना कहां तक उचित है? चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और उसके कामकाज पर उठ रहे सवालों का जवाब तथ्यों और आधिकारिक स्तर पर दिया जाना चाहिए। जिस तरह मेयर और भाजपा के नेता लगातार सफाई देने के लिए सामने आ रहे हैं, उससे स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है कि आखिर इतनी बेचैनी क्यों है? क्या भाजपा के अपने पार्षद और नेता भी इन सवालों को लेकर दबाव में हैं? अगर सब कुछ स्पष्ट और पारदर्शी है तो बार-बार सफाई देने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
भाजपा नेताओं को यह भी बताना चाहिए कि वे आखिर किसे भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं—शहर की जनता को, विपक्ष को या अपने ही पार्षदों को? उन्होंने चुटकी लेते हुए नसीहत दी कि बीजेपी नेताओं को पहले अपने परेशान पार्षदों की सुध ले लेनी चाहिए l कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि जनता को जवाब चाहिए, राजनीतिक सफाई नहीं। चुनाव आयोग की विश्वसनीयता किसी एक राजनीतिक दल की पैरवी से नहीं, बल्कि पारदर्शी प्रक्रिया और तथ्यों से मजबूत होती है। यह और भी चिन्ताजनक है कि मेयर जैसे संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति मुख्य चुनाव आयुक्त के असंवैधानिक कामों का समर्थन कर रहा है
राजीव शर्मा, मुख्य प्रवक्ता
चण्डीगढ कांग्रेस


