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रीवा हादसे पर जैन समाज में रोष, संतों की सुरक्षा को लेकर राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन…..

रीवा, मध्यप्रदेश में हुए दर्दनाक सड़क हादसे, जिसमें दो जैन साध्वियों की एक तेज रफ्तार कार द्वारा कुचल दिए जाने से दुःखद मृत्यु हो गई, ने पूरे देश के जैन समाज को गहरे सदमे और शोक में डाल दिया है। घटना के बाद आरोपी वाहन चालक मौके से फरार हो गया था, जिसे लगभग 270 किलोमीटर दूर जाकर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया।
यह अत्यंत दुःखद घटना एक बार फिर जैन संतों एवं साध्वियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। जैन साधु-साध्वियां अपने कठोर धार्मिक अनुशासन एवं अहिंसात्मक जीवन पद्धति के अनुसार पैदल विहार करते हैं तथा एक स्थान से दूसरे स्थान तक बिना किसी वाहन के यात्रा करते हैं। हाल के वर्षों में इस प्रकार की दुर्घटनाओं में वृद्धि होने से जैन समाज में गहरी चिंता एवं आक्रोश व्याप्त है।
इसी विषय को लेकर श्री दिगम्बर जैन सोसाइटी के प्रतिनिधियों — श्री धर्म बहादुर जैन(अध्यक्ष), श्री संत कुमार जैन(महा सचिव) एवं श्री करुण जैन(एग्जीक्यूटिव मेंबर) — ने पंजाब के माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी से भेंट कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा तथा जैन संतों के सुरक्षित विहार हेतु तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल द्वारा निम्न प्रमुख मांगें रखी गईं —
रीवा दुर्घटना की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच करवाई जाए।
जैन साधु-साध्वियों के सुरक्षित विहार हेतु एक स्पष्ट प्रोटोकॉल/एसओपी बनाई जाए।
जैन संतों से संबंधित ऐसी घटनाओं को “संवेदनशील विषय” मानते हुए तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
प्रतिनिधियों ने कहा कि जैन संत एवं साध्वियां अपना संपूर्ण जीवन शांति, अहिंसा, अध्यात्म एवं सामाजिक सद्भाव के लिए समर्पित करते हैं। ऐसे में सार्वजनिक मार्गों पर नंगे पैर विहार करने वाले संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना समाज एवं प्रशासन दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
चंडीगढ़ जैन समाज ने प्रशासन से मांग की कि भविष्य में इस प्रकार की दुःखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु ठोस एवं प्रभावी कदम उठाए जाएं। साथ ही समाज के लोगों से भी अपील की गई कि वे अधिक संख्या में संतों के साथ विहार में चलें, जिससे इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।
माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि इस विषय में शीघ्र उचित कार्रवाई की जाएगी तथा उक्त ज्ञापन को मध्यप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री तक तत्काल प्रेषित किया जाएगा।