होलिका दहन की परंपरा अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक…
होलिका दहन की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है और इसे अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व नकारात्मक शक्तियों के अंत और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का संदेश देता है। इस शुभ अवसर पर लोग होलिका की परिक्रमा कर अपने परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। इसी परंपरा के अंतर्गत श्रीखेड़ा शिव मंदिर सेक्टर 28 में होलिका दहन में भाग लेने पहुंचे लोगों ने होलिका दहन की अग्नि में नारियल, अनाज सहित कई सामग्री चढ़ाई और अपने परिवार, समाज व देश के लिए सुख, समृद्धि व शांति की कामना की। होलिका दहन के आयोजन में पूजा अर्चना भी की गयी।
आयोजित होलिका दहन के उपरांत लोगों ने एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाया और होली की बधाई दी। विशेष रूप से गुजिया मिठाई का प्रसाद बांटा गया। इस पावन पर्व के शुभावसर मंदिर सभा के प्रधान देशराज बंसल, जिंदल परिवार, रामरतन अग्रवाल, रोहित ग्रोवर, वनिता दीदी,
बिंदु बंसल, गीता गुलाटी,अनीता गोयल, सुमन शर्मा, रेनू शर्मा, आशाअरोड़ा,सुनीता भाटिया, ज्योति मिड्ढा,सुमन गोयल, कान्ता जी, शीला गोयल, अर्चना सूद एवं महिला मंडल की सभी सदस्याएं उपस्थिति रहीं।


