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पारस हेल्थ पंचकूला में डायबिटिक फुट अल्सर का सफल उपचार, मरीजों में पैर काटने का खतरा हुआ कम…..

पंचकूला, 16 जून 2026: मधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों में पैरों में होने वाले घाव यानी डायबिटिक फुट अल्सर एक गंभीर समस्या बनते जा रहे हैं। समय पर इलाज न मिलने पर यह स्थिति संक्रमण, चलने-फिरने में परेशानी और कई मामलों में पैर काटने तक की नौबत ला सकती है। ऐसे ही मरीजों के लिए पारस हेल्थ पंचकूला ने एक विशेष शल्य चिकित्सा प्रक्रिया के माध्यम से बड़ी सफलता हासिल की है।

अस्पताल में पैर के अंगूठे के नीचे लंबे समय से बने रहने वाले डायबिटिक फुट अल्सर से पीड़ित चार मरीजों का सफल उपचार किया गया। ये सभी मरीज लंबे समय से दवाइयों, ड्रेसिंग और अन्य पारंपरिक उपचारों के बावजूद बार-बार घाव होने की समस्या से जूझ रहे थे। विशेष प्रक्रिया के बाद न केवल उनके घाव पूरी तरह भर गए, बल्कि नियमित जांच के दौरान किसी भी मरीज में अल्सर दोबारा नहीं पाया गया। मरीजों ने चलने-फिरने में अधिक आराम और बेहतर जीवन गुणवत्ता का अनुभव भी साझा किया।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में डायबिटिक फुट अल्सर स्वास्थ्य क्षेत्र के सामने तेजी से बढ़ती चुनौती है। यह समस्या अक्सर बार-बार संक्रमण, लंबे उपचार, अस्पताल में भर्ती होने और गंभीर मामलों में पैर काटने का कारण बनती है। खासकर बड़े पैर के अंगूठे के नीचे होने वाले घावों का उपचार कठिन माना जाता है, क्योंकि चलने के दौरान इस हिस्से पर लगातार दबाव पड़ता है।

पारस हेल्थ पंचकूला में प्लास्टिक सर्जरी विभाग के सलाहकार डॉ. सौरव सरकार ने बताया कि डायबिटिक फुट अल्सर केवल एक साधारण घाव नहीं है, बल्कि यह गंभीर संक्रमण और अंग कटने के जोखिम से जुड़ी स्थिति है। उन्होंने कहा कि कई बार घाव बार-बार इसलिए होते हैं क्योंकि समस्या की मूल वजह, यानी प्रभावित हिस्से पर पड़ने वाले अत्यधिक दबाव, का समाधान नहीं किया जाता। सही समय पर उपचार और विभिन्न विशेषज्ञों की संयुक्त देखरेख से मरीजों के पैर बचाए जा सकते हैं और उनकी सामान्य जीवनशैली वापस लाई जा सकती है।

पारस हेल्थ पंचकूला के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. पंकज मित्तल ने कहा कि डायबिटिक फुट आज पैर काटने के प्रमुख कारणों में शामिल है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में मरीजों को शुरुआती जांच, आधुनिक शल्य चिकित्सा और व्यक्तिगत पुनर्वास सेवाओं सहित समग्र देखभाल प्रदान की जाती है। समय पर हस्तक्षेप से गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है और मरीजों को बेहतर जीवन जीने में मदद मिलती है।

इस उपचार में केलर गैप आर्थ्रोप्लास्टी नामक विशेष शल्य चिकित्सा तकनीक का उपयोग किया गया। यह प्रक्रिया बड़े पैर के अंगूठे के नीचे पड़ने वाले अत्यधिक दबाव को कम करती है, जिससे घाव तेजी से भरने में मदद मिलती है और उनके दोबारा होने की संभावना घटती है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित पैरों की जांच, रक्त शर्करा को नियंत्रित रखना, उचित फुटवियर का उपयोग और किसी भी घाव या सूजन को नजरअंदाज न करना डायबिटिक फुट से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं। समय पर पहचान और उपचार से पैर बचाए जा सकते हैं तथा मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।