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श्री शिव महापुराण कथा में जलंधर-वृंदा प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन….

श्री बाबा बालक नाथ मंदिर, सेक्टर 29 ए चंडीगढ़ में चल रही श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा वाचन का दिव्य दायित्व श्री गोपाल शुक्ल जी महाराज निभा रहे हैं। मुख्य यजमान श्रीमती जोत्सना शर्मा जी, मंदिर के प्रधान श्री विनोद कुमार चड्ढा तथा सभा के समस्त कार्यकारिणी सदस्य इस आयोजन में सेवा दे रहे हैं।

आज की कथा में महाराज श्री ने समुद्र मंथन से उत्पन्न हुए असुर राजा जलंधर और उनकी पत्नी वृंदा की मार्मिक कथा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि समुद्र मंथन के समय उत्पन्न हुए शक्तिशाली बालक को समुद्र ने अपनाया, जिससे उसका नाम जलंधर पड़ा। शिव के तेज का अंश होने के कारण वह अत्यंत बलशाली बना। कठोर तपस्या से ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त कर उसने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया।

कथा में बताया गया कि जलंधर की पत्नी वृंदा परम पतिव्रता और सती स्त्री थी। उसके पतिव्रत की शक्ति से जलंधर अजेय बना रहा। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने जलंधर का रूप धारण कर वृंदा के पतिव्रत को भंग किया, जिसके पश्चात भगवान शिव ने जलंधर का वध किया। जब वृंदा को छल का पता चला तो उसने भगवान विष्णु को पत्नी-वियोग का शाप दिया, जो आगे चलकर राम अवतार में सीता-वियोग के रूप में फलित हुआ।

महाराज श्री ने बताया कि वृंदा के त्याग और पवित्रता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे तुलसी के रूप में पूजनीय होने का वरदान दिया। इसी कारण विष्णु पूजा में तुलसी का विशेष महत्व माना जाता है। कथा में शंखचूर्ण प्रसंग का भी वर्णन किया गया, जिसके वध के बाद भगवान विष्णु का पाञ्चजन्य शंख प्रकट हुआ।

कथा श्रवण हेतु श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है और वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।

इस दिव्य कथा का सीधा प्रसारण श्री गोपाल जी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल “Gopal Ji Bhakti Marg” तथा फेसबुक पर भी लाइव किया जा रहा है, जहां श्रद्धालु घर बैठे कथा का आनंद ले सकते हैं।