किटी पार्टियों से आगे बढ़ा ट्रेंड… ट्राइसिटी की महिलाओं का नया जुनून बना महजोंग…..
चंडीगढ़: हर कुछ वर्षों में चंडीगढ़ किसी नए ट्रेंड को दिल से अपनाता है। कभी सॉरडो ब्रेड चर्चा में रही, फिर पिकलबॉल, बुक क्लब और वेलनेस सर्किल्स ने लोगों का ध्यान खींचा। अब शहर की महिलाओं के बीच एक नया शौक तेजी से लोकप्रिय हो रहा है—अमेरिकन महजोंग।
ट्राइसिटी में महजोंग अब सिर्फ एक बोर्ड गेम नहीं रहा, बल्कि एक सामाजिक अनुभव बन चुका है। सप्ताह की दोपहरें, जो कभी कॉफी मीटिंग्स और किटी पार्टियों तक सीमित थीं, अब महजोंग की रंग-बिरंगी टाइलों की खनक, ठहाकों और रणनीतिक चालों की चर्चा से जीवंत हो रही हैं।
इस बढ़ती लोकप्रियता के पीछे दो नाम प्रमुख रूप से उभरकर सामने आए हैं—CakeTalk और Mahjong & Mischief की संस्थापक शीनू तथा Mahjmania की संस्थापक प्रियंका दोनों ने मिलकर ट्राइसिटी की महिलाओं को इस रोचक खेल से परिचित कराया है और इसके माध्यम से एक ऐसा समुदाय तैयार किया है, जहां रणनीति के साथ-साथ रिश्ते भी बनते हैं।
केक से कम्युनिटी तक का सफर
वर्षों तक शीनू ट्राइसिटी की सबसे चर्चित केक आर्टिस्ट्स में शामिल रहीं। उनके डिज़ाइनर केक अनगिनत जन्मदिनों, शादियों और खास अवसरों की शोभा बने। लेकिन बेकिंग के साथ-साथ उनके भीतर एक और जुनून आकार ले रहा था—महजोंग।
आज प्रियंका के साथ मिलकर वे हर आयु वर्ग की महिलाओं को इस खेल की बारीकियां सिखा रही हैं।
शीनू बताती हैं, “शुरुआत में मुझे लगा था कि इसमें युवा प्रोफेशनल्स और उद्यमी महिलाएं ज्यादा रुचि लेंगी। लेकिन एक दिन मेरी मां का फोन आया। उन्होंने कहा—’मेरी सहेलियां भी महजोंग सीखना चाहती हैं, उनके लिए बैच कब शुरू कर रही हो?’ ये महिलाएं सत्तर और अस्सी वर्ष की उम्र में हैं। उसी दिन मुझे एहसास हुआ कि महजोंग केवल एक ट्रेंड नहीं है, बल्कि पीढ़ियों को जोड़ने का माध्यम बन रहा है।”
जहां हर कोई शामिल होना चाहता है
आज के डिजिटल दौर में, जब अधिकांश बातचीत मोबाइल स्क्रीन और सोशल मीडिया तक सिमटती जा रही है, महजोंग महिलाओं को कुछ अलग देता है—कुछ घंटे केवल संवाद, हंसी और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के।
इस खेल में स्मरण शक्ति, अवलोकन, रणनीति और संभावनाओं की समझ की आवश्यकता होती है। हर नई टाइल के साथ खेल की दिशा बदल सकती है और यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है।
लेकिन महजोंग की असली खूबसूरती केवल खेल में नहीं है।
यहां अजनबी परिचित बनते हैं।
परिचित दोस्त बनते हैं।
और दोस्त मिलकर एक समुदाय का निर्माण करते हैं।
दोस्ती सबसे बड़ी जीत
चंडीगढ़ में पिछले कुछ वर्षों से महिलाओं के बीच अनुभव-आधारित समुदायों का चलन तेजी से बढ़ा है। वेलनेस ग्रुप्स, हॉबी क्लब्स और सोशल सर्किल्स अब केवल समय बिताने का साधन नहीं, बल्कि सार्थक मानवीय जुड़ाव का मंच बन चुके हैं। महजोंग इसी बदलाव का हिस्सा है।
शीनू कहती हैं, “हमारा उद्देश्य कभी केवल अच्छे खिलाड़ी तैयार करना नहीं था। मैंने कई महिलाओं को यह कहते हुए क्लास में आते देखा है कि वे यहां किसी को नहीं जानतीं। कुछ ही सप्ताह बाद वही महिलाएं साथ में जन्मदिन मनाती हैं, यात्राएं प्लान करती हैं और हर गेम सेशन का इंतजार करती हैं। महजोंग तो बस एक बहाना है, असली पुरस्कार तो दोस्तियां हैं।”
सी सोच के साथ शीनू मलिक और प्रियंका आहूजा अपने सत्रों को सहज और स्वागतपूर्ण बनाती हैं। यहां नई खिलाड़ी केवल नियम नहीं सीखतीं, बल्कि एक ऐसे समूह का हिस्सा बन जाती हैं जो उन्हें लंबे समय तक जोड़े रखता है।
पीढ़ियों को जोड़ता एक खेल
आज महजोंग की मेज पर कॉलेज ग्रेजुएट्स, बिजनेस ओनर्स, युवा माताएं और सेवानिवृत्त महिलाएं एक साथ बैठती हैं। खेल खत्म होने के बाद भी बातचीत और रिश्तों का सिलसिला जारी रहता है।
CakeTalk के माध्यम से वर्षों तक लोगों की खुशियों में मिठास घोलने वाली शीनू मलिक के लिए यह सफर भी किसी उत्सव से कम नहीं।
वे मुस्कुराते हुए कहती हैं, “मैंने वर्षों तक ऐसे केक बनाए जो लोगों की यादों का हिस्सा बने। अब मुझे उन यादों को बनाने का अवसर मिल रहा है।”
अच्छे भोजन, जीवंत संवाद और सामाजिक मेल-मिलाप के लिए प्रसिद्ध चंडीगढ़ में शायद यह स्वाभाविक ही था कि एक दिन ऐसा खेल लोकप्रिय हो जाए, जो इन सभी तत्वों को एक साथ समेटे हुए है।
महजोंग अब केवल एक खेल नहीं, बल्कि नई दोस्तियों, नए अनुभवों और नए समुदायों की कहानी बन चुका है—एक टाइल, एक चाल और एक मुस्कान के साथ।


