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बॉटनिकल गार्डन एवं नेचर पार्क, सारंगपुर में इंटर्न्स को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण…..

द एनवायरनमेंट सोसायटी ऑफ इंडिया (ESI), चंडीगढ़ द्वारा अपने सतत इंटर्नशिप फील्ड एक्सपोजर प्रोग्राम के अंतर्गत वन एवं वन्यजीव विभाग, यू.टी. चंडीगढ़ के सहयोग से इंटर्न्स के लिए बॉटनिकल गार्डन एवं नेचर पार्क, सारंगपुर का शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र; डीएवी कॉलेज, करनाल; चंडीगढ़ विश्वविद्यालय, घरुआँ; गवर्नमेंट पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, सेक्टर-11, चंडीगढ़; तथा डीएवी कॉलेज, सेक्टर-10, चंडीगढ़ के इंटर्न्स ने भाग लिया। कार्यक्रम में द एनवायरनमेंट सोसायटी ऑफ इंडिया के सदस्य श्री एन.के. झिंगन, सचिव, द एनवायरनमेंट सोसायटी ऑफ इंडिया एवं सचिव (पर्यावरण), भारतीय एकता मंच; श्री अशोक कुमार बंसल; तथा डॉ. रविंदर नाथ, कोषाध्यक्ष, ESI एवं सदस्य, एडमिनिस्ट्रेटर एडवाइजरी कमेटी, चंडीगढ़ भी उपस्थित रहे।

इंटर्न्स एवं वन विभाग के अधिकारियों का स्वागत करते हुए श्री एन.के. झिंगन ने युवाओं को पौधों की पहचान, जैव विविधता संरक्षण तथा पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के फील्ड एक्सपोजर कार्यक्रम युवाओं में पर्यावरण संरक्षण के प्रति व्यावहारिक समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भ्रमण के दौरान इंटर्न्स ने चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा विकसित कैक्सस कॉर्नर एवं बोनसाई कॉर्नर का अवलोकन किया। उन्हें बोनसाई तैयार करने एवं उसके रखरखाव की कला और विज्ञान के बारे में जानकारी दी गई। इंटर्न्स 42 वर्ष, 38 वर्ष और 17 वर्ष पुराने बोनसाई पौधों को देखकर अत्यंत प्रभावित हुए, जो वर्षों की मेहनत एवं देखभाल का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। श्री झिंगन ने बताया कि सोसायटी शीघ्र ही बोनसाई निर्माण पर एक विशेष कार्यशाला आयोजित करेगी।

इंटर्न्स को यह भी बताया गया कि बॉटनिकल गार्डन एवं नेचर पार्क, सारंगपुर विभिन्न विषयगत अनुभागों में विभाजित है, जो जैव विविधता संरक्षण एवं पर्यावरण शिक्षा को समर्पित हैं। उद्यान में प्रमुख अनुभागों में मेडिसिनल प्लांट्स गार्डन, जो 40 एकड़ में फैला है और जिसमें 130 से अधिक औषधीय वृक्ष, झाड़ियाँ, जड़ी-बूटियाँ एवं लताएँ हैं; बम्बुसेटम में 22 प्रजातियों के बांस; फाइकस ग्रोव में 18 प्रजातियों के फाइकस; आर्बोरेटम में लगभग 90 प्रजातियों के वृक्ष; फ्लावरिंग ट्री सेक्शन में 35 से अधिक प्रजातियाँ; पाइनेटम में 12 शंकुधारी प्रजातियाँ; पाल्मेटम में 20 प्रजातियों के पाम एवं साइकैड; सेक्रेड ग्रोव (सर्व धर्म वृक्ष); कैक्सस एवं सक्यूलेंट सेक्शन में लगभग 100 किस्में; एक्वाटिक प्लांट्स सेक्शन में लगभग 30 प्रजातियाँ; ट्रॉपिकल रेन फॉरेस्ट सेक्शन तथा बल्बस गार्डन, जो 2 एकड़ में फैला है, शामिल हैं। इन विविध अनुभागों ने इंटर्न्स को पौधों की विविधता, संरक्षण पद्धतियों तथा पारिस्थितिक महत्व को समझने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान किया।

डॉ. रविंदर नाथ ने कैक्सस गार्डन के विकास तथा कैक्सस प्रजातियों की विशिष्ट विशेषताओं एवं पारिस्थितिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि व्यावहारिक प्रशिक्षण पर्यावरण जागरूकता को सुदृढ़ करने तथा संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

श्री दर्शन शर्मा, फॉरेस्ट गार्ड, ने बॉटनिकल गार्डन, बोनसाई पार्क एवं कैक्सस पार्क की स्थापना तथा वहां संरक्षित विभिन्न पौधों की प्रजातियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इसके पश्चात उन्होंने प्रतिभागियों को नर्सरी एवं ग्रीनहाउस सुविधाओं का भ्रमण कराया। उन्होंने आधुनिक ग्रीनहाउस प्रणाली का प्रदर्शन किया, जिसमें स्वचालित सिंचाई एवं तापमान नियंत्रित व्यवस्था उपलब्ध है, जो स्वस्थ पौध तैयार करने में सहायक है।

पूरे कार्यक्रम के दौरान इंटर्न्स ने गहरी रुचि दिखाई और वन विभाग के अधिकारियों के साथ सक्रिय संवाद किया। उन्होंने नर्सरी प्रबंधन, पौधारोपण तकनीकों एवं पर्यावरण संरक्षण की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त करने के अवसर की सराहना की।

कार्यक्रम का समापन श्री अशोक कुमार बंसल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने वन एवं वन्यजीव विभाग तथा चंडीगढ़ प्रशासन का इंटर्न्स को उपयोगी व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं सार्थक सीखने का अवसर प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया।

एन.के. झिंगन

सचिव

द एनवायरनमेंट सोसायटी ऑफ इंडिया

मोबाइल: 9417004937