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2035 तक 60% गैर-जीवाश्म बिजली का लक्ष्य: भारत ने दिखाया जलवायु प्रतिबद्धता का दम….

डॉ. अरुणाभा घोष, सीईओ, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) ने कहा, “ऐसे समय में जब संघर्ष और ऊर्जा सुरक्षा की चिंताएं विभिन्न देशों को जलवायु प्रतिबद्धताओं से पीछे खींच रही हैं, भारत के नए ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (NDC) एक महत्वपूर्ण संकेत हैं। 2035 तक गैर-जीवाश्म ईंधन की बिजली क्षमता में 60% की लक्षित हिस्सेदारी बताती है कि भारत ने जहां बिजली क्षेत्र को कार्बन मुक्त करने की अपनी महत्वाकांक्षा को बढ़ाया है, वहीं उसने अपने करोड़ों नागरिकों के लिए ऊर्जा सुरक्षा और किफायती बनाए रखने पर भी जोर दिया है। यह उल्लेखनीय है कि भारत के पावर मार्केट (बिजली बाजार) तेजी से विकसित हो रहे हैं। अगर यही लय जारी रही और आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं में कमी आई तो हमारा अनुमान है कि भारत अपने लक्ष्य से आगे निकल जाएगा, जैसा कि उसने पहले कई बार किया है।

अब 47% की उत्सर्जन तीव्रता (एमिशन इंटेंसिटी) का लक्ष्य वैश्विक अर्थव्यवस्था की मौजूदा अनिश्चितताओं के बीच प्रगति को दर्शाता है। नवाचार पर जोर देने का अर्थ है कि ग्रीन हाइड्रोजन, दुर्लभ खनिज, कार्बन कैप्चर और उन्नत बैटरियां न केवल बिजली क्षेत्र, बल्कि उससे आगे भारत के ऊर्जा संक्रमण (एनर्जी ट्रांजिशन) को सुरक्षित बनाने के लिए महत्वपूर्ण होंगी। भारत ने कार्बन सिंक के निर्माण को भी काफी हद तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है, जो कृषि-वानिकी, मृदा स्वास्थ्य और जैव विविधता संरक्षण के लिए निवेश के नए रास्ते खोल सकता है।

इसके अलावा, लचीले बुनियादी ढांचे और अनुकूलन (एडैप्टेशन) पर बहुत अधिक मजबूती से जोर दिया जाना दर्शाता है कि भारत ने जलवायु संबंधी सुभेद्यताओं- अनियमित वर्षा हो, लू (हीटवेव), तटीय जोखिम और विकास, आजीविका तथा बुनियादी ढांचे के संरक्षण की जरूरत को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है। मैंग्रोव की पुनर्बहाली और तटीय सुरक्षा, चक्रवात और तूफान के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, और राज्यों में ‘हीट एक्शन प्लान’ के विस्तार जैसे उपाय बताते हैं कि अनुकूलन और लचीलापन भारत की जलवायु रणनीति के केंद्रीय स्तंभ बन रहे हैं। साथ ही, मिशन लाइफ चक्रीय और जैव-अर्थव्यवस्था (सर्कुलर और बायोइकोनॉमी) में अवसर उपलब्ध कराता है, और यह दिखाता है कि कैसे सतत जीवनशैली नए विकास और मूल्य सृजन को रफ्तार दे सकती है।

अंत में, ये लक्ष्य यह भी बताते हैं कि भारत ‘हरित अर्थव्यवस्था’ के विचार को आत्मसात कर रहा है — जहां जलवायु कार्रवाई को अलग-थलग नहीं माना जाता है, बल्कि देश की व्यापक विकास और आर्थिक रणनीति का हिस्सा बनाया जाता है। व्यापक आर्थिक झटकों और चरम जलवायु परिस्थितियों का सामना करने के बावजूद, भारत अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं पर पूरी तरह कायम रहा है, उसने ऊर्जा सुरक्षा और लचीलेपन के बीच संतुलन बनाने वाले एनडीसी की घोषणा की है।”