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अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन 11 और 12 अप्रैल 2026 को जीरकपुर में होगा आयोजित….

चंडीगढ़:–अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का दो दिवसीय राष्ट्रीयअधिवेशन 11 और 12 अप्रैल 2026 को जीरकपुर के वेडलॉक मैनर में आयोजित हो रहा है। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर राजा मानवेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में यह अधिवेशन आयोजित हो रहा है। राजा मानवेन्द्र सिंह जी -राष्ट्रीय अध्यक्ष मथुरा से तीन बार सांसद रह चुके हैं। अधिवेशन में टिक्का शिवेंद्र पाल कुटलैहड़ -राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, विजय सिंह सोनगरा- राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, गजेंद्र सिंह राणा -चंडीगढ़ अध्यक्ष, यशपाल राणा-हरियाणा अध्यक्ष, कामनेश धलारिया-चंडीगढ़ सचिव, अमन राम-चंडीगढ़ उपाध्यक्ष, उमेश सिंह राणा-पंजाब युवा अध्यक्ष, साहिल सिंह राठौड़-पंजाब युवा उपाध्यक्ष और कुँवर नीरज सिंह इस कार्यक्रम के मुख्य आयोजक है।

राजा मानवेन्द्र सिंह जी -राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि 11 और 12 अप्रैल 2026 को होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन में देश भर से क्षत्रिय समाज के सदस्य शामिल होंगे। इनके अलावा कार्यक्रम में समाज के विशिष्ट अतिथि एवं प्रबुद्ध जन और कई राज परिवार का भी आना प्रस्तावित है। उन्होंने आगे बताया कि अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की स्थापना 1897 में हुई थी, जो देश की अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा देश की सबसे पुरानी संस्था है और इसे 129 वर्ष पूर्ण हो चुके है। यह देश के 24 राज्यों में कार्यरत है। इस आयोजन में सभी 24 राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जिसमें युवा और महिला भी उपस्थित रहेंगे। 12 तारीख को सैकड़ो की संख्या में मेंबर्स आना अपेक्षित है। अधिवेशन में क्षत्रिय समाज जे जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। उन्होंने बताया कि अधिवेशन के मुख्य एजेंडे जिन पर चर्चा होगी, इस प्रकार से हैं:- जातिगत आरक्षण को समाप्त कर आर्थिक आधार पर किया जाए, एट्रोसिटी एक्ट (SC-ST Act) को समाप्त किया जाए, महाराणा प्रताप जी की जयंती पर राष्ट्रीय अवकाश के लिए भारत सरकार से मंजूरी दिलवाना, समाज के गरीब छात्र-छात्राओं को शिक्षा के लिए मदद करना, भारत सरकार से लगातार पत्राचार कर UGC कानून में पुनः विचार करने का आग्रह करना, क्षत्रिय इतिहास को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करवाना, क्षत्रिय इतिहास रक्षा करना एवं इसका प्रचार-प्रसार करना, क्षत्रिय संस्कृति, नैतिकता, शिक्षा और परंपराओं को कायम रखना एवं इसका प्रचार-प्रसार करना, सर्वत्र फैले क्षत्रिय संगठनों के बीच प्रभावी समन्वय के लिए शीर्ष निकाय के रूप में कार्य करना, क्षत्रिय एकता, सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए कार्य करना।

राष्ट्र, प्रकृति, संस्कृति की रक्षा के लिए कार्य करना और क्षत्रियों द्वारा स्थापित विरासत किले/महल/धरोहर के जीर्णोद्धार करवाना एवं इनकी रक्षा के लिए कार्य करना, शराब, दहेज प्रथा और मृत्यु भोज प्रथा बंद करवाना और सामाजिक सुधारों को बढ़ावा देना, समाज हित में कार्य करने वाले व्यक्तिओ को अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा से जोड़ना, देश के हर प्रांत में महापुरुषों का स्मारक और क्षत्रिय भवन निर्माण करने का प्रयास करना और देश के सर्व समाज की एकता और संप्रभुता के लिए कार्य करना शामिल हैं।