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श्री शिवमहापुराण कथा के उपलक्ष्य पर दिव्य मंगल कलश यात्रा का आयोजन….

चंडीगढ़ ( )पावन पुरुषोत्तम मास के अवसर पर श्रीसत्यनारायण मंदिर सेक्टर 22 सी चंडीगढ़ में 18 से 24 मई तक आयोजित श्री शिवमहापुराण कथा के उपलक्ष्य पर दिव्य मंगल कलश यात्रा का आयोजन किया गया जिसमें 101 मातृशक्ति ने अपने शीश पर कलश धारण कर कलश यात्रा गाजे बाजे के साथ कलश यात्रा मन्दिर अध्यक्ष राजकुमार सिंगल की अध्यक्षता में कलश यात्रा सेक्टर 22 के मंदिरों और निवास स्थानों से होती हुई कथा स्थल पर पहुंची इस अवसर पर कलश यात्रा का जगह-जगह स्वागत किया गया इस यात्रा मे मन्दिर के चेयरमैन जय भगवान गर्ग, सत्यनारायण गोयल, फकीर चंद ,रघुवीर ,सुशील कुमार दीपक मित्तल, सुरेंदर नायाब, महिला मंडली मूर्ति बंसल समस्त टीम के साथ मन्दिर के समस्त सदस्य उपस्थित रहे कल से कथा रोजाना 4: 30 बजे से शाम 7 बजे तक होगी आज कथा के प्रथम दिवस में सद्भावना दूत पूराणाचार्य स्वामी डा रमनीक कृष्ण जी महाराज ने श्री शिव महापुराण के महात्म्य में शौनकादि अट्ठासी हजार ऋषियों के श्री सुत जी से साधन विषयक प्रश्न पूछने से पर श्री सुत जी ने उत्तर दिया हे मुनिश्रेष्ठ ऋषियों। आप धन्य हैं आपके हृदय में पुराण कथा श्रवण करने के लिए विशेष प्रेम एवं लालसा है। इसलिए मैं विचार करके परम उत्तम शास्त्र का वर्णन करता हूं। यह उत्तम पुराण कालरूपी सर्प से प्राप्त होने वाले महान त्रास का विनाश करने वाला है। पूर्वकाल में स्वयं श्री शिवजी ने इसे कहा था। कलियुग में प्राणियों की चित्तशुधि के लिए इस से बड़ा कोई उपाय नहीं है। मनुष्य के अनेकों जन्मों के पुण्य जब जागृत होते हैं, तब उसे शिवमहापुराण की कथा श्रवण करने का सुअवसर प्राप्त होता है। इस पुराण को भूतल पर भगवान शिव का ही वाग्मय स्वरूप समझना चाहिए।

इसके श्रवण एवं पठन से जीव शिवभक्ति पाकर शिवपद को प्राप्त हो जाता है। इसलिए संपूर्ण यत्न करके मनुष्यों ने इस पुराण के अध्ययन को अभीष्ट साधन माना है। राजसूय यज्ञ एवं सैकड़ों अग्निष्ठोंम यज्ञों से जो पुण्य प्राप्त होता है वह भगवान श्री शिव की इस अमृतमय शिवमहापुराण कथा श्रवण करने मात्र से प्राप्त हो जाता है। कथा उपरांत आरती कर परसाद वितरित किया गया