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पंचकूला में नाइट क्लबों की सुरक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ाने की बजाय इन्हें बंद करे सरकार…..

इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के पंचकूला जिलाध्यक्ष शहरी एवं प्रदेश कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने शहर में संचालित नाइट क्लबों को लेकर सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जिन स्थानों को लेकर बार-बार कानून व्यवस्था की चिंता सामने आ रही है, वहां पुलिस सुरक्षा और सरकारी संसाधनों का अतिरिक्त बोझ डालने की बजाय ऐसे नाइट क्लबों की समीक्षा कर इन्हें बंद करने पर विचार किया जाना चाहिए। वास्तव में पंचकूला के यह क्लब गैंगस्टरों, अपराधियों तथा नशा करने वालों के मिलन स्थल बन गए हैं।

उल्लेखनीय है कि समाचार पत्रों में छपी खबरों के अनुसार क्लब संचालकों से रंगदारी मांगी गई है।

उन्होंने कहा कि पंचकूला एक शांत और व्यवस्थित शहर के रूप में पहचाना जाता है। यहां परिवार, बुजुर्ग और युवा सुरक्षित माहौल चाहते हैं, लेकिन देर रात तक चलने वाले कुछ प्रतिष्ठानों के कारण सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। यदि किसी निजी व्यवसाय की सुरक्षा के लिए पुलिस बल, गश्त और प्रशासनिक मशीनरी का अधिक इस्तेमाल करना पड़ रहा है तो सरकार को इसकी प्राथमिकताओं पर विचार करना चाहिए। पुलिस का काम ऐसे क्लब संचालकों को पर्सनल सिक्योरिटी आफिसर मुहैया करवाना नहीं बल्कि जनता को सुरक्षा का एहसास करवाने का है। आम जनता की कीमत पर अनावश्यक कारोबार को सुरक्षा देना नियमों के विरुद्ध है।

मनोज अग्रवाल ने कहा कि जनता की सुरक्षा पुलिस की पहली जिम्मेदारी है। पुलिस बल का उपयोग आम नागरिकों की सुरक्षा, अपराध नियंत्रण और शहर की कानून व्यवस्था मजबूत करने के लिए होना चाहिए, न कि ऐसे स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था संभालने में जहां से लगातार शिकायतें सामने आती हैं।

उन्होंने मांग की कि प्रशासन नाइट क्लबों के लाइसेंस, संचालन समय, सुरक्षा मानकों और कानून व्यवस्था पर इनके प्रभाव की निष्पक्ष समीक्षा करे। यदि किसी भी प्रतिष्ठान से शहर का माहौल खराब हो रहा है या अपराध की आशंका बढ़ रही है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

इनेलो नेता ने कहा कि सरकार को जनता की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। पंचकूला में अपराध रोकने, सीसीटीवी व्यवस्था मजबूत करने और पुलिस व्यवस्था सुधारने पर ध्यान देने की जरूरत है, न कि विवादित गतिविधियों वाले स्थानों पर अतिरिक्त संसाधन खर्च करने की।

उन्होंने कहा कि पंचकूला की पहचान एक सुरक्षित और शांत शहर की बनी रहे, इसके लिए प्रशासन को कठोर और जनहित में निर्णय लेने होंगे।